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MP पुलिस में नहीं है 'वीर'! 5 साल से किसी अधिकारी को नहीं मिला वीरता पदक

ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने प्रदेश से किसी अफसर का नाम वीरता पदक के लिए गृह मंत्रालय भेजा न हो.हर बार किसी न किसी का नाम भेजा गया.लेकिन गृह मंत्रालय (home Ministry) ने उनमें से किसी को तवज्जो नहीं दी.
ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने प्रदेश से किसी अफसर का नाम वीरता पदक के लिए गृह मंत्रालय भेजा न हो.हर बार किसी न किसी का नाम भेजा गया.लेकिन गृह मंत्रालय (home Ministry) ने उनमें से किसी को तवज्जो नहीं दी.

ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने प्रदेश से किसी अफसर का नाम वीरता पदक के लिए गृह मंत्रालय भेजा न हो.हर बार किसी न किसी का नाम भेजा गया.लेकिन गृह मंत्रालय (home Ministry) ने उनमें से किसी को तवज्जो नहीं दी.

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भोपाल.मध्यप्रदेश पुलिस (Madhya Pradesh) में क्या वीर अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं.यह हम नहीं कह रहे. ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पांच साल से प्रदेश के किसी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी को राष्ट्रपति का वीरता पदक (Gallantry medal) नहीं मिला है. ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने प्रदेश से किसी अफसर का नाम वीरता पदक के लिए गृह मंत्रालय भेजा न हो.हर बार किसी न किसी का नाम भेजा गया.लेकिन गृह मंत्रालय (home Ministry ने उनमें से किसी को तवज्जो नहीं दी.

गृह मंत्रालय ने 26 जनवरी पर मध्यप्रदेश के 21 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति का सराहनीय सेवा और विशिष्ट सेवा पदक तो दिया. लेकिन इन 21 पदकों के अलावा हर बार की तरह इस बार भी प्रदेश पुलिस को एक भी वीरता पदक नहीं मिला.गृह मंत्रालय की सूची में दूसरे राज्यों के पुलिसवालों को वीरता पदक दिया गया. लेकिन इस सूची से एमपी पुलिस गायब थी.यह पहली बार नहीं है.इससे पहले भी बीते पांच साल से एमपी पुलिस को राष्ट्रपति का वीरता पदक नहीं मिला.

2015 में मिला था आखिरी पदक
2015 में एडीजी जेल गाजीराम मीणा वो आखिरी अधिकारी थे जिन्हें वीरता पदक मिला था.मध्यप्रदेश के रिटायर्ड डीजी आरएलएस यादव ने बताया कि राज्य सरकार के साथ इंटेलिजेंस की भूमिका रहती है.मंत्रालय अपने स्तर पर भी प्रस्ताव में दी गई जानकारी की पड़ताल करता है.बड़ी छानबीन के बाद यह पदक मिलता है.कोई न कोई कारण रहा होगा, तभी एमपी के प्रस्तावों को वीरता पदक के योग्य नहीं समझा गया.
नहीं मिला वीरता पदक


पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार इस बार कटनी एसपी ललित शाक्यवार और एएसपी राजेश व्यास के नाम का प्रस्ताव वीरता पदक के लिए गृह मंत्रालय भेजा गया था.इस प्रस्ताव में जून 2011 में सिमी आतंकियों की गिरफ्तारी में सूझबूझ एवं साहस का परिचय देने का जिक्र था.इसी काम के लिए दोनों अफसरों को मुख्यमंत्री का रिवॉल्वर पुरस्कार भी मिल चुका है.लेकिन शाक्यवार और व्यास को पदक नहीं मिला.ऐसा पहली बार नहीं हुआ.इससे पहले भी पुलिस मुख्यालय ने डकैतों के एनकाउंटर और दूसरे सहासी काम करने वाले पुलिस अफसरों के नाम का प्रस्ताव वीरता पदक के लिए भेजा था. लेकिन पिछले पांच साल से एक भी वीरता पदक से मध्यप्रदेश को नहीं नवाज़ा गया.

सिमी एनकाउंटर पर सियासत तेज़
वीरता पदक ना मिलने के सवाल पर पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारी कुछ कहने के लिए तैयार नहीं हैं.लेकिन पुलिस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है भोपाल में हुए सिमी एनकाउंटर के मामले का प्रस्ताव भेजा जाता, तो जरूर इस बार वीरता पदक पुलिस को मिलता.लेकिन सियासी बदलाव की वजह से ऐसा नहीं हुआ.

सरकार की मंशा पर सवाल
भोपाल में सिमी एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम के नाम का प्रस्ताव वीरता पदक के लिए नहीं भेजने पर अब सियासत तेज हो गई है.बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए हैं.प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा सरकार को प्रस्ताव भेजने में क्या दिक्कत थी. कांग्रेस आतंकवाद में भी वोट बैंक तलाशती है.वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने कहा प्रदेश पुलिस को वीरता पदक इसलिए नहीं मिल पाते, क्योंकि शासन पूरी तैयारी के साथ प्रस्ताव नहीं भेजता.प्रस्ताव में कमी होने की वजह से 5 साल वीरता पदक नहीं मिल रहा है.उन्होंने सिमी एनकाउंटर केस का जिक्र भी किया.उन्होंने कहा अगर इस केस का प्रस्ताव भेजा जाता, तो जरूर वीर अफसरों को राष्ट्रपति का वीरता पदक मिलता.

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