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MP: विधायकों को आज भी मिल रहा 10000 रुपए टेलीफोन भत्ता, 2400 में फ्री कॉलिंग और अनलिमिटेड डाटा

मप्र के विधायकों को आज भी अप्रासंगिक भत्ते मिल रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

मप्र के विधायकों को आज भी अप्रासंगिक भत्ते मिल रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Wastefull Expenditure: मध्यप्रदेश की 21 वीं सदी की सरकार आज भी पुराने ढर्रे पर चल रही है. विधायकों (MLA’s) को हर महीने 10000 रुपए टेलीफोन भत्ता दिया जा रहा है, जो कि बड़ी फिजूलखर्ची है. बता दें कि मोबाइल कंपनियां 2399 रुपए में फ्री कॉलिंग और अनलिमिटेड डाटा दे रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 10:32 AM IST
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भोपाल. मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) हजारों करोड़ रुपए के कर्ज में डूबी है. बैठकों और भाषणों में सरकारी खर्चों में कटौती की बात की जाती है, लेकिन फिजूलखर्ची के मामले में सरकार अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही है. विधायकों को हर महीने टेलीफोन भत्ते के नाम पर 10 हजार रुपए दिए जा रहे हैं. यह हास्यास्पद है कि मोबाइल कंपनियों इसके लिए महज 2399 रुपए चार्ज करती हैं, जबकि इसमें इंटरनेट का फ्री अनलिमिटेड डाटा भी मिलता है.

बता दें, पहले विधायक बसों से यात्रा करते थे तो उन्हें इसका भी भत्ता मिलता था. लेकिन, बस यात्रा भत्ते को अप्रैल 2016 में खत्म कर दिया. क्योंकि विधायकों ने बस को छोड़कर निजी वाहनों से घूमना शुरू कर दिया था. इसके लिए उन्हें राज्य के अंदर हर 15 किमी पर 1500 रुपए दिए जाने लगे. इसे बाद में बढ़ाकर 2500 रुपए कर दिया गया.

2016 में विधायकों की लगी थी लॉटरी


जानकारी के मुताबिक, 2016 में विधायकों की लॉटरी लग गई. इस साल में विधायकों का वेतन तीन गुना बढ़ाया (10 से 30 हजार रुपे)कर दिया गया. निर्वाचन क्षेत्र का भत्ता भी 25 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपए किया गया. ये भी गौर करने वाली बात है कि राज्य में विधायकों का वाहन लोन और हाउस लोन बढ़ाए जाने की फाइल दो साल से रुकी पड़ी हैं.

इन भत्तों की कोई जरूरत नहीं


जानकार बताते हैं कि वर्तमान में कुछ भत्तों की विधायकों की बिल्कुल जरूरत नहीं है. जैसे, 2012 में कंप्यूटर भत्ता दस हजार था, उसे 2016 में बढ़ाकर 15 हजार करना. विधायक को एक कार्यकाल में पचास हजार रुपए लैपटॉप के लिए मिलना. विधायक को यात्रा भत्ता 15 किमी तक 1500 रुपए राज्य के भीतर और 2500 रुपए राज्य के बाहर मिलना. हर महीने स्टेशनरी एलाउंस 10 हजार रुपए मिलना. इनके अलावा विधायकों को जो अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं उनमें अनलिमिटेड रेल कूपन, हर महीने राज्य के बाहर अधिकतम 30 हजार रुपए प्रतिमाह मिलना और राज्य के बाहर 15 रु. प्रतिकिमी की दर से वाहन भत्ता मिलना शामिल हैं.


सरकार चाहे तो पैसा बचा सकती है


विधानसभा के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि कि इस पूरे मामले पर रिव्यू की जरूरत है. सरकार चाहे तो ये पैसा बचा सकती है. ये भत्ते तब दिए जाते थे जब मंत्रियों और विधायकों का वेतन बहुत कम था. अब सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए यहां से पैसा बचेगा तो राज्य सरकार बाकी जगह बढ़ रहे टैक्स को कम कर सकती है. सिर्फ टेलीफोन भत्ता ही नहीं, बिजली मद और कैंटीन में मिल रहा सब्सिडाइज भोजन भी खत्म होना चाहिए.
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