Jabalpur : कोरोना संकट काल में पश्चिम मध्य रेलवे कर दिखाया ये कमाल
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Jabalpur : कोरोना संकट काल में पश्चिम मध्य रेलवे कर दिखाया ये कमाल
जबलपुर-पश्चिम मध्य रेलवे के तीन मंडलों में लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा

पश्चिम मध्य रेल जोन ((West Central Railway Zone)) शायद इकलौता ज़ोन होगा जो अब कंप्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की तरफ कदम आगे बढ़ा रहा है. जोन के तीन बड़े मंडलों में इलेक्ट्रिफिकेशन (electrification of line) का काम पूरा हो गया है

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जबलपुर.कोरोना (Corona) संकट काल में भले ही रेलगाड़ियों के पहिए थमे रहे हों लेकिन पश्चिम मध्य रेलवे जोन (West Central Railway Zone) ने इस दौरान बड़ा काम कर लिया. उसके तीन बड़े मंडलों में इलेक्ट्रिक लाइन (electrification of line) का काम पूरा हो गया है.इससे अब पश्चिम मध्य रेलवे जोन को प्रति माह करोड़ों रुपए की बचत होगी. यात्रियों और रेलवे का समय भी बचेगा.

238 किमी रेल लाइन विद्युतीकरण को हरी झंडी
पश्चिम मध्य रेल जोन शायद इकलौता ज़ोन होगा जो अब कंप्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की तरफ कदम आगे बढ़ा रहा है. जोन के तीन बड़े मंडलों में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो गया है. इसका निरीक्षण करने मुंबई से आए रेल सुरक्षा आयुक्त ने इसे हरी झंडी भी दे दी है. पश्चिम मध्य रेलवे जोन के महाप्रबंधक शैलेंद्र सिंह ने बताया कि रेल संरक्षा आयुक्त ए के जैन ने पश्चिम मध्य रेल जोन के तीन मंडलों कोटा, भोपाल और जबलपुर का 26 जून से लेकर 29 जून तक निरीक्षण किया.

इस दौरान उन्होंने कई रेल खंडों पर विद्युत इंजन से सफल स्पीड ट्रायल भी किया. इनमें 43 किलोमीटर का ट्रायल कोटा मंडल, 90 किलोमीटर का ट्रायल भोपाल मंडल और 105 किलोमीटर का ट्रायल जबलपुर मंडल में किया. निरीक्षण के दौरान विद्युतीकरण के काम को संतोषजनक पाते हुए उन्होंने इसे हरी झंडी दे दी है.
समय के साथ करोड़ों रुपए की होगी बचत


रेल विद्युतीकरण को स्वीकृति मिल जाने के बाद सबसे बड़ा फायदा रेलवे को समय की बचत का होगा. अभी तक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जाने वाली अधिकांश ट्रेनों के रेल इंजन को कटनी - सतना के बीच बदला जाता था. लंबे समय से इस रूट पर इलेक्ट्रिफिकेशन की मांग चल रही थी. अब जब 3 बड़े मंडलों में इलेक्टिक लाइन हो गयी है तो इसमें ट्रेनों की गति में तेज़ी आएगी.इसी के साथ पश्चिम मध्य रेलवे एक बड़ा विद्युतिकरण क्षेत्र वाला जोन भी बन गया है जहां डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. इससे पर्यावरण को नुकसान भी कम होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इलेक्ट्रिफिकेशन हो जाने से पश्चिम मध्य रेल को हर महीने एक करोड़ 17 लाख रुपए की बचत होगी.
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