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दमोह उपचुनाव में टिकट कटने से नाराज़ जयंत मलैया को ऐसे खुश करेगी बीजेपी 

जयंत मलैया दमोह सीट से 6 बार विधायक रहे.

जयंत मलैया दमोह सीट से 6 बार विधायक रहे.

Bhopal. दमोह सीट कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गयी है. कांग्रेस की कोशिश इस पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखने की है वहीं बीजेपी इसे वापिस पाना चाहती है. यहां 17 अप्रैल को मतदान के बाद रिजल्ट 2 मई को आएगा

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भोपाल. दमोह उपचुनाव (Damoh by election) में बीजेपी ने अपने ही परिवार के वरिष्ठ सदस्य पूर्व मंत्री जयंत मलैया को खुश करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया के इस ऐलान के बाद कि वह उपचुनाव में उम्मीदवारी नहीं करेंगे और बीजेपी (BJP) प्रत्याशी के लिए प्रचार करेंगे बीजेपी ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में पूर्व मंत्री जयंत मलैया को शामिल किया.

मंगलवार को जारी हुई बीजेपी स्टार प्रचारकों की सूची को देखकर ऐसा ही लगा. पूर्व मंत्री जयंत मलैया जो स्वाभाविक तौर पर इस सीट के लिए टिकट के दावेदार थे, बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया. उनकी जगह उन राहुल लोधी पर बीजेपी ने भरोसा जताया जो पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर बीजेपी के जयंत मलैया को हराकर विधानसभा पहुंचे थे. इसकी वजह पार्टी का लोधी से किया वादा था.

नाराज़ था मलैया परिवार
टिकट कटने से मलैया परिवार खासा नाराज और असंतुष्ट था. दमोह इलाके में मलैया परिवार की अच्छी खासी पैठ है. 2018 के विधानसभा चुनाव में दरअसल मलैया को कांग्रेस ने नहीं हराया था बल्कि बीजेपी में हुई बगावत के कारण मलैया महज़ 758 वोट से हार गए थे. बीजेपी के रामकृष्ण कुमरिया की बगावत ने उन्हें 7वीं बार विधानसभा जाने से रोक दिया था.
मलैया परिवार ने अटकलों पर लगाया विराम


जयंत मलैया को स्टार प्रचारक बनाए जाने के सीधे मायने उनकी नाराजगी को दूर करने से निकाले जा रहे हैं. टिकट कटने की सुगबुगाहट के बीच ऐसी चर्चा और अटकलों ने जो़र पकड़ा कि ऐसे हालात में मलैया  परिवार बागी हो सकता है. जयंत मलैया के बेटे सिद्धार्थ मलैया चुनाव मैदान में उतर सकते हैं. 25 मार्च को कमलनाथ के दमोह दौरे के दौरान अटकलों को और बल मिला जब कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने कहा दमोह के कई असंतुष्ट बीजेपी नेता हमारे संपर्क में हैं. उन्हें कांग्रेस में शामिल करने का फैसला कमलनाथ के दौरे के बाद होगा. लेकिन ऐसी अटकलों के ठीक विपरीत उसी वक्त सिद्धार्थ मलैया ने मीडिया के सामने ऐलान कर दिया कि वो अपने पिता के आदेश के बाद अब चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनके परिवार की बीजेपी के प्रति निष्ठा है और इसलिए वो पार्टी के लिए प्रचार  करेंगे.

मलैया का राजनीतिक इतिहास
दमोह में जयंत मलैया बीजेपी के कद्दावर चेहरों में एक हैं. दमोह के राजनीतिक इतिहास को देखें तो 1990 से आज तक का इस इलाके में बीजेपी का दबदबा रहा है. पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के नाम के साथ 1990 से 2018 तक दमोह में सात विधानसभा चुनाव हुए हैं. उनमें से लगातार छह चुनाव में जयंत मलैया ने जीत दर्ज की. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राहुल सिंह लोधी ने जयंत मलैया को महज 758 मतों के अंतर से हराया था. उनकी हार की वजह रामकृष्ण कुसमरिया रहे जो बीजेपी से बागी होकर चुनाव लड़ गए थे.

2 मई को फैसला
दमोह सीट कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गयी है. कांग्रेस की कोशिश इस पर अपना कब्ज़ा बरकरार रखने की है वहीं बीजेपी इसे वापिस पाना चाहती है. यहां 17 अप्रैल को मतदान के बाद रिजल्ट 2 मई को आएगा.
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