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MP: क्रिप्टो करेंसी के जरिये पाकिस्तान भेजी गई 50 करोड़ की रकम, ऐसे हुआ रैकेट का खुलासा

क्रिप्टो करेंसी रैकेट में कुछ बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं.

क्रिप्टो करेंसी रैकेट में कुछ बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं.

Crypto currency racket burst in MP: इस रैकेट में पाकिस्तानी, चीनी नागरिक के साथ इंडिया के रजिस्टर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और व्यवसायी शामिल हैं. अभी तक दिल्ली-गुड़गांव राजकोट से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है. पाकिस्तानी नागरिक और चीनी नागरिकों के इस गिरोह में शामिल होने के सबूत हाथ लगे हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश साइबर पुलिस (Cyber police) ने क्रिप्टो करेंसी (crypto currency) के जरिए करोड़ों रुपये पाकिस्तान भेज  रहे एक अंतर्राज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया है. सिर्फ अप्रैल और मई दो महीने में ये गिरोह करीब 50 करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन कर चुका है. इस रैकेट में पाकिस्तानी, चीनी नागरिक के साथ इंडिया के रजिस्टर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और व्यवसायी शामिल हैं. पाकिस्तान में इस राशि का मनी ट्रेल क्या है. इतनी मोटी रकम का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है. इन तमाम बिंदुओं पर जांच की जा रही है.

स्टेट साइबर चीफ ADG योगेश चौधरी ने न्यूज़ 18 को बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय रैकेट का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है. अभी तक दिल्ली-गुड़गांव राजकोट से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है. पाकिस्तानी नागरिक और चीनी नागरिकों के इस गिरोह में शामिल होने के सबूत हाथ लगे हैं. अधिकतर राशि को देश से बाहर पाकिस्तान भेजने के लिए देश के क्रिप्टो करेंसी ट्रेडर्स को माध्यम बनाया गया. क्रिप्टो ट्रेडर्स से पूछताछ की गई तो पता चला कि यह राशि वजीर एक्स और बिनांस नाम के क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज पर USDT टीथर नामक क्रिप्टो के ट्रेड के एवज में प्राप्त की गई. इन क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जानकारी हासिल करने पर पता चला कि पाकिस्तानी नागरिक नॉन नेटवर्क रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भारतीय ट्रेडर्स से संपर्क कर रहे थे. इसकी भनक भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स को भी नहीं थी.

ऐसे हुआ खुलासा
16 मई को भोपाल के एक युवा व्यवसायी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई कि एक महिला से उसकी डेटिंग एप्लिकेशन Bumble के जरिए पहचान हुई. महिला ने मसालों में ट्रेडिंग के लिए फर्जी मॉलीशस वेब पेज विथ लाइव डैशबोर्ड सुझाया. इस लाइव वेब पेज के जरिए काल्पनिक ट्रांजैक्शन दिखाया गया. इस फर्जी वेब पेज http://h20.gbull.shop पर आरोपियों ने आईडी उपलब्ध करा कर व्यवसायी से 5 फर्म के बैंक खातों ICICI, KOTAK, MAHINDRA में करीब एक करोड़ रुपये जमा कराए. चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी शेल फर्म बना कर आरोपियों को उनके चालू बैंक खाते उपलब्ध करा रहे थे. बैंक अकाउंट में आने वाली ठगी की राशि को भारत में विभिन्न राज्यों में उपलब्ध क्रिप्टो करेंसी के ट्रेडर्स के माध्यम से पाकिस्तान भेजा जा रहा था. भारतीय क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज वजीरएक्स और केमेन आइलैंड Tax Haven  स्थित क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज बिनांस इसके माध्यम बने. राशि को USDT टीथर में परिवर्तित कर ट्रेड किया जा रहा था. इंडिया में बैठे आरोपी कंपनी रजिस्टर्ड कराकर और चालू खाते खुलवा कर पैसा विदेश भेज रहे थे.

आरोपियों तक ऐसी पहुंची सायबर पुलिस
भोपाल के व्यवसाई के साथ एक करोड़ की ऑनलाइन ठगी के मामले की जांच करते हुए पांच संदिग्ध बैंक खातों और क्रिप्टो ट्रेडर्स के खातों को ब्लॉक कराया गया. इन खातों में 50 लाख से ज्यादा की राशि फ्रीज कराई गई. बैंकों से मिली जानकारी की जांच की गयी. आरोपियों की ईमेल आईडी के जरिए पुलिस उन तक पहुंच सकी. इनमें से एक हरियाणा का आरोपी एविक केडिया चार्टर्ड अकाउंटेंट है. वो फर्म रजिस्टर करा कर बैंक में चालू खाता खुलवाता था और फर्म खाते की डिटेल चीनी नागरिक को भेजता था. दिल्ली निवासी आरोपी डॉली मखीजा कंपनी सेक्रेटरी है. ये आरोपी रिश्तेदारों के नाम पर फर्म बनाकर और चालू खाता खुलवा कर संदिग्ध व्यक्तियों को धोखाधड़ी की राशि भेजती थी. तीसरा आरोपी राजकोट में रहने वाला दिलीप पटेल है. यह राजकोट की फर्म विक्टेक प्राइवेट लिमिटेड को मिलने वाला पैसा बैंक से निकालकर अन्य खातों के साथ अपने खाते में भी ट्रांसफर करता था और फिर उसे वजीर एक्स में क्रिप्टो में भेज देता था. बाद में धोखाधड़ी के लिए ईमेल बनाता था. चौथा आरोपी दिल्ली का विक्की मखीजा है.

ये सामान बरामद
आरोपी विजय शुक्ला  निवासी मुंबई, विजय हरियानी निवासी राजकोट और अन्य अज्ञात फरार हैं. इनकी गिरफ्तारी के लिए सायबर पुलिस ने 10-10 हजार के इनाम की घोषणा की है. डो आरोपी पकड़े गए उनसे 60 डिजिटल सिग्नेचर, तीन लैपटॉप, चार पेन ड्राइव, एक मोबाइल फोन, क्रिप्टो ट्रेडिंग स्टेटमेंट, शैल फर्म से संबंधित दस्तावेज, उनकी सूची, लोगों के आधार कार्ड पैन कार्ड, डेबिट कार्ड, बैंक की चैक बुक और अन्य दस्तावेजों बरामद किये गए हैं.

बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में
अभी तक की जांच में पता चला है कि इस गोरखधंधे में 2 महीनों में करीब 50 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया. मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल से भी दो शिकायतें मिली हैं. उसमें 25 और 45 लाख की ठगी की गयी है. जांच के दायरे में कुछ बैंक अधिकारी भी हैं जिन्होंने गाइडलाइन का उल्लंघन करके खाते खोले.

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