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महिलाओं के जिम्मे आज का विधानसभा बजट सत्र, कांग्रेस MLA झूमा सोलंकी ने किया सदन का संचालन

एमपी विधानसभा में लव जिहाद के खिलाफ विधेयक पेश किया जाएगा. (File)

एमपी विधानसभा में लव जिहाद के खिलाफ विधेयक पेश किया जाएगा. (File)

मध्य प्रदेश विधानसभा का आज बड़ा दिन है. आज लव जिहाद के खिलाफ विधेयक पेश होगा. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने की मांग करेंगे.

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भोपाल. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने सदन का संचालन विधायक झूमा सोलंकी को सौंपा. आज पूरे दिन सोलंकी ही सदन का संचालन करेंगी. वहीं इससे पहले महिला मार्शल अध्यक्ष को आसंदी तक लेकर गईं. सदन की शुरुआत ही हंगामे से हुई. शून्यकाल शुरू होते ही सदन में संसदीय कार्य मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दतिया में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने जो आरोप लगाए उस पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा होनी चाहिए. इस पर मुख्य सचेतक डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि हम भी इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं.

दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने सदन में विधायकों और मंत्रियों के अलग-अलग प्रवेश द्वार का मामला सदन में उठाया. इसको लेकर प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि सदस्य आसंदी से अपनी बात कह सकते हैं. इस बात को लेकर सदन में जमकर हंगामा हो गया. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई.

धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक होगा पेश



बता दें, मध्य प्रदेश विधानसभा में  लव जिहाद के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक पेश किया जाएगा. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस विधेयक को पारित कराने की मांग करेंगे. पिछले साल 26 दिसंबर को शिवराज सरकार ने लव जिहाद कानून के मसौदे को मंजूरी दे दी थी. कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा सत्र में पेश किया जाना था, लेकिन कोरोना की वजह से उस वक्त सत्र नहीं हो सका था.
खत्म माना जाएगा धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 को

विधानसभा में पारित होने के बाद धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 को खत्म माना जाएगा. इसकी जगह नया कानून ले लेगा. मसौदे की एक खास बात ये है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और उसका धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक व्यक्ति को जिला कलेक्टर को 60 दिन पहले सूचना देना जरूरी होगी. लव जिहाद कानून के तहत अब कोई भी व्यक्ति दुर्भावना, प्रलोभन धमकी, बल प्रयोग, उत्पीड़न या अन्य कपट पूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन या धर्म परिवर्तन के लिए दबाव नहीं डाल सकेगा. इस तरह से करने वाले व्यक्ति के दबाव को षड्यंत्र माना जाएगा.

भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी तय
नए मसौदे के प्रावधानों में धर्म परिवर्तन के अपराध में पीड़ित महिला और पैदा होने वाले बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी तय की गई है. पैदा हुए बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार बरकरार रखने का प्रावधान भी शामिल किया गया है. अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ धर्म परिवर्तन कराने वाली संस्था संगठन के खिलाफ भी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. ऐसी संस्थाओं संगठनों के पंजीयन निरस्त करने का अधिकार होगा.
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