एमपी में कांग्रेस और BJP के लिए नई चुनौती जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन

जय आदिवासी संगठन की ताकत कांग्रेस और बीजेपी दोनों को चुनौती दे रही है. दोनों प्रमुख दल अपनी ज़मीन खिसकती देख घबराए हुए हैं.

Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 10, 2018, 5:59 PM IST
एमपी में कांग्रेस और BJP के लिए नई चुनौती जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन
कमलनाथ और शिवराज(फाइल फोटो)
Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 10, 2018, 5:59 PM IST
जिस वक्त मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान धार में आदिवासी दिवस समारोह के एक बड़े आयोजन की मेजबानी कर रहे थे, उसी वक्त सिर्फ 50 किमी के दायरे में 'जय आदिवासी युवा शक्ति' संगठन (जयस) तीन भीड़ भरी रैलियां कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा था. क्या यह आने वाले कल की चेतावनी है ?

दरअसल जिस ताकत से 'जयस' आदिवासी इलाकों में अपनी ज़मीन तैयार कर रहा है. उसने मध्यप्रदेश के आदिवासी वोट बैंक में एक नई चेतना पैदा कर दी है. साथ ही भाजपा और कांग्रेस की पेशानी पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जो बता रही हैं कि 21 प्रतिशत वोट बैंक, 47 विधानसभा सीटों पर आदिवासी अपने नए राजनीतिक वजूद के साथ मैदान में आ रहे हैं.

162 सीटों पर जीत
'जयस' को मामूली आंदोलन समझ कर हल्के में लेने वाले राजनीतिक दल उस वक्त चौकन्ने हो गए जब धार- झाबुआ, खरगोन, बड़वानी ज़िले में जयस ने एबीवीपी और एनएसयूआई को हराकर कॉलेज चुनाव की 162 सीटों पर कब्जा जमाया. किसी मीडिया का सहारा नहीं लेते हुए सिर्फ सोशल मीडिया और फेसबुक के दम पर आदिवासी पंचायतों का आयोजन किया और अपना नेटवर्क तैयार किया. यहीं 'जयस' अब प्रदेश की 47 आदिवासी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी में है.

आदिवासी वोट बैंक तय करता है जीत
फिलहाल प्रदेश की 47 में से 32 सीट्स बीजेपी के पास हैं. 15 पर कांग्रेस का कब्जा है. लोकसभा की 29 सीट्स में से 6 सीटें आदिवासी हैं. इनमें से 5 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस है. यानी कहा जा सकता है कि बीजेपी के सिर पर जीत का सेहरा आदिवासी सीटों के दम पर बंधता रहा है. 2018 की जीत भी आदिवासियों का भरोसा हासिल किए बिना संभव नहीं है. दरअसल आदिवासी सिर्फ 47 आरक्षित सीटों पर ही नहीं बल्कि प्रदेश की 30 अन्य सीटों को भी प्रभावित करते हैं.

बीजेपी सकते में
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सूत्र बताते हैं कि भाजपा को लगातार मिल रही सर्वे रिपोर्ट्स के बाद शिवराज सरकार इस वोटबैंक को साधने के प्रयास में है. कांग्रेस भी आदिवासी इलाकों में अपनी सक्रियता को बढ़ा रही है. 'जयस' के एक नेता को धार में ही मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते हुए देखा गया है. हकीकत यह है कि दोनों ही दलों के पास एक ऐसे आदिवासी नेता की कमी है, जिसका पूरे प्रदेश में जनाधार हो. कभी यह कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था. जिसे बीजेपी ने कांग्रेस के कुछ नेताओं को अपने दल में शामिल कर हथिया लिया. कई स्थानीय समीकरण भी बीजेपी के साथ रहे.

किसी भी दल में चेहरा नहींं
लेकिन पिछले एक दशक में प्रदेश ने कई दिग्गज आदिवासी नेताओं को खो दिया. वेस्ता पटेल, दलबीर सिंह, प्रताप सिंह बघेल, दिलीप सिंह भूरिया आदि. भाजपा में एक बड़े नेता फग्गन सिंह कुलस्ते हैं, जो केंद्र की राजनीति में रहे लेकिन प्रदेश में उनका वैसा जनाधार नहीं है. कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया केंद्र में मंत्री रहे और प्रदेश के अध्यक्ष भी लेकिन 2013 का चुनाव कांग्रेस बुरी तरह हारी. आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष का कोई लाभ कांग्रेस को नहीं मिल पाया.

शिवराज ही नेता
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता मानते हैं कि इस चुनाव में शिवराज सिंह ही आदिवासियों के बीच सबसे बड़ा चेहरा हैं. हमने दो लाख करोड़ से ज्यादा विकास योजनाएं दी हैं. जिसका असर चुनाव में दिखेगा. कांग्रेस धार, झाबुआ, अलीराजपुर जैसे इलाकों में अपने नेताओं के दम पर अपनी विरासत साधने में लगी है. साथ ही छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल, मंडला, डिंडोरी, सीधी इलाके में खासा प्रभाव रखने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ तालमेल की कोशिश में है.

47 सीटों पर चुनाव लडे़ंगे
जय आदिवासी युवा शक्ति के अध्यक्ष डॉ हीरालाल अलावा एमडी मेडिसिन हैं और एम्स में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वो आदिवासी क्षेत्र कुक्षी के है और कहते हैं हमारी लड़ाई आदिवासियों के हक के लिए है. जल, ज़मीन, जंगल को लेकर जो मौलिक अधिकार आदिवासियों को हासिल है, उन पर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया है. अब हमारा नारा ही अबकी बार आदिवासी सरकार है. हम पूरी 47 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे.

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