MP उपचुनाव: 2018 से लेकर 20 तक यहां सिर्फ पार्टियां बदली चेहरे नहीं, जानें क्या है गणित

ग्वालियर पूर्व सीट पर दोनों प्रत्याशियों के दलबदल की वजह से अब यहां पर दल बदल का मुद्दा शून्य हो गया है. (सांकेतिक फोटो)
ग्वालियर पूर्व सीट पर दोनों प्रत्याशियों के दलबदल की वजह से अब यहां पर दल बदल का मुद्दा शून्य हो गया है. (सांकेतिक फोटो)

ग्वालियर पूर्व सीट (Gwalior East Seat) का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है. 2018 में मुन्नालाल गोयल कांग्रेस के उम्मीदवार थे. 2018 में सतीश सिकरवार बीजेपी के उम्मीदवार थे. तब मुन्ना लाल गोयल ने चुनाव में सतीश सिकरवार को शिकस्त दी थी.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में 28 सीटों के लिए होने वाले विधानसभा उपचुनाव (Assembly by-election) में अब दोनों तरफ के योद्धा लगभग तय हो गए हैं. कौन किसके खिलाफ चुनाव लड़ेगा इसकी तस्वीर भी साफ हो गई है. ऐसे में सभी पार्टियां अब अपनी रणनीति को धार देने में जुट गई हैं. इन सबके बीच मध्य प्रदेश में बदले राजनीतिक घटनाक्रम (Political Events) में कई सीटों पर रोचक मुकाबला हो गया है. कुछ सीटें तो ऐसी हैं जिनमें चेहरे वही हैं लेकिन पार्टियां बदल गई हैं. उन्हीं में से एक सीट है ग्वालियर पूर्व, जहां से बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मुन्नालाल गोयल (Munnalal Goyal) सामने हैं. जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर सतीश सिकरवार सामने है. दिलचस्प बात यह है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से मुन्नालाल गोयल कांग्रेस के उम्मीदवार थे और सतीश सिकरवार (Satish sikarwar) बीजेपी के उम्मीदवार थे. ऐसे में अब इस सीट पर चुनाव बेहद दिलचस्प हो चला है. देखना होगा कि आखिरकार जनता किस पर और कैसे भरोसा करती है.

कुछ दिलचस्प पहलू
ग्वालियर पूर्व सीट का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है. 2018 में मुन्नालाल गोयल कांग्रेस के उम्मीदवार थे. 2018 में सतीश सिकरवार बीजेपी के उम्मीदवार थे. तब मुन्ना लाल गोयल ने चुनाव में सतीश सिकरवार को शिकस्त दी थी. इसी साल मार्च में मुन्नालाल ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया.मुन्नालाल को टिकट देने से नाराज़ सतीश सिकरवार ने कमलनाथ के सामने कांग्रेस का दामन थाम लिया. लिहाज 2020 उपचुनाव में अब दोनों चेहरे पार्टियां बदलकर फिर आमने- सामने हैं. सतीश सिकरवार इससे पहले 2015 में कांग्रेस को बड़ा झटका दे चुके हैं. 2015 नगर निगम के चुनाव में सतीश सिकरवार पार्षद का चुनाव निर्विरोध जीत गए थे. उस वक़्त सतीश के समर्थन में कांग्रेस के पार्षद उम्मीदवार ने ही नाम वापस ले लिया था. वहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में जब मुन्नालाल गोयल लगभग जीता हुआ चुनाव हार गए थे तो उन्होंने बीजेपी की विजयी उम्मीदवार माया सिंह के खिलाफ मतगणना केंद्र के बाहर धरना दे दिया था.

क्या होगा नतीजा ?
ग्वालियर पूर्व सीट पर दोनों प्रत्याशियों के दलबदल की वजह से अब यहां पर दल बदल का मुद्दा शून्य हो गया है. जनता यह तय नहीं कर पा रही है कि आखिरकार वह किस पर भरोसा करे ? ऐसे में जो उम्मीदवार जातिगत समीकरण के साथ पार्टी संगठन के दम पर मैदान में जनता के बीच अपनी बात बेहतर तरीक़े से रख पायेगा जीत उसी की सुनिश्चित मानी जा रही है. ऐसे में देखना होगा कि आखिरकार उपचुनाव की इन दिलचस्प कहानियों के बीच 10 नवंबर को नतीजे किसके पक्ष में आते हैं और कौन घर पर बैठने को मजबूर होगा.
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