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मध्य प्रदेश में बढ़ा बर्ड फ्लू का खतरा : 8 ज़िलों में बीमारी की पुष्टि, इंदौर-नीमच में 1 किमी के दायरे की चिकन-मीट शॉप बंद

इंदौर में 500 से ज्यादा पोल्ट्री फॉर्म्स हैं.
इंदौर में 500 से ज्यादा पोल्ट्री फॉर्म्स हैं.

नीमच और इंदौर में जिन दुकानों में ये संक्रमण मिला है जिला प्रशासन ने उन दुकानों के 1 किलोमीटर के दायरे की सभी चिकन और मीट शॉप को बंद करने का फैसला किया है.

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 भोपाल. मध्य प्रदेश में बर्ड फ्लू (Bird flu) का खतरा अब बढ़ने लगा है. 1 दिन पहले तक आधा दर्जन जिलों में बर्ड फ्लू होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब इसकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है. बर्ड फ्लू की पुष्टि पशुपालन विभाग ने की है. इंदौर (Indore) और नीमच में मुर्गा मुर्गियों में बर्ड फ्लू होने की आशंका है.

इंदौर नीमच में  चिकन शॉप से सैंपल लिए गए थे. उन दुकानों के चाकू और कटर के सैंपल में बर्ड फ्लू होने की पुष्टि हुई है. विभाग मान रहा है कि यह मुर्गा मुर्गियों में बर्ड फ्लू का संक्रमण है. लेकिन इसकी जांच की जा रही है. नीमच और इंदौर में जिन दुकानों में ये संक्रमण मिला है जिला प्रशासन ने उन दुकानों के 1 किलोमीटर के दायरे की सभी चिकन और मीट शॉप को बंद करने का फैसला किया है.

पशुपालन विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश के 10 जिलों से पक्षियों की मौत की खबर आई है. 22 जिलों के सैंपल भोपाल की हाई सिक्योरिटी लैब में भेजे गए हैं. मंदसौर, नीमच, इंदौर, आगर, खरगोन, देवास, गुना, खंडवा में कौओं की मौत हुई है. खंडवा में कौओं के साथ बगुलो की भी मौत होने की पुष्टि हुई है.




फिलहाल अंडा-चिकन से खतरा नहीं
प्रदेश के पशुपालन संचालक आर के रोकड़े ने कहा फिलहाल दूसरे जिलों से लिए गए सैंपल हाई सिक्योरिटी लैब को भेजे गए हैं. रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. पशुपालन संचालक के मुताबिक मुर्गा और मुर्गी में बर्ड फ्लू के लक्षण की जांच की जा रही है. फिलहाल अंडा चिकन खाना खतरनाक नहीं है. केंद्र सरकार की गाइड लाइन के तहत 70 डिग्री सेल्सियस तक अंडा और चिकन उबालकर इस्तेमाल में लिया जा सकता है.

जांच की तैयारी
बहरहाल प्रदेश में कौवों के बाद बगुला और मुर्गा मुर्गियों तक बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने से हड़कंप के हालात हो गए हैं. हालांकि राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि जहां पर पक्षियों की मौत हो रही है वहां पर तत्काल डिसइन्फेक्शन और डिस्पोज करने की कार्रवाई की जाए. जहां पर आशंका है वहां पर सैंपल जुटाकर भोपाल की लैब में जांच के लिए भेजे जाएं.
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