पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में छत्तीसगढ़ के आदिवासी झाम सिंह के मारे जाने की होगी CID जांच

मृतक झामसिंह के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को नक्सली समझ कर मार दिया
मृतक झामसिंह के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को नक्सली समझ कर मार दिया

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam mishra) ने कहा मौत कोई भी हो दुखद है जांच का विषय है. मजिस्ट्रियल जांच के बाद सीआईडी (CID) जांच के आदेश दे दिए गए हैं. दोषी जो भी हो उसे दंडित किया जाएगा. वो बच नहीं पाएगा. उन्होंने कहा इस पर राजनीति नहीं होना चाहिए.

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भोपाल.बालाघाट में हाल ही में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मारे गए छत्तीसगढ़ के बेगुनाह आदिवासी झाम सिंह धुर्वे की मौत के मामले में अब सीआईडी (CID) जांच होगी. इस केस में पुलिस पर हत्या करने का आरोप लगा है. सीआईडी इस बात की जांच करेगी कि पुलिस की नक्सलियों से मुठभेड़ हुई है या फिर नहीं. साथ ही मुठभेड़ के दौरान पुलिस (Police) की गोली से झाम सिंह मारा गया या फिर नक्सलियों की गोलियों से उसकी मौत हुई.

मजिस्ट्रियल जांच जारी
इस मामले में बालाघाट कलेक्टर दीपक आर्य ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे. इस आदेश के बाद अपर कलेक्टर बैहर शिव गोविंद मरकाम ने जांच शुरू कर दी थी. पुलिस की कहानी के अनुसार बालाघाट के गढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत सुपखार जंगल के बांसबेहरा में कुछ पुलिस औऱ नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. दोनों ओर से जमकर फायरिंग का दौर चला. सुबह इसी स्थान पर सर्चिंग के दौरान एक व्यक्ति का शव मिला. मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के शीतलपानी गांव में रहने वाले 45 वर्षीय झामसिंह के रूप में हुई. गढ़ी थाना में मुठभेड़ को लेकर अज्ञात नक्सलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. झामसिंह की मौत किन परिस्थितियों में हुई इसकी जांच की जा रही है.

पुलिस को मिला था नक्सलियों का इनपुट
नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में नक्सलियों से निपटने के लिए हॉक फोर्स तैनात किया गया है. जिले के एसपी एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया था कि सूचना मिली थी कि बांसबेहरा गांव में दो नक्सली अपना इलाज कराने के लिए आए हैं. इस सूचना पर हॉक फोर्स ने बांसबेहरा के आसपास घेराबंदी की. दावा है कि इस दौरान विस्तार दलम के नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाब में गोलियां चलाईं. काफी देर तक मुठभेड़ चली. दावा यह भी किया गया कि इसी दौरान बारिश का फायदा उठाते हुए नक्सली भाग खड़े हुए. पुलिस का दावा है कि नक्सलियों की संख्या करीब 15 से 20 थी. नक्सलियों की ओर से पहले फायरिंग की गई थी. नक्सलियों ने पुलिस जवानों पर 40 से 50 राउंड फायरिंग की थी।.इस के जवाब और आत्म सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने भी फायरिंग की थी. अभिषेक तिवारी ने बताया था कि अगली सुबह पुलिस ने इलाके की सर्चिंग की तो मुठभेड़ वाले स्थान पर एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ मिला. उसके शरीर में गोली के निशान थे.



मछली पकड़ने गया था झाम सिंह
मृतक झामसिंह के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को नक्सली समझ कर मार दिया. उन्होंने दोषियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई करने का मांग की. परिवार ने बताया कि झामसिंह 6 सितंबर को अपने एक साथी के साथ एमपी छत्तीसगढ़ बॉर्डर के पास नदी में मछली मारने गया था. शाम को लौटते समय कुछ वर्दीधारी उन्हें आवाज लगाकर रोकने लगे. झामसिंह और उसका साथी डर के कारण भागने लगे तो पीछे से गोली चला दी गई. इससे उसकी मौत हो गई. कवर्धा पुलिस पूरे मामले में जांच जारी रहने औऱ जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रही है. अब यह मामला एनकाउंटर का है या फिर हत्या का यह मजिस्ट्रियल जांच होने के बाद ही पता चलेगा. स्थानीय नेताओं ने भी मृतक के परिवार को मुआवजा और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने के साथ पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है
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