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पकड़े गए शातिर सायबर ठग : यू ट्यूब से online fraud सीखकर दूसरों के खातों से करोड़ों रुपये निकाले

भोपाल की सायबर क्राइम पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया

भोपाल की सायबर क्राइम पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया

Bhopal- ये आरोपी लोगों को बैंक अकाउंट बंद होने का कहकर डराते थे. इसके बाद केवायसी डिटेल्स अपलोड कराने के नाम पर उनसे जानकारी ले लेते थे. फिर उनसे ओटीपी मांगते थे. ओटीपी मिलते ही उनके अकाउंट से पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर कर लेते थे.

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भोपाल. भोपाल पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है जो दूसरे राज्यों में बैठकर एमपी के लोगों को ठग रहा था. सारा फ्रॉड ऑनलाइन (online fraud) किया जा रहा था. ये गिरोह बैंक अकाउंट बंद होने के नाम पर लोगों को अपनी बातों में उलझाता था और फिर उनके अकाउंट डीटेल पता करके पैसे पर हाथ साफ कर देता था. इस तरह ये गिरोह अब तक करोड़ों रुपये ठग चुका है. पुलिस ने झारखंड और पश्चिम बंगाल से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

भोपाल साइबर क्राइम के पास एक फरियादी अमरदीप श्रीवास्तवने 10 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी की शिकायत की थी. आरोपियों ने खुद को एसबीआई अधिकारी बताकर बैंक खाते का केवायसी अपडेट करने का झांसा दिया और फिर ठग लिया. इसी मामले की जांच के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंच सकी.

यू ट्यूब से ऑनलाइन फ्रॉड सीखा
एडीशनल एसपी अंकित जायसवाल ने बताया कि पुलिस ने झारखंड और पश्चिम बंगाल से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जो बैंक का कर्मचारी बताकर लोगों से बात करते थे. ये आरोपी लोगों को बैंक अकाउंट बंद होने का कहकर डराते थे. इसके बाद केवायसी डिटेल्स अपलोड कराने के नाम पर उनसे जानकारी ले लेते थे. फिर उनसे ओटीपी मांग लेते थे. ओटीपी मिलते ही लोगों के अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे. राजधानी में कुछ दिन पहले भेल के रिटायर्ड अधिकारी से कुछ ऐसे ही ठगी की गई थी. एएसपी अंकित जायसवाल ने बताया कि पकड़े गए आरोपी ज्यादा सिर्फ दसवीं और बारहवीं तक पढ़े लिखे हैं. इन लोगों ने यू ट्यूब से ऑनलाइन फ्रॉड करना सीखा था.

वारदात का तरीका
आरोपी इतने शातिर हैं कि वो सोशल मीडिया फेसबुक, इंस्टाग्राम में लोगों का प्रोफाइल देखकर फिर उन्हें निशाना बनाते थे. ये बदमाश मोबाइल के सीरियल नंबर में रेण्डमली नंबर जोड़कर कॉल करते थे. आरोपी बैंक अधिकारी बनकर केवायसी अपडेट करने के नाम पर ओटीपी लेकर खाता धारकों के  बैंक खातों से ऑनलाइन पैसा अपने अन्य बैंक खातो में ट्रॉसफर कर लेते थे. पैसे निकाल लेने के बाद पीड़ित का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते थे. ताकि पीड़ित इनसे दोबारा संपर्क नहीं कर सके. इस तरह आरोपी 3-4 साल में करोड़ों रूपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं.

बड़े खुलासे की संभावना
आरोपियों की पहचान मो. इमरान अंसारी निवासी कर्माटांड जिला जामताड़ा, अभिषेक कुमार सिंह निवासी चितरंजन पश्चिम बंगाल, मो. अफजल निवासी आसनसोल पश्चिम बंगाल, संजू देवनाथ निवासी साउथ 24 परगना पश्चिम बंगाल और गुलाम मुस्तफा निवासी आसनसोल पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है. पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ में और कई वारदातों का खुलासा हो सकता है.

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