COVID-19: कोरोना के खिलाफ जंग में MP की जेलों के कैदी कर रहे ये बड़ा काम
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COVID-19: कोरोना के खिलाफ जंग में MP की जेलों के कैदी कर रहे ये बड़ा काम
जेल के कैदी बना रहे मास्क और सैनिटाइजर

कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में प्रदेश की जेलों में बंद कैदी भी योगदान दे रहे हैं. ये कैदी वाशेबल मास्क (Washable mask) बना रहे हैं जिनकी काफी मांग है.

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भोपाल. कोरोना वारस संक्रमण (Corona Virus Infection) के खिलाफ लड़ाई में मध्य प्रदेश की जेलों में बंद कैदी भी साथ दे रहे हैं. जेल में कैदी हर रोज 44000 वॉशेबल मास्क तैयार कर रहे हैं. इन मास्क को अस्पतालों के साथ पुलिस और दूसरे सरकारी विभागों में सप्लाई किया जा रहा है. एक मास्क की कीमत 10 रुपए है. ये मास्क कॉटन का है और इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है. जेलों में बंद महिला कैदियों से सबसे ज्यादा मास्क बनाने में मदद ली जा रही है.

प्रदेश की जेलों में तैयार हो रहे मास्क
जेल मुख्यालय के निर्देश के बाद पिछले 5 दिनों से प्रदेश की 11 सेंट्रल जेलों में कॉटन के मास्क बनाने का काम चल रहा है. जेलों में बन रहे मास्क की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. सबसे पहले प्रदेश की सभी जेलों और यहां कार्यरत कर्मचारियों को इन मास्क की सप्लाई की गई. लेकिन अब कैदियों द्वारा बनाए जा रहे मास्क की डिमांड बढ़ने लगी है. सेंट्रल जेलों के अलावा भी छोटी जेलों में जहां पर सिलाई करने वाले पुरुष और महिला हैं, वहां पर भी ये मास्क तैयार किये जा रहे हैं.

महज 10 रुपए में बेच रहे हैं मास्क



भोपाल जेल के जेलर पीडी श्रीवास्तव ने बताया कि एक मास्क की कीमत 10 रूपये आ रही है. मास्क को बनाने में कॉटन के अच्छे कपड़े का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस कॉटन के कपड़े को इस्तेमाल करने के बाद धोया भी जा सकता है और धोने के बाद इसे फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है. अच्छी क्वॉलिटी होने की वजह से यहां के मास्क की डिमांड बढ़ती जा रही है. राजगढ़ पुलिस के अलावा बटालियन और पुलिस की दूसरी इकाइयों को भी माक्स सप्लाई किए गए हैं. इसके अलावा प्राइवेट अस्पताल और दूसरे सरकारी विभागों में भी मास्क दिए गए हैं. जिला कोर्ट और बार एसोसिएशन के अलावा भी कई जगहों पर माक्स की सप्लाई की जा रही है.



हत्या की सजा काट रहे कैदी भी बना रहे मास्क
हत्या के मामले में सजा काट रहे कैदी भी माक्स बनाने में दूसरे कैदियों की मदद कर रहे हैं. जिन कैदियों को सिलाई का काम आता है उन्हें ही माक्स बनाने की जिम्मेदारी दी गई है. भोपाल के अलावा दूसरी सेंट्रल जेलों में बंद महिला कैदियों की भी इसमें मदद ली जा रही है. महिला कैदी भी बड़ी संख्या में मास्क तैयार कर रही हैं. वैसे तो बाजार में एक मास्क 20 से लेकर 500 रूपये तक बिक रहा है, लेकिन ये मास्क महज 10 रूपये में बेचा जा रहा है, इसलिए प्राइवेट सेक्टर से भी इसकी डिमांड आ रही है. जेलों के पास एडवांस में आर्डर है और उसकी पूर्ति के लिए छोटी जेलों की मदद भी ली जा रही है.

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