PHOTOS : जानिए कांग्रेस प्रत्याशियों के बारे में जो आपके इलाके से लड़ेंगे चुनाव
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PHOTOS : जानिए कांग्रेस प्रत्याशियों के बारे में जो आपके इलाके से लड़ेंगे चुनाव
ग्वालियर. भांडेर सीट पर कांग्रेस ने फूलसिंह बरैया को टिकट दिया है.

भोपाल. मध्य प्रदेश (MP) की 15 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव (By Election) के लिए कांग्रेस ने आज अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए. इनमें से कुछ उम्मीदवार पार्टी के निष्ठावान नेता और कार्यकर्ता हैं, जबकि कुछ दल बदल कर आए हैं.

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  • Last Updated: September 11, 2020, 7:04 PM IST
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सुनील शर्मा को कांग्रेस ने ग्वालियर विधान सभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. वो फिलहाल पार्टी के प्रदेश महासचिव हैं. इस सीट पर इनका मुकाबला शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रधुम्न सिंह तोमर से होगा.सुनील शर्मा ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में युवा ब्राह्मण चेहरा हैं. इस क्षेत्र में करीब 35 हज़ार ब्राह्मण मतदाता हैं. सुनील शर्मा सिंधिया के कट्टर समर्थक थे, लेकिन वो निष्ठावान पक्के कांग्रेसी भी हैं. इसलिए सिंधिया के जाने के बाद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी. 2018 के विधानसभा चुनाव में भी सुनील ने टिकट के लिए दावेदारी की थी. लेकिन सिंधिया ने प्रधुम्न को टिकट दिलवा दिया था. सुनील शर्मा को सिंधिया के साथ दल न बदलने का कांग्रेस ने इनाम दिया है. उन्हें कमलनाथ और दिग्विजय दोनों का सपोर्ट मिला.


अशोकनगर. अशोकनगर सीट पर कांग्रेस की आशा दोहरे प्रत्याशी होंगी. वो राजनीति में पिछले कुछ वर्षो से सक्रिय हैं. इन्हें राजनीति में लाने का श्रेय इनकी सास अनिता जैन को जाता है. अनिता जैन लम्बे समय से कांग्रेस की सक्रिय कार्यकर्ता हैं.वो नगर पालिका से 4 बार पार्षद और एक बार नगर पालिका अध्यक्ष के रूप चुनाव लड़ चुकी हैं,हालांकि उस दौरान इन्हें हार का सामना करना पड़ा था.आशा दोहरे का कोई विशेष राजनीतिक कार्यकाल नहीं है. न तो इन्हें अब तक किसी मंच पर सक्रिय देखा गया न ही किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुईं.पिछले चुनाव में भी आशा दोहरे ने टिकट के लिए दावेदारी की थी.


शिवपुरी. कांग्रेस ने शिवपुरी की करैरा विधानसभा सीट से प्रागीलाल जाटव को अपना उम्मीदवार बनाया है. इन्होंने पिछला चुनाव बतौर बसपा उम्मीदवार लड़ा था. कुछ समय पहले ही ये कांग्रेस में शामिल हुए हैं और टिकट पाने में भी कामयाब रहे.




गुना.कांग्रेस ने बमोरी विधानसभा उपचुनाव के लिए कन्हैयालाल अग्रवाल को टिकट दिया है. वो भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए हैं.कन्हैयालाल अग्रवाल कद्दावर नेता और पूर्व राज्यमंत्री हैं. 2018 के विधान सभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरे थे औऱ 28 हजार वोट हासिल किए थे.

भिंड. भिंड की गोहद विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने मेवाराम जाटव पर भरोसा जताया है. वो यहां से पार्टी प्रत्याशी होंगे. वर्ष 2013 में इन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन बीजेपी के लाल सिंह आर्य से चुनाव हार गए थे. जाटव को 2013 में 31897 वोट और लाल सिंह आर्य को 51711 मत मिले थे. मेवाराम जाटव अपनी स्वच्छ छवि के लिए पहचाने जाते हैं.


मालवा में नेपानगर से राम किशन पटेल को कांग्रेस ने टिकट दिया है. वो कोरकू जाति के हैं. पटेल के राजनैतिक सफर पर नजर डालें तो चिडयामाल गांव से सरपंच पद से सियासत की शुरूआत की थी. बाज में जिला पंचायत सदस्य,जनपद पंचायत सदस्य,बुरहानपुर कृषि उपज मंडी संचालक और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं. वर्तमान में वो जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हैं. रामकिशन पटेल 2008 में इसी सीट पर बीजेपी के राजेंद्र दादू से महज 1500 वोटों से हार गए थे. उससे पहले 2013 में बीजेपी के राजेंद्र दादू ने 26000 वोटों से हराया था. पहले सिंधिया गुट से ताल्लुक रखते थे लेकिन अब पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव के करीब हैं. वो सरल सहज स्वभाव और साफ सुथरी छवि के हैं. इस सीट पर उनका मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी सुमित्रा कास्डेकर से होगा.


देवास. हाट पिपल्या सीट पर राजवीर सिंह बघेल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे.वर्तमान में वो सोनकच्छ नगर पालिका अध्यक्ष हैं. इनके पिता राजेन्द्र सिंह बघेल पूर्व में हाटपिपल्या से कांग्रेस के दो बार विधायक रह चुके हैं. क्षेत्र में इनका अच्छा दबदबा है. राजेन्द्र सिंह की छवि दबंग विधायक के रूप में रही है. वो दिग्विजय सिंह के करीबी रहे हैं. इस इलाके में 20 से 21 हजार राजपूत समाज के वोट हैं.


मुरैना.दिमनी से कांग्रेस उम्मीदवार रवींद्र सिंह तोमर होंगे. उन्होंने बीएसपी के टिकट पर 2008 में चुनाव लड़ा था लेकिन बीजेपी से 150 वोटों से हार गए थे. उसके बाद तोमर बीएसपी से भाजपा में चले गए. लेकिन 2013 में विधान सभा में टिकट न मिलने पर कांग्रेस में आ गए. 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और बीएसपी से 2500 वोटों से हार गए. रवीन्द्र सिंह तोमर सिंधिया समर्थक माने जाते थे, लेकिन उनके साथ नहीं गए.


अंबाह सीट से कांग्रेस के सत्यप्रकाश सिकरवार पार्टी कैंडिडेट हैं. वो 2013 में बीएसपी में थे और 10 हजार वोटों से विधानसभा चुनाव जीते थे.जीत के साथ मायावती ने उन्हें बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था. 2018 में फिर वो बीएसपी से विधानसभा का चुनाव लड़े और हार गए. लेकिन 2019 में लोकसभा के दौरान वो कांग्रेस में शामिल हो गए.


आगर मालवा. इंदौर के रहने वाले विपिन वानखेड़े आगर मालवा सीट से चुनाव लड़ेंगे. इन्होंने राजनीति की शुरूआत एनएसयूआई से की थी. वो दो बार इंदौर के जिलाध्यक्ष और दो बार प्रदेश अध्यक्ष रहे. 2018 में आगर विधानसभा से कांग्रेस से चुनाव लड़ा ओर स्वर्गीय मनोहर ऊंटवाल जैसे दिग्गज बीजेपी नेता से मात्र 2490 वोटों के अंतर से हार गए थे. वानखेड़े की छवि अच्छी है. वो हार के बावजूद लगातार इलाके में सक्रिय रहे. बड़ी युवा टीम उनके साथ है. वो पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह के काफी करीबी हैं. जयवर्धन सिंह लगातार इनको साथ में लेकर क्षेत्र में दौरा कर रहे हैं.


डबरा सीट पर इस बार दिलचस्प मुकाबला होगा जब समधी-समधन आमने-सामने होंगे. कांग्रेस ने सुरेश राजे को अपना प्रत्याशी बनाया है. वो इस सीट पर इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रही इमरती देवी को टक्कर देंगे. दोनों समधी-समधन के बीच 2013 में भी मुकाबला हो चुका है. सुरेश राजे 2013 में भी अपनी समधन इमरती देवी के खिलाफ BJP के टिकिट पर चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन तब उन्हें 32 हज़ार वोट की शिकस्त झेलना पड़ी थी. साल 2018 में सुरेश राजे ने BJP छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था और इमरती देवी के लिए प्रचार किया था. और इमरती 57 हज़ार वोटों से जीती थीं.(भोपाल से अनुराग श्रीवास्तव, ग्वालियर से सुशील कौशिक, भिंड से अनिल शर्मा, अशोक नगर से अशोक अग्रवाल, आगर से रजनीश सेठी, मुरैना से दुष्यंत सिकरवार, गुना से विकास दीक्षित  )
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