अकेले हैं, तो भी अस्पताल में जाने से न घबराएं, जानिए सरकार क्या करने जा रही आपके लिए व्यवस्था

मध्य प्रदेश सरकार अस्पतालों में मरीज मित्र की व्यवस्था करेगी. अकेले जाने वालों को मिलेगी मदद. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश सरकार अस्पतालों में मरीज मित्र की व्यवस्था करेगी. अकेले जाने वालों को मिलेगी मदद. (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश सरकार अस्पतालों में नई व्यवस्था करने जा रही है. अब उन लोगों को मदद मिलेगी जो अकेले अस्पताल जाते हैं. ये मदद उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अस्पताल अकेले जाने में घबराते हैं.

  • Last Updated: May 27, 2021, 2:42 PM IST
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भोपाल. अगर आप अकेले हैं और अस्पताल जाने से घबरा रहें हैं तो न घबराएं. सरकार अब ऐसे लोगों के लिए अस्पतालों में ‘मरीज मित्र’ नियुक्त करने जा रही है. ये मरीज मित्र मरीजों के दोस्त(सहायक)होंगे. ये अस्पतालों में अकेले पहुंचने वाले मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवाएं जुटाने में मदद करेंगे.

गौरतलब है कि प्रदेश के अस्पतालों से शासन-प्रशासन के पास ऐसी शिकायतें पहुंच रही थीं कि जो मरीज अकेले अस्पताल पहुंच रहे हैं, उन्हें कई बार देखने वाला कोई नहीं होती. उन्हें उचित देखभाल नहीं मिलती, जिसकी वजह से अनहोनी की भी आशंका बनी रहती है. अब सरकार द्वारा जिन मरीज मित्रों की व्यवस्था की जाएगी वे मरीज के अस्पताल पहुंचने पर उनसे जानेंगे आखिर उनको परेशानी क्या है, किस डॉक्टर से मिलना है या फिर किस डॉक्टर से अब तक इलाज हुआ है.

हर तरह की सेवा में करेंगे मदद

वे मरीज से ये भी पूछेंगे कि डॉक्टर ने आपको कौन सी जांच लिखी है. मरीज मित्र मरीज के सारे टेस्ट कराने में मदद करेंगे. मरीज का पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, मेडिकल जांच करवाने, दवाओं की व्यवस्था करने  के साथ पेशेंट के हॉस्पिटल में एडमिट रहने तक, देखभाल की जिम्मेदारी मरीज मित्रों की ही होगी. मरीज तमाम जरूरतों को पूरा करने के साथ इमरजेंसी सेवाओं को जुटाने का काम करेंगे.
मरीज मित्र योजना के लिए जून में होंगे टेंडर

दरअसल, सरकार कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए अस्पतालों में ‘मरीज  मित्र’ योजना लॉन्च करने जा रही है. योजना के संचालन का जिम्मा NGO का होगा. इन टेंडर के जरिये NGO का चयन किया जाएगा. जून के पहले हफ्ते में ही टेंडर जारी किए जाएंगे. NGO में सेवा देने वाले करीब 18 से 45 साल के लोगों को अपने साथ जोड़ा जाएगा, जो अस्पतालों में मरीजों के दोस्त बनकर काम करेंगे.

कामकाज का ट्रायल होगा



मरीज मित्र बनने से पहले इनके कामकाज का ट्रायल भी किया जाएगा. मरीज मित्र बनने के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि वैक्सीन के दोनों डोज लगना अनिवार्य है. सभी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के मेन गेट पर ही मरीजों की मदद के लिए हेल्प डेस्क भी तैयार होगी. NGO सभी मरीज मित्रों का परिचय पत्र बनवाएगा. परिचय पत्र के बाद ही अस्पताल में मरीज मित्र को जाने की परमिशन मिलेगी. मरीज मित्र शासकीय कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे.

मरीज और डॉक्टर के बीच अस्पताल में विवाद होने पर मरीज मित्र उच्च अधिकारियों और पुलिस को सूचना देंगे. जरूरत पड़ने पर अस्पताल प्रबंधन को लिखित में सुझाव भी दे सकेंगे. अनुशासनहीनता या अभद्रता करने पर विभाग NGO से मरीज मित्रों का रजिस्ट्रेशन रद्द करवा सकता है.

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