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कोरोना के तनाव ने उड़ायी नींद, अब हर महीने स्लीप डिसऑर्डर के आ रहे हैं ज़्यादा केस

 कोरोना के कारण स्लीप डिसऑर्डर के केस बढ़ गए हैं. ImageCredit : Pexels/Andrea Piacquadio

कोरोना के कारण स्लीप डिसऑर्डर के केस बढ़ गए हैं. ImageCredit : Pexels/Andrea Piacquadio

Bhopal. डॉक्टर कह रहे हैं स्लीप डिसऑर्डर से बचने के लिए ध्यान मेडिटेशन योगा जरूर करें. परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत जरूर करें. परिवार के साथ बैठकर हंसी खुशी के पल जरूर बिताएं.

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भोपाल. कोरोना (corona) महामारी से पूरी दुनिया एक साल से जूझ रही है. भारत में नये स्ट्रेन के साथ ये बीमारी फिर लौट रही है. कोरोना संक्रमण लोगों में तनाव भी बढ़ा रहा है. बढ़ते तनाव और फोबिया के कारण स्लीप डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं. भोपाल में अनिंद्रा के मरीज़ों की संख्या में 25 फीसदी इजाफा हुआ है.

आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने से तनाव
कोरोना संक्रमण कई तरह की परेशानी लेकर आया है. लोगों का कहना है कोरोना से सबसे ज्यादा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ा है. बिजनेस में लगातार गिरावट हो रही है. हर महीने बिजनेस लोन के साथ होम लोन की ईएमआई (EMI) देना पड़ रही है. पैसे की किल्लत ने तनाव बढ़ा दिया है. इस वजह से नींद न आने की शिकायत बढ़ रही है. अब आगे क्या होगा इसका डर हर पल सता रहा है. ये भय मन में इस कदर भर गया है कि रात में बार-बार नींद खुलने की समस्या बढ़ गयी है. बिजनेस में लॉस के बीच बच्चों की शिक्षा पर बढ़ते खर्च के कारण नींद लगभग आंखों से दूर हो गयी है.

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7 से 8 घंटे की जगह सिर्फ 4 घंटे नींद


कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है.लोगों के मन में अपनों की सुरक्षा, परिवार के स्वास्थ्य की चिंता, सामाजिक संपर्कों में आ रही कमी के कारण तनाव बढ़ रहा है. युवा अपने करियर को लेकर परेशान हैं. कोरोना के तनाव के कारण अनिंद्रा के करीब 40 फ़ीसदी मरीज बढ़े हैं. लोगों का कहना है पहले जहां सुकून से 7 से 8 घंटे की नींद लेते थे लेकिन नींद अब सिर्फ 4 घंटे भी मुश्किल से हो पाती है. रात में नींद ना आना, बार-बार खुलना आम बात है.

भोपाल में स्लीप डिसऑर्डर के रोजाना 125 मरीज़
मनो चिकित्सक रूमा भट्टाचार्य का कहना है कोरोना के कारण लोगों में तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है. कोविड-19 से लोगों में स्लीप डिसऑर्डर की समस्या देखी जा रही है. पहले सामान्य दिनों में नींद से जुड़ी हुई समस्या के 100 मरीज आते थे वहीं अब 25 से ज्यादा लोग रोजाना पहुंच रहे हैं. इनमें भविष्य को लेकर चिंता, अपनों की सुरक्षा और करियर की टेंशन है. इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि सामाजिक संपर्कों में लगातार कमी हो रही है.

मेडिटेशन करें
रूमा भट्टाचार्य का कहना है स्लीप डिसऑर्डर से बचने के लिए ध्यान मेडिटेशन योगा जरूर करें. परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत जरूर करें. परिवार के साथ बैठकर हंसी खुशी के पल जरूर बिताएं.
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