मध्य प्रदेश सरकार का फैसला: कोरोना मरीजों से 40% अधिक फीस ले सकेंगे निजी अस्पताल
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मध्य प्रदेश सरकार का फैसला: कोरोना मरीजों से 40% अधिक फीस ले सकेंगे निजी अस्पताल
मध्य़ प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है.

चिकित्सा मंत्री विश्वास सारंग (Vishvas Sarang) ने बताया कि कोरोना मरीजों की इलाज को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बन रही थी. अस्पताल 40 फीसदी ज्यादा शुल्क ले सकते हैं. 

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भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर एक अहम फैसला लिया है. शनिवार को सरकार द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक COVID-19 रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पताल कोरोना संक्रमण से पहले के समय में प्रचलित दरों से 40 प्रतिशत अधिक शुल्क ले सकते हैं. यह भी निर्णय लिया गया कि ऐसे निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे कोरोना मरीज, जो कि अधिकृत हैं और सरकार के साथ अनुबंध में हैं, वे स्वेच्छा से अपने बिलों का भुगतान कर सकते हैं. ऐसे अस्पताल वर्तमान में मरीजों का मुफ्त में इलाज कर रहे हैं.

मालूम हो कि कोरोना संक्रमण की स्थिति की समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक बैठक हुई. बैठक के बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि निजी अस्पतालों द्वारा COVID-19 रोगियों का इलाज करने वाले बिलों के बारे में कुछ भ्रम था. बैठक में यह फैसला लिया गया कि COVID-19 रोगियों का इलाज करने वाले निजी अस्पताल इस साल फरवरी में निर्धारित दरों के आधार पर बिल ले सकते हैं. वे फरवरी-पूर्व की दरों की तुलना में अधिकतम 40 प्रतिशत अधिक शुल्क ले सकते हैं. कहें, तो अगर फरवरी में किसी इलाज का दर 100, तो वे अब 140 रुपये चार्ज कर सकते हैं.

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बढ़ेगी बेड की संख्या
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यह निर्णय लिया गया था कि मरीज स्वेच्छा से, पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से नामित अस्पतालों में बिल का भुगतान कर सकते हैं, जो इस समय नि: शुल्क इलाज कर रहे हैं. एक लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि कोरोनो वायरस उपचार के लिए 31 अक्टूबर तक 3600 ऑक्सीजन बेड और 564 आईसीयू बेड जोड़े जाएंगे. बेड की संख्या को बढ़ाकर 11,710 और 2,488 कर दिया जाएगा. सारंग ने कहा कि 40 प्रतिशत एसिप्टेमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है. मंत्री ने कहा कि कमांड कंट्रोल सेंटर, चौबीसों घंटे एम्बुलेंस और डॉक्टर होम आइसोलेशन वाले मरीजों की निगरानी करेंगे. उन्होंने कहा कि अब घरों से COVID-19 परीक्षणों के नमूने एकत्र नहीं किए जाएंगे. अब लोगों को क्लीनिक जाना होगा.
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