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मध्य प्रदेश में लापता हो रही हैं लड़कियां : इंदौर-भोपाल सबसे ज़्यादा असुरक्षित!

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 21, 2019, 1:21 PM IST
मध्य प्रदेश में लापता हो रही हैं लड़कियां : इंदौर-भोपाल सबसे ज़्यादा असुरक्षित!
मध्य प्रदेश में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं. हर साल सैकड़ों लड़कियां लापता हो रही हैं.

मध्य प्रदेश (Madhya pradesh)में लापता बच्चों की तलाश के लिए थाना स्तर पर अलग टीम काम करती है.इन सभी टीमों की मॉनिटरिंग CID करती है.ताज़ा रिपोर्ट के बाद CID ने प्रदेश के सभी ज़िलों के SP को लापता बच्चों (Missing children) के मामलों में गंभीरता बरतने और उनका पता लगाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं.

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भोपाल. मध्यप्रदेश (madhya pradesh)में बेटियां सुरक्षित (unsafe)नहीं हैं. गांव से ज़्यादा उन्हें शहरों में ख़तरा है. ये हम नहीं, बल्कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) की ताज़ा रिपोर्ट कह रही है. इस साल के छह महीनों में ही चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है.इंदौर (Indore) सबसे ज्यादा असुरक्षित है और नंबर दो पर प्रदेश की राजधानी भोपाल (bhopal)है.

चौंकाने वाले आंकड़े
मध्य प्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. किसी की एकलौती लड़की रहस्मयढंग से लापता हो गई, तो कइयों को सालों से लापता अपनी लाडो की तलाश है.पुलिस मुख्यालय की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक एमपी के शहरी क्षेत्र लड़कियों के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं.एक औसत के अनुसार हर साल हर शहर में 300 परिवार ऐसी घटनाओं के शिकार होते हैं.सीआईडी ने 2012 से 2019 (जून माह तक) तक हर ज़िले से गायब हुए नाबालिग बच्चों के आंकड़ों का विश्लेषण कर रिपोर्ट तैयार की है. 2019 में जनवरी से जून तक 386 नाबालिग लड़कियां गायब हुई हैं.
7 साल में महानगरों के हालात

इंदौर में 2012 में 517 लड़कियां लापता हो गयीं. इनमें से 477 बाद में मिल गयीं बाक़ी का अब तक पता नहीं चला. 2013 में लापता 470 लड़कियों में से 403 मिलीं. 2018 आते-आते ये आंकड़ा 593 पर पहुंच गया.इनमें से 497 बाद में मिल गयीं लेकिन करीब 100 लाडो लापता हैं.
भोपाल - 2012 में 470 लड़कियां लापता हुई थीं. उनमें से 370 मिल गयीं बाक़ी का सुराग नहीं मिल पाया. 2013 में 403, 2014 में 275, 2015 में 439, 2016 में 343 और, 2018 में 386 लड़कियां गायब हो गयी. इनमें से 357 मिलीं.
जबलपुर - 2012 में लापता 388 लड़कियों में से 382 मिलीं. 2013 में 368 में से 358, 2014 में लापता 144 लड़कियों में से 104 मिलीं. ठीक इसी तरह 2015 में 321 में से 287, 2016 में 325 में से 318, 2017 में 338 लड़कियों में से 312 और 2018 में 386 लापता लड़कियों में से 216 मिल गयीं.
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ग्वालियर - 2012 में ग्वालियर में 204 लड़कियां गायब हुई थीं. उनमें से 131 मिल गयीं. 2013 में 82 में से 81, 2014 में 165 में से 34 मिली, 2015 में 152 में से 143 मिली, 2016 163 में से 137, 2017 में 222 में से 200 और 2018 में 216 लड़कियों में से 201 मिलीं.
सामाजिक दृष्टिकोण बदलने की ज़रूरत
सीआईडी के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सबसे ज्यादा नाबालिग लड़कियां शहरी इलाकों से गायब हो रही हैं. इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर सहित रीवा, सागर, सतना और उज्जैन जैसे शहरों से भी हर साल नाबालिग लड़कियों के गायब होने की घटनाएं बढ़ रही हैं. पुलिस भी मानती है कि समाज का माहौल और दृष्टिकोण बदलना होगा.
CID कर रही है मॉनिटरिंग
मध्य प्रदेश में लापता बच्चों की तलाश के लिए थाना स्तर पर अलग टीम काम करती है.इन सभी टीमों की मॉनिटरिंग CID करती है.ताज़ा रिपोर्ट के बाद CID ने प्रदेश के सभी ज़िलों के SP को लापता बच्चों के मामलों में गंभीरता बरतने और उनका पता लगाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं.CID के अधिकारियों का कहना है हर महीने आंकड़ों का अध्ययन किया जाता है.साथ ही समय-समय पर गंभीर मामलों की जांच भी जाती है.

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First published: October 21, 2019, 1:21 PM IST
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