ANALYSIS: मध्य प्रदेश में फिर छिड़ गया है कमलनाथ-सिंधिया का सत्ता संघर्ष
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ANALYSIS: मध्य प्रदेश में फिर छिड़ गया है कमलनाथ-सिंधिया का सत्ता संघर्ष
सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव हारने के बाद मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ-सिंधिया के बीच सत्ता संघर्ष फिर छिड़ गया है. सिंधिया प्रदेश की राजनीति में अपनी दमदार मौजूदगी चाहते हैं.

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मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार में कुछ ठीक नहीं चल रहा है. मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं कि कमलनाथ की कैबिनेट दो फाड़ हो गई है. अनुशासन बिखर गया है, मंत्री आपस में उलझ रहे हैं. सिंधिया गुट के मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ अंदरूनी दबाव में क्षुब्ध होकर यहां तक कह रहे हैं कि क्या मैं इस्तीफा दे दूं? कमलनाथ सरकार पर पहले से ही अल्पमत की तलवार झूल रही है, ऐसे में अंदरूनी संघर्ष क्यों छिड़ गया है? इसकी पृष्ठभूमि में कुछ और बातें हैं.

पावर स्ट्रगल
दरअसल, विधानसभा चुनाव के समय से चल रहा कमलनाथ के खिलाफ ज्योतिरादित्य सिंधिया का पावर स्ट्रगल फिर शुरू हो गया है. सिंधिया गुना-शिवपुरी से लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं. दिल्ली में उनकी राजनीतिक भूमिका अभी सिर्फ कांग्रेस महासचिव और पश्चिमी यूपी के प्रभारी की है. वे अब मध्य प्रदेश में अपनी दमदार जगह कायम रखना चाहते हैं. सिंधिया समर्थक तो अब अपने नेता की प्रदेश वापसी तक चाहने लगे हैं. उनका साफ मानना है कि विधानसभा चुनाव में सिंधिया मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, लेकिन मुख्यमंत्री कमनलाथ को बनाया गया. अब सिंधिया समर्थक नेता उनकी या उनके किसी समर्थक की ताजपोशी प्रदेश अध्यक्ष पद पर चाहते हैं.

सामूहिक इस्तीफे का दबाव
यह अंतर्कलह इसलिए भी बाहर आया है क्योंकि कमलनाथ अपनी कैबिनेट में बदलाव कर रहे हैं. बाहर से समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को शामिल करने के लिए कुछ मंत्रियों को हटाया जा रहा है, जिसमें सिंधिया और दिग्विजय समर्थकों के नाम आ रहे हैं. इन खबरों के बाद सिंधिया ने दिल्ली में अपने समर्थक मंत्रियों के साथ बैठक की. इस डिनर डिप्लोमेसी में कमलनाथ सरकार के कामकाज पर जमकर बातें उछलीं जो खबरों में भी आईं.



कई मंत्रियों ने खुलकर शिकायतें कीं कि उनके विभाग में ऐसे अफसरों को बैठाया गया है, जो उनकी बात नहीं सुनते, वे तो सिर्फ नाम के मंत्री बनाए गए हैं. कुछ मंत्रियों को हटाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसके बाद कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कहा कि अगर सिंधिया गुट का एक भी मंत्री हटता है तो वे सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे. कमलनाथ कैबिनेट में सिंधिया गुट के फिलहाल छह मंत्री हैं.

अफसरों को लेकर नाराजगी
दिल्ली के बाद मध्यप्रदेश में भी सिंधिया गुट के मंत्री सामूहिक बैठकें करते रहे. अफसर उनकी नहीं सुनते इस पर नाराजगी जाहिर करते रहे. कई मंत्रियों की यह भी शिकायत थी कि मुख्यमंत्री कमलनाथ से उनकी आसानी से मुलाकात नहीं हो पाती. वे विधायकों और मंत्रियों से नहीं मिल रहे. इन तमाम नाराजगियों का असर कैबिनेट की मीटिंग में सामने आया. सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने मैदान पकड़ लिया. इसके जवाब में कमलनाथ समर्थक मंत्री सामने आ गए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने इस तरह के दबाव की राजनीति नहीं हो सकती. माहौल इस कदर उलझ गया कि आखिर मुख्यमंत्री को क्षुब्ध होकर यहां तक कहना पड़ा कि क्या वे इस्तीफा दे दें?

हाईकमान कमजोर
इस घटना की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई है. कांग्रेस के अंदरूनी हलकों से जुड़े एक वरिष्ठ नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि वहां भी हालात सामान्य नहीं हैं. चुनाव के बाद हाईकमान कमजोर है. शिकायत किससे की जाए और इसका क्या असर होगा, फिलहाल तो यह भी नहीं पता.

विवाद नहीं हुआ
सिंधिया समर्थक मंत्री गोविंद राजपूत ने न्यूज 18 को बताया कि कैबिनेट में कोई विवाद नहीं हुआ है. हमने तो सिर्फ इतनी बात कही है कि मंत्री -विधायक अगर कुछ कहना चाहते हैं तो मुख्यमंत्री को समय देना होगा, उनकी बात सुननी होगी. इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर छिड़ी राजनीति का न तो कोई मामला है, न ही कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही सरगर्मी है. कैबिनेट में सबसे ज्यादा मुखर होकर बोलने वाले सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी किसी विवाद से इनकार किया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीपी शेखर कहते हैं कि कैबिनेट में न कोई विवाद हुआ है और न ही कांग्रेस दो फाड़ है. सिंधियाजी समर्थक मंत्री हो या मुख्यमंत्री के, सभी एकजुट हैं. रहा सवाल कैबिनेट विस्तार का तो यह मुख्यमंत्रीजी के अधिकार क्षेत्र का मामला है और वे इस संबंध में हाईकमान से चर्चा कर फैसला लेंगे.

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