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Mountain Climbing Day: ये हैं 52 साल की ज्योति, इनसे जानिए कैसे फतह किया रूस का माउंट एलब्रुस

भोपाल की ज्योति रात्रे ने 52 साल की उम्र में वो कर दिखाया जो युवा भी महज सोचते हैं. (File)

भोपाल की ज्योति रात्रे ने 52 साल की उम्र में वो कर दिखाया जो युवा भी महज सोचते हैं. (File)

Interesting News: भोपाल की 52 साल की ज्योति रात्रे ने कमाल कर दिया. इन्होंने 52 साल की उम्र में रूस का माउंड एलब्रुस फतह किया. इनका कहना है कि उम्र केवल एक नंबर है. वह आपके सपनो के बीच नहीं आना चाहिए. अभी वे और भी चोटियां समिट करना चाहती हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) की ज्योति रात्रे का हौंसला बेहद मजबूत है. इनकी उड़ान उन पहाड़ो से भी ऊपर है, जिनको केवल देखने भर से आदमी का दम निकलने लगता है. आइए The National Mountain Climbing Day पर जानते हैं ज्योति की कहानी, जिन्होंने 52 साल की उम्र में रूस की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस को इसी साल 8 जुलाई को समिट किया. साथ ही, ऐसा करके सबसे उम्रदराज भारतीय महिला बनी. रूस की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच कर उन्होंने खुद को तो साबित किया ही, प्रदेश का मान भी बढ़ाया.

ज्योति रात्रे ने कहना है कि उनको ऊंची-ऊंची पहाड़ियां और चोटियां हमेशा आकर्षित करती थीं. पहाड़ों पर ट्रैकिंग के प्रति लगाव था तो माउंट एवरेस्ट फतह करने की ठानी.उम्र के बंधन के चलते माउंट एवरेस्ट पर जाने की एप्लीकेशन एक्सेप्ट ही नहीं हुई. क्योंकि, पहाड़ों को समिट करने की उम्र 40 से 42 साल. इसके बाद 2017 से खुद ही माउंटेन सिलेक्ट कर ट्रेनिंग शुरू कर दी. फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ पर फोकस किया. अपने अंदर आत्मविश्वास और विश्वास था कि एक दिन सबसे ऊंची चोटी तक जरूर भारत का झंडा फहराऊंगी.

माउंट एलब्रुस से पहले पिन-पार्वती, अमरनाथ यात्रा की ट्रैकिंग

ज्योति रात्रे ने बताया- खुद की फिटनेस के हिसाब से माउंट एवरेस्ट के बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी. इसलिए धीरे-धीरे खुद ही तैयारियां शुरू कीं. ट्रैक सिलेक्ट कर सबसे पहले पिन-पार्वती ट्रैक किया, फिर उसके बाद अमरनाथ यात्रा की. आमतौर पर अमरनाथ यात्रा 4 दिनों में पूरी होती है, लेकिन मैंने 2 दिन में ही पूरी की.उसके बाद जब और अच्छी फिटनेस हुई तो मनाली में 6000 फीट ऊंचा ट्रैक देवटिप्पा क्रॉस किया. देवटिप्पा ट्रैक करने के दौरान ट्रेनिंग बहुत काम आई, क्योंकि, इसमें एक दिन की रॉक क्लाइम्बिंग होती है. वहां आइस वॉक सिर्फ 1 दिन की थी, ज्यादा कठिन नहीं थी. इसमें यह सीखने को मिला कि आखिर क्लाइंबिंग कैसे करते हैं, आईस ट्रैक कैसे करते हैं.आइस पर कैसे चलते हैं.देवटिप्पा में ट्रैकिंग के दौरान रूस की माउंट एल्ब्रुस को ट्रैक करने में बहुत ज्यादा मदद मिली.

पता ही नही था सपना पूरा होने के साथ रिकॉर्ड भी बनेगा

माउंटन विनर ज्योति के मुताबिक, रूस के माउंट एलब्रुस पर जाते वक्त ये नहीं सोचा था कि सपना भी पूरा होगा और रिकॉर्ड भी बनेगा. 4 लोगों के दल में मध्य प्रदेश से 52 साल की सबसे ज्यादा उम्र की  इकलौती महिला मैं ही थी. माउंट एलब्रुस पर पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि वहां मौसम सबसे बड़ी चुनौती है. वहां के एटमॉस्फेयर में खुद को ढालना बहुत मुश्किल है. बहुत ज्यादा स्नोफॉल होता है.

दोगुनी हो गई खुशी

उन्होंने बताया कि फाइनल पॉइंट पर पहुंचने से पहले स्नोफॉल हो गया. तब वाइट आउट के चलते क्लाइम्बिंग रोकनी पड़ी. मौसम ठीक हुआ फिर 5462 फीट ऊंची चोटी पर पहुंचे. ज्योति ने कहा कि मैन पॉइंट पर पहुंचना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल था. पूरे परिवार के खुश होने की साथ मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने इतनी ऊंची चोटी पर फतह हासिल की है. जब पता चला कि मैंने अपने नाम एक नया रिकॉर्ड बनाया है तो खुशी दोगुनी हो गई. अब किलिमंजारो( अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी)को फतह करने की तैयारियों में जुटी हुई हूं.

बढ़ती उम्र में करें अपने सपने को पूरा

ज्योति रात्रे का कहना है कि अपने सपनों को हर उम्र में पूरा करने की कोशिश करें. जो महिलाएं 52  से 60साल में हार कर बैठ जाती हैं, उन्हें अपने सपनों को जीना चाहिए. खुद के लिए जीना सीखें.

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