COVID-19: MP सरकार ने कैदियों को 120 दिन की आपात पैरोल देने का किया ऐलान

कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर कैदियों को 120 दिन की आपातकाल पैरोल मिलेगी (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर कैदियों को 120 दिन की आपातकाल पैरोल मिलेगी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 (COVID-19) के संक्रमितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस पर सहमति दे दी है.

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भोपाल. कोरोना वायरस की महामारी (Pandemic Coronavirus) के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कैदियों को एक बार में अधिकतम 120 दिन की आपात छुट्टी देने का फैसला किया है. बता दें कि इससे पहले सजायाफ्ता कैदियों को अधिकतम 60 दिन की पैरोल पर रिहा किया जाता था, जबकि विचाराधीन कैदियों को अधिकतम 45 दिन की अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता था. पैरोल की यह अवधि भी कोविड-19 महामारी के चलते इस साल 29 मार्च को बढ़ाकर लागू किया था.

प्रदेश में लगातार बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर फैसला
मध्य प्रदेश जेल विभाग के उपसचिव मनोज खत्री द्वारा 13 मई को जारी आदेश में कहा गया है, 'महामारी के खतरे एवं प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों की दशा में या किसी अन्य परिस्थिति में जो जेल के बंदियों की संख्या को तत्काल कम करने का समर्थन करती है, उपयुक्त मामलों में बंदी को एक बार में अधिकतम 120 दिवस के लिए आपात छुट्टी (emergency leave) की पात्रता होगी.' इसमें कहा गया है कि ऐसे बंदी द्वारा जेल के बाहर व्यतीत की गई इस आपात छुट्टी की अवधि की गणना, बंदी के कुल दंडादेश की अवधि में सम्मिलित की जाएगी. गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर मार्च के दूसरे पखवाड़े में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे उच्च स्तरीय समितियों का गठन कर जेलों में भीड़ कम करने के लिए सात साल की जेल की अवधि वाले कैदियों और विचाराधीन कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार करें.

इसके बाद अन्य प्रदेशों के साथ-साथ मध्य प्रदेश सरकार ने भी जेलों में भीड़ कम करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 मार्च को कोविड-19 महामारी के मद्देनजर मानवीय आधार पर प्रदेश की जेलों में बंद 8,000 कैदियों को राहत देने का निर्णय लिया था. मध्य प्रदेश जेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसके बाद तकरीबन 7 हजार कैदियों को रिहा किया था, जिनमें से करीब 4 हजार बंदियों को 60 दिन के पैरोल पर रिहा किया था, जबकि अन्य करीब 3 हजार विचाराधीन बंदियों को 45 दिन की अंतरिम जमानत पर रिहा किया था.
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 (COVID-19) के संक्रमितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए समिति ने हाल ही में इन कैदियों की रिहाई की अवधि 45 दिन और बढ़ाने की सिफारिश की. इसे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने भी मान लिया, जिसके बाद राज्य सरकार (MP Government) ने रिहा किये गये इन 7 हजार कैदियों की अवधि 45 दिन और बढ़ा दी है. पिछले साल जुलाई में राज्य विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश की 125 जेलों में 28 हजार 601 कैदी रखने की क्षमता है, जबकि इन जेलों में 42,057 कैदी बंद थे जो क्षमता से तकरीबन दोगुने हैं. (इनपुट-भाषा)



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