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भोपाल के लोग रुचि नहीं दिखा रहे, GMC में अब तक शुरू नहीं हो पाया को-वैक्सीन का ट्रायल

भोपाल में अभी सिर्फ एक ही जगह को वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो पाया है.
भोपाल में अभी सिर्फ एक ही जगह को वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो पाया है.

विश्वास सारंग ने कहा-जितने लोगों को ट्रायल (Trial) में हिस्सा लेना था, उसमें कमी आई है. वॉलिंटियर्स की संख्या नहीं हो पा रही है. इसलिए एक ही सेंटर में अभी ट्रायल शुरू हुआ है.

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भोपाल.राजधानी भोपाल में कोरोना (Corona) की को- वैक्सीन के ट्रायल में आम लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं. यही कारण है कि अभी तक शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में ही को-वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो सका है.गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में ट्रायल की सभी व्यवस्था करने के बाद भी वहां वॉलिंटियर की कमी के कारण ट्रायल शुरू नहीं हो पाया है. विभाग के मंत्री विश्वास सारंग ने गांधी मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान लोगों में जागरूकता लाने के लिए अभियान चलाने की बात कही.

मंत्री ने कहा
विश्वास सारंग ने कहा-जितने लोगों को ट्रायल में हिस्सा लेना था, उसमें कमी आई है. वॉलिंटियर्स की संख्या नहीं हो पा रही है. इसलिए एक ही सेंटर में अभी ट्रायल शुरू हुआ है. ट्रायल में देखा जा रहा है कि लोगों की रुचि नहीं है. जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग ट्रायल में भाग लें.ट्रायल को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं तो उन्हें दूर करेंगे.गांधी मेडिकल कॉलेज में ट्रायल की पूरी तैयारियां हैं. वॉलिंटियर के नहीं होने के कारण ट्रायल शुरू नहीं हो सका.

कांग्रेस सरकार पर निशाना
गैस त्रासदी बरसी को लेकर सारंग ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा.उन्होंने कहा तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गैस पीड़ितों के हितों के साथ कुठाराघात किया. एंडरसन को भागने में मदद की. इसलिए गैस पीड़ितों को सही मुआवजा नहीं मिला. कांग्रेस की सरकार बयान देती रही. लंबे वक्त तक कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा. पहले मध्य प्रदेश की सरकार पार्टी नहीं थी. अब हम पार्टी बने हैं. दमदारी से कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं. हम हर स्तर पर गैस पीड़ितों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने कहा जो गैस पीड़ित कोरोना से पीड़ित थे, उनका भी फ्री में इलाज कराया गया.



गैस फैक्ट्री में बनेगा स्मारक
जिस यूनियन कार्बइड फैक्ट्री से गैस का रिसाव हुआ था. वह सालों से बंद पड़ी है. मंत्री विश्वास सारंग ने कहा इस फैक्ट्री पर स्मारक बनाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि हम गैस पीड़ितों के लिए रोजगार मुखी स्मारक बनाना चाहते हैं. जिससे वहां पर गैस पीड़ितों को रोजगार मिले. जो भी हमारे इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं, वह एक तरीके से गैस पीड़ितों का विरोध कर रहे हैं.

सुल्तानिया अस्पताल शिफ्ट होगा
सुल्तानिया मेटरनिटी अस्पताल को GMC में शिफ्ट किया जाएगा. 6 महीने में शिफ्ट करने का टारगेट है. विश्वास सारंग ने कहा अभी सुल्तानिया में डिलीवरी के बाद तबियत खराब होने पर गंभीर केसों में नवजात को जीएमसी में ट्रांसफर किया जाता था. लेकिन अब एक ही जगह पर सभी सुविधाएं मिल सकेंगी.
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