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EXCLUSIVE: व्यापम महाघोटाले की जांच में लीपापोती शुरू, 197 पेंडिंग शिकायतों में से 80 की फाइल बंद!

MP के बहुचर्चित व्यापम घोटाले  की जांच CBI भी कर रही है.

MP के बहुचर्चित व्यापम घोटाले की जांच CBI भी कर रही है.

VYAPAM SCAM : बीजेपी सरकार (BJP Government) पर लगे आरोपों के बाद 2015 में व्यापम घोटाले की जांच STF से लेकर सीबीआई को सौंप दी गई थी. 2018 में कमलनाथ सरकार आने के बाद STF को व्यापम घोटाले की जांच दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए गए थे. STF ने CBI की जांच में दखल न देते हुए 197 पेंडिंग शिकायतों की जांच शुरू की.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में हुए शिक्षा जगत के सबसे बड़े व्यापम महाघोटाले (Vyapam Scam) की जांच में अब लीपापोती शुरू हो गई है. जिन पेंडिंग शिकायतों की जांच के बाद FIR हो रही थी. उन्हें अब फाइलों में दफन किया जा रहा है. इन शिकायतों को बड़ी संख्या में बंद किये जाने से अब सियासी हंगामा भी शुरू हो गया है.

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच के साथ कमलनाथ सरकार ने इससे जुड़ी पेंडिंग शिकायतों की भी जांच शुरू की थी. सीबीआई जांच में एसटीएफ का किसी भी तरीके का दखल नहीं था. एसटीएफ सिर्फ व्यापम घोटाले की 197 पेंडिंग शिकायतों की जांच कर रही थी. कमलनाथ सरकार के दौरान तीन महीने में इन शिकायतों की जांच के बाद पीएमटी 2008 से 2011 के साथ डीमेट और प्रीपीजी परीक्षा मामलों में सबसे पहले टोटल 16 एफआईआर दर्ज की गई थीं. लेकिन इस बीच सरकार बदल गयी औऱ बीजेपी फिर सत्ता में आ गयी. उसके डेढ़ साल के कार्यकाल में सिर्फ आरक्षक भर्ती केस में एक एफआईआर दर्ज हो सकी.

80 फाइल बंद
सूत्रों ने बताया कि इन पेंडिंग शिकायतों में से करीब 80 शिकायतों की फाइल बंद कर दी गयी है. वजह ये बतायी जा रही है कि ये शिकायतें झूठी थीं उनमें कोई सबूत नहीं मिले. इस मामले में एसटीएफ का कोई भी अधिकारी कैमरे के सामने बोलने के लिए तैयार नहीं है.

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व्यापम घोटाले में कब क्या हुआ…?
शिवराज सरकार में सबसे पहले व्यापम घोटाले की जांच इंदौर क्राइम ब्रांच ने शुरू की थी. 2013 में व्यापम घोटाले में FIR दर्ज होने के बाद सरकार ने STF को जांच सौंप दी थी. तब STF के तत्कालीन अफसरों ने 21 नवंबर 2014 को विज्ञप्ति जारी कर लोगों से नाम या गुमनाम सूचनाएं आमंत्रित की थीं. इसमें 1357 शिकायतें मिली थीं. इसमें से 307 शिकायतों की जांच कर 79 FIR दर्ज की गई थीं. 1050 शिकायतों में से 530 जिला पुलिस के पास जांच के लिए भेजी गईं और 197 शिकायतें STF के पास ही थीं. बाकी 323 शिकायतों को नस्तीबद्ध कर दिया, जिसमें गुमनाम होने को आधार बनाया गया था. इन्हीं 197 शिकायतों की जांच STF ने कांग्रेस सरकार में दोबारा शुरू की थी.

नेता, मंत्री और नौकरशाहों के नाम
बीजेपी सरकार पर लगे आरोपों के बाद 2015 में व्यापम घोटाले की जांच STF से लेकर सीबीआई को सौंप दी गई थी. 2018 में कमलनाथ सरकार आने के बाद STF को व्यापम घोटाले की जांच दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए गए थे. STF ने CBI की जांच में दखल न देते हुए 197 पेंडिंग शिकायतों की जांच शुरू की. उस समय इनमें से 100 शिकायतों को प्राथमिक जांच के बाद FIR के लिए चिह्नित किया गया था. इन FIR में करीब 500 लोगों को आरोपी बनाया जाना था. इन चिह्नित शिकायतों की जांच में उस समय की तत्कालीन बीजेपी सरकार के कई मंत्री, आईएएस, आईपीएस अफसरों के साथ बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आए थे.

 सरकार बदलते ही सब बदल गया
बीजेपी सरकार आते ही तत्कालीन सरकार के एसटीएफ चीफ अशोक अवस्थी और एडिशन एसपी राजेश सिंह भदौरिया को हटा दिया गया. इसके बाद इन पेंडिंग शिकायतों की जिम्मेदारी एडीजी विपिन महेश्वरी को सौंपी गई. यह वही आईपीएस अफसर हैं, जिन पर व्यापम की एक्सेल शीट में छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा था.

कोर्ट जाएगी कांग्रेस
व्यापम की पेंडिंग शिकायतों की फ़ाइल बंद करने पर सियासी बवाल मचने लगा है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा व्यापम एजुकेशन क्षेत्र का सबसे बड़ा घोटाला है. 15 साल में यह घोटाला किया गया. जबकि 15 महीने की सरकार में कांग्रेस ने इसमें कार्रवाई की. बीजेपी धीरे-धीरे इसे क्लोज करने का काम कर रही है. उन्होंने कहा इसमें जो दोषी हैं, उन्हें सजा मिलना चाहिए. इस मामले को लेकर कांग्रेस कोर्ट जाएगी.

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