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52 साल की उम्र में किलिमंजारो फतह करने वाली ज्योति रात्रे का महिलाओं को संदेश-अपने सपने पूरे करें

52 साल की उम्र में किलिमंजारो फतह करने वाली ज्योति रात्रे का महिलाओं को संदेश-अपने सपने पूरे करें

मध्यप्रदेश की ज्योति रात्रे ने 39 दिन में 2 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अब उनका लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना है.

मध्यप्रदेश की ज्योति रात्रे ने 39 दिन में 2 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अब उनका लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना है.

मध्य प्रदेश की ज्योति रात्रे ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. अफ्रीका महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत किलिमंजारो पर तिरंगा लहराने में वो कामयाब हुई हैं. इससे पहले ज्योति रूस के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एलब्रुस पर 52 साल की उम्र में चढ़ाई करने वाली सबसे उम्रदराज महिला का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं.

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भोपाल. 52 साल की उम्र में अफ्रीका की किलिमंजारो पर्वत चोटी फतह करने वाली ज्योति रात्रे महिलाओं को संदेश दे रही हैं. उन्होंने ये रिकॉर्ड बनाने के बाद कहा महिलाएं अपने लिये जीयें, अपने लिए वक्त निकालें और अपने सपने पूरे करें.

मध्य प्रदेश की ज्योति रात्रे ने एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. अफ्रीका महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत  किलिमंजारो पर तिरंगा लहराने में वो कामयाब हुई हैं. इससे पहले ज्योति रूस के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एलब्रुस पर 52 साल की उम्र में चढ़ाई करने वाली सबसे उम्रदराज महिला का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं.

15 अगस्त के दिन तिरंगा फहराया 
स्वतंत्रता दिवस के दिन अफ्रीका महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत  किलिमंजारो पर तिरंगा झंडा फहराने और राष्ट्रगान गाने का ज्योति रात्रि ने लक्ष्य तय किया था. 14 अगस्त को वो 3 सदस्यीय दल के साथ हाई बेस कैंप पर पहुंचीं. उसी रात 2 बजे 5642 मीटर ऊंचे किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने के लिए उन्होंने चढ़ाई शुरू की थी. विश्व के सात महाद्वीपों में सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतह करने में वो कामयाब हुईं और तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान गाकर एक नया कीर्तिमान बनाया.

39 दिन 2 महाद्वीप
मध्यप्रदेश की ज्योति रात्रे ने 39 दिन में 2 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. अब उनका लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ाई करना है. ज्योति रात्रे चोटियों पर चढ़ाई के दौरान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचा रही हैं. उनका कहना है कि अपने सपनों को हर उम्र में पूरा करने की कोशिश करें. जो महिलाएं 52 से 60साल में हार कर बैठ जाती हैं वो सब अपने सपने को जीयें. खुद के लिए जीना सीखें.

उम्र और जज्बा
ज्योति रात्रे का कहना है कि अपनी उम्र और फिटनेस के हिसाब से माउंट एलब्रुस और किलिमंजारो फतह करने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी. लेकिन मन तो पहाड़ की ऊंचाई नापने के लिए बेचैन था. तभी धीरे-धीरे खुद ही तैयारी शुरू की. ट्रैक सिलेक्ट कर सबसे पहले पिन पार्वती ट्रैक किया. फिर उसके बाद अमरनाथ यात्रा की. आमतौर पर अमरनाथ यात्रा 4 दिन में पूरी होती है लेकिन उन्होंने 2 दिन में ही इसे पूरा कर लिया.

जब खुद पर विश्वास हो गया तो मनाली में 6000 फ़ीट ऊंचा देवटिप्पा ट्रैक तक पहुंची. देवटिप्पा ट्रैक के दौरान ट्रेनिंग बहुत काम आई. उसमें एक दिन एक रॉक क्लाइंबिंग होती है. आइस वॉक जो कि सिर्फ 1 दिन की थी,ज्यादा कठिन नहीं थी. इसमें यह सीखने मिला कि आखिर क्लाइंबिंग कैसे करते हैं. आइस ट्रैक कैसे करते हैं. आइस पर कैसे चलते हैं. देवटिप्पा में ट्रैकिंग के दौरान रूस की माउंट एल्ब्रुस को ट्रैक करने में बहुत ज्यादा मदद मिली. माउंट एलब्रुस पर झंडा फहराने के साथ ही किलिमंजारो पर जाने का लक्ष्य तय कर लिया था.

Tags: Africa, Madhya pradesh news, Mountaineer, Sports news

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