MP उपचुनाव का रण : नेताओं के बाद अब पार्टियों का विलय, बीजेपी में आ मिले ये दो दल

उप चुनाव से पहले दल बदल का सिलसिला तेज़ है
उप चुनाव से पहले दल बदल का सिलसिला तेज़ है

आज बीजेपी (BJP) में शामिल हुए दोनों दलों का महत्व इसलिए है कि दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के नेता ग्वालियर चंबल (Gwalior-chambal) संभाग से जुड़े हुए हैं और वहां राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहे हैं.

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भोपाल.मध्य प्रदेश (MP) में उपचुनाव (By election) से पहले नेताओं के बाद अब पूरी पार्टियों का ही दल बदल यानि विलय होने लगा है. मंगलवार को दो सियासी पार्टियों का भारतीय जनता पार्टी में विलय हो गया. सुबह लोक समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार कुशवाहा बीजेपी में शामिल हुए तो शाम होते-होते संपूर्ण समाज पार्टी की पूरी कार्यकारिणी बीजेपी में शामिल हो गई. दोनों ही पार्टियों का विलय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुआ.

इन दोनों पार्टियों का राजनीतिक तौर पर वोट बैंक के लिहाज से बहुत ज्यादा दखल ना भी हो लेकिन मध्यप्रदेश में दलबदल की सियासत के बीच इनके विलय की चर्चा खूब हो रही है. लेकिन महत्व इसलिए है कि दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के नेता ग्वालियर चंबल संभाग से जुड़े हुए हैं और वहां राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहे हैं.

कौन कब हुआ शामिल ?
लोक समता पार्टी के नेता और प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार कुशवाह सुबह मंत्री अरविंद भदौरिया के साथ सीएम हाउस पहुंचे और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने पूरी पार्टी के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. राजकुमार कुशवाह ग्वालियर चंबल में सक्रिय नेता हैं और दो बार मेहगांव से चुनाव भी लड़ चुके हैं. इसके बाद शाम होते होते संपूर्ण समाज पार्टी का भी बीजेपी में विलय हो गया. संपूर्ण समाज पार्टी की पूरी कार्यकारिणी सीएम हाउस में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने बीजेपी में शामिल हो गयी.



बड़े नेता भी बदल रहे पाला
कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक तत्कालीन विधायकों के दल बदल के बाद मध्य प्रदेश में यह सिलसिला लगातार जारी है. उसके बाद कांग्रेस के तीन और विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. बीजेपी के पूर्व विधायकों का भी कांग्रेस में शामिल होने का सिलसिला जारी है. सुरखी से पूर्व बीजेपी विधायक पारुल साहू हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुई हैं. ग्वालियर पूर्व सीट से चुनाव लड़ चुके बीजेपी के दिग्गज नेता सतीश सिकरवार भी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. ऐसे में अब देखना यह है कि आखिरकार उपचुनाव में जनता क्या इस दलबदल को स्वीकार करेगी या नहीं ?
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