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मध्‍य प्रदेश में अब आंदोलन के मूड में पुलिसवालों के परिजन, CM को चिट्ठी लिख दी चेतावनी

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 14, 2019, 3:11 PM IST
मध्‍य प्रदेश में अब आंदोलन के मूड में पुलिसवालों के परिजन, CM को चिट्ठी लिख दी चेतावनी
भोपाल के जहांगीराबाद पुलिसलाइन की यह तस्वीर मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों की हालत बयां करती है.

मध्य प्रदेश में (Madhya Pradesh) कार्यरत पुलिसकर्मियों के परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि कमलनाथ (CM Kamalnath) सरकार ने पुलिस (MP Police) की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 15 अक्टूबर से भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में धरना दिया जाएगा.

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भोपाल. प्रदेश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का जिम्मा जिन कंधों पर है, अब उनके ही परिवार सोशल मीडिया पर आंदोलित हो गए हैं. जी हां, जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करने वाले मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों (MP Police) के लिए उनके परिवारवालों (Policemen family) ने सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है. पुलिस परिवारों ने सीएम कमलनाथ (CM Kamalnath) और प्रदेश के गृह मंत्री को पत्र लिखकर कांग्रेस के वचन पत्र के वादों की याद दिलाई है. यही नहीं, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को 15 अक्टूबर से मैदानी रूप भी दिया जाएगा.

लंबे अर्से से कर रहे मांग
मैदानी पुलिसिंग से जुड़े कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक के कर्मचारी कई सालों से वेतन, भत्ते समेत दूसरी समस्याओं को लेकर अपनी मांग उठाते रहे हैं. लेकिन आईपीएस एसोसिएशन (IPS Association) की तरह संगठन नहीं होने की वजह से ये कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आ पाते हैं. वर्दीधारियों की इस मजबूरी में अब उनका साथ देने उनके परिजन खुलकर सामने आए हैं. सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर वे अपने परिवार के पुलिसकर्मी की नौकरी आसान बनाने की मांग उठा रहे हैं.

खूब मिल रहा समर्थन

पुलिस वालों के परिवारों के सोशल मीडिया आंदोलन को समर्थन भी मिलने लगा है. सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म फेसबुक और वाट्सएप पर यह आंदोलन 'आंदोलन #मध्य प्रदेश' पुलिस सुधार से शुरू हुआ है. भोपाल के जहांगीराबाद पुलिसलाइन में जब न्यूज18 के संवाददाता ने पुलिसकर्मियों के परिजनों से बात की तो उन्होंने खुलकर कहा कि सरकार को उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए. इन लोगों ने यह भी शिकायत की कि कांग्रेस के वचन पत्र के वादे भी पूरे नहीं किए गए हैं. परिजनों ने बताया कि पुलिसकर्मियों का वेतन लंबे अर्से से नहीं बढ़ाया गया. बड़े अधिकारियों को सभी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन छोटे कर्मचारियों पर ध्यान नहीं दिया जाता. हर वक्त डयूटी पर होने की वजह से पुलिसकर्मी घर में समय भी नहीं दे पाते हैं. तनख्वाह कम है और सरकार भत्ते भी नहीं बढ़ा रही है. पुलिस परिवारों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो लाल परेड ग्रांउड में धरना दिया जाएगा.

एमपी पुलिस के परिजनों द्वारा सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे आंदोलन को समर्थन मिल रहा है.


ये हैं मांगें
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-आरक्षक का ग्रेड पे 2800 किया जाए.
-आवास भत्ता 5000 रुपए किया जाए.
-गृह जिले में पदस्थापना की जाए, जिससे पुलिसकर्मी अपने परिवार को समय दे सकें.
-दूसरे राज्यों की तरह आठ घंटे की ड्यूटी की जाए, जिससे पुलिसकर्मी तनाव मुक्त रहे.
-ओवरटाइम का अलग से भुगतान किया जाए.
-विशेष सशस्त्र बल की कंपनियों को स्थायी किया जाए.
-पुलिस अधिनियम 1861 को समाप्त किया जाए.
-साइकिल भत्ते की जगह मोटरसाइकिल भत्ता 3000 रुपए दिया जाए.
-पिछले 50 सालों में जिन भत्तों को नहीं बढ़ाया गया, उन्हें तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर लागू किया जाए.
-विशेष सशस्त्र बल से जिला बल में संविलियन चालू किया जाए.
-दूसरे राज्यों की तरह मध्यप्रदेश पुलिस संगठन बनाया जाए.
-पुलिस विभाग में आवास गृह की समस्याओं को हल किया जाए.

भाजपा सरकार में दब गया था आंदोलन
ये पहली बार नहीं है जब पुलिस परिवार आंदोलन कर रहे हैं. इससे पहले बीजेपी सरकार के वक्त भी आंदोलन शुरू किया गया था, लेकिन अफसरों की दखल के बाद यह आगे नहीं बढ़ सका. अपने हक के लिए एक बार फिर पुलिस परिवार मुखर हो रहे हैं. पुलिसकर्मियों के परिजनों का कहना है कि आरक्षक से इंस्पेक्टर तक का बीते 40 साल से ग्रेड-पे नहीं बदला गया है. अपनी तमाम मांगों को लेकर पुलिसकर्मियों के परिवारों ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के नाम पर चिट्ठी जारी कर वचन पत्र के वादों को पूरा करने की मांग की है.

इधर, सियासत भी शुरू हो गई
पुलिस परिवारों के आंदोलन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी आने लगी है. कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि सरकार पुलिस के लिए गंभीर है और उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा. वहीं बीजेपी नेता हितेष वाजपेयी ने बताया कि सरकार कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं कर पा रही है. वादे किए हैं लेकिन निभा नहीं रही है. सभी कर्मचारी संगठन एक के बाद एक कर सरकार के खिलाफ आंदोलित हो रहे हैं.

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First published: October 13, 2019, 9:26 PM IST
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