MP News: 26 जिलों में 61 दिनों में 26399 मौतें, कोविड प्रोटोकॉल से 11467 शवों का अंतिम संस्कार

सांकेतिक फोटो.

सांकेतिक फोटो.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona) की वजह से हुई मौत का तांडव जारी है. बीते 61 दिनों में 26 हजार 399 मौतें हुईं. इनमें से कोरोना के प्रोटोकॉल के तहत 11 हजार 467 शवों का अंतिम संस्कार किया गया.

  • Share this:

भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona) संक्रमण की वजह से मौत का तांडव जारी है. बीते 61 दिनों में 26 हजार 399 मौत हुई हैं. इनमें से कोरोना प्रोटोकॉल के तहत 11 हजार 467 शवों का अंतिम संस्कार किया गया. सबसे ज्यादा मौत अप्रैल के महीने में हुई. प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर समेत 26 जिलों के प्रमुख मुक्तिधामों और कब्रिस्तानों से मिले मौत के आंकड़े पर नज़र डालें तो अप्रैल में 21 हजार 601 और मार्च में 4 हजार 798 लोगों की मौत हुई. दो महीनों में कुल 26399 लोगों की मौत हुई. इनमें से कोविड प्रोटोकॉल से 11467 शवों का अंतिम संस्कार किया गया. 26 जिलों में अप्रैल में सबसे ज्यादा 10599, मार्च में 868 शवों का कोविड प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार हुआ.

भोपाल में अप्रैल में 2675 और इंदौर में 2259 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. मार्च में भोपाल में 165 और इंदौर में 306 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. अप्रैल में सबसे ज्यादा मौत के मामले सामने आए. यह मामले इसलिए सामने आए क्योंकि अप्रैल में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैला था. हालांकि, मई के आंकड़े को यदि मार्च और अप्रैल में जोड़ दिया जाए तो मौत का आंकड़ा कई गुना बढ़ जाएगा. साथ ही 26 जिले के बाद बाकी जिलों के आंकड़ों को जोड़ा जाए तो मौत आंकड़ा कई गुना बढ़ेगा.

सरकारी फाइलों में मौत न के बराबर

मौत के मंजर की यह तस्वीर शहर के प्रमुख विश्राम घाट और कब्रिस्तान से निकल कर सामने आई है. हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से मौत का आंकड़ा न के बराबर है. भोपाल की बात करें तो सरकारी फाइलों में भोपाल में रोजाना 4 से 5 मौत कोरोना से बताई जाती हैं. यही हाल प्रदेश के दूसरे जिलों का है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जो आंकड़ा विश्रामघाट और कब्रिस्तान से सामने आ रहा है, उनकी वास्तविकता पर नजर डालें तो उन शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है. क्या उनकी मौत कोरोना कि वजह से नहीं हुई है या फिर सरकार मौत के आंकड़ों की सच्चाई छुपाना चाहती है?

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज