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MP सरकार ने बनाई ‘देवारण्य’ योजना, आयुर्वेद को बढ़ावा देने का ये है सरकारी प्लान 

आयुष विभाग की इस बैठक में कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं.

आयुष विभाग की इस बैठक में कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं.

मध्य प्रदेश में आयुष को बढ़ावा देने और उसे रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने ‘देवारण्य’ योजना बनाई है । सोमवार को सीएम शिवराज ने इस योजना

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भोपाल. मध्य प्रदेश में आयुष को बढ़ावा देने और उसे रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने ‘देवारण्य’ योजना बनाई है. सोमवार को सीएम शिवराज (CM Shivraj) ने योजना लॉन्च की. सीएम ने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ मिले और प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार दिलाने के लिए ‘देवारण्य’ योजना बनाई गई है.

सीएम ने कहा हमारे जंगलों में जहां औषधियों का खजाना है, वहीं जनजातीय भाई-बहन इनका महत्व एवं उपयोग समझते हैं. हमें एक ओर हमारे इस औषधियों के खजाने को बचाना है वहीं जनजातीय वर्ग के इस पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाकर लोगों तक इसका फायदा पहुंचाना है.

प्रदेश में देवारण्य योजना के माध्यम से आयुष औषधियों के उत्पादन की एक पूरी वैल्यू चेन का विकास किया जाएगा. इस काम में स्व-सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. इसमें कृषि उत्पादक संगठन, आयुष विभाग, वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, उद्यानिकी विभाग, पर्यटन विभाग, कृषि विभाग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग मिलकर मिशन मोड में काम करेंगे. मुख्यमंत्री ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि एमपी में वैलनेस टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए गांवों की सुंदर वादियों में औषधीय पौधों की खेती की जाए. आयुष एवं पर्यटन को साथ-साथ लाया जाएगा.

ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत में ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मैडिसिन्स बनाने जा रहा है. सीएम ने अधिकारियों से कहा ऐसे प्रयास किए जाएंगे कि यह एमपी में बने. भोपाल में खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल के काम की सीएम ने तारीफ की । सीएम ने कहा प्रदेश में 360 से अधिक नये आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स की स्थापना की जा रही है. इंदौर और भोपाल में आयुष सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल बनाए जा रहे हैं. प्रदेश के आयुर्वेदिक और यूनानी औषधालयों का विकास किया जा रहा है. आयुष दवाओं के अनुसंधान और‍ विकास पर अधिक से अधिक जोर दिया जा रहा है.

चीन के बाद सबसे बड़ा निर्माता भारत
भारत सरकार आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कुटेचा ने बैठक के दौरान कहा कि विश्व में आयुष दवाओं का बहुत बड़ा बाजार है. इस क्षेत्र में भारत चीन के बाद सबसे बड़ा निर्माता है. वर्तमान में इसके लिए कच्चे माल यानि औषधीय और सुगंधित पौधों की बहुत मांग है. उद्योगों ने इसका एडवांस ऑर्डर दिया हुआ है. जनजातियां यह जानती हैं कि इन पौधों का संरक्षण और उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए.

प्रमुख हस्तियां और उनके विचार
आयुष विभाग की इस बैठक में कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं. जिनमे इमामी हैल्थ केयर के गुलराज भाटिया ने कहा आगामी 15-20 साल में आयुष के क्षेत्र में अत्यधिक संभावनाएं बढ़ेंगी. इसलिए प्रदेश में औषधीय और सुगंधित पौधों की कोऑपरेटिव फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए. आयुर्वेद ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्य, बैंगलूर के सी.ई.ओ. राजीव वासुदेवन ने कहा आयुर्वेद से सभी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है. इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से जिला स्तर पर आयुर्वेद इलाज की व्यवस्था की जाना चाहिए. वनवासी कल्याण आश्रम के हितरक्षा प्रमुख गिरीश कुबेर ने कहा कि प्राचीन वनस्पतियों का ज्ञान जनजातियों को है. ग्राम सभाओं को मजबूत कर अधिक से अधिक जनजातीय लोगों को इससे जोड़ें. धूतपापेश्वर लिमिटेड, मुंबई के रंजीत पुराणिक ने कहा म.प्र. न केवल भारत का दिल बल्कि ‘ग्रीन लंग’ है. यहां औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों का अपार भंडार है. नीमच अश्वगंधा की ग्लोबल मंडी है. पन्ना का आंवला देश में सर्वोत्तम है. म.प्र. में औषधीय वनस्पतियों की मंडियां बनाई जानी चाहिए. सेण्टर फॉर रिसर्च एंड स्ट्रेटेजिक प्लानिंग फॉरसस्टेनेबल डेवलपमेंट, पुणे के अध्यक्ष गजानन डांगे ने कहा सामुदायिक विकास के साथ ही वनवासियों को वैयक्तिक पट्टे दिये जाएं. जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए मास्टर प्लान बनें. जल प्रबंधन के साथ ही मिट्टी का कटाव रोकने के लिए भी कार्रवाई हो. आरोग्य भारती के  अशोक वार्ष्णेय ने कहा औषधीय पौधों के संरक्षण और उत्पादन के लिए जनजातीय लोगों को प्रोत्साहित और जागरूक किया जाना चाहिए.

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