MP: आजीवन कारावास वाले कैदी अब पैरोल पर होंगे रिहा, रेपिस्ट कैदियों को लेकर उठे सावल

कोरोना महामारी के चलते प्रदेश की जेलों से हजारों की संख्या में कैदी अभी आपात पैरोल पर बाहर हैं.

प्रदेश की जेलों में बंद आजीवन कारावास वाले कैदी पैरोल पर होंगे रिहा. पैरोल (Parole) में रेपिस्ट कैदियों को शामिल करने पर उठे सवाल. इन कैदियों के भागने की सबसे ज्यादा रहती आशंका.

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भोपाल. मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी पैरोल (parole)  पर रिहा हो सकेंगे. जेल मुख्यालय के निर्देश के बाद पैरोल देने की तैयारी है. पैरोल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे रेपिस्ट कैदियों को शामिल किए जाने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. पहले भी इन कैदियों को पैरोल मिल चुकी है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश के तहत ऐसे कैदियों पर राज्यपाल ही फैसला ले सकते हैं. साथ ही इन कैदियों के भागने की आशंका भी ज्यादा रहती है.

कोरोना महामारी के चलते प्रदेश की जेलों से हजारों की संख्या में कैदी अभी आपात पैरोल पर बाहर हैं. लेकिन जेल मुख्यालय के निर्देश के बाद अब सामान्य पैरोल पर भी कैदियों रिहा किये जाने की तैयारी है. सामान्य पैरोल 45 दिन की होती है. वहीं, आपात पैरोल अधिकतम 10 महीने तक की मिलती है. अभी अधिकांश कैदी आपात पैरोल पर रिहा हैं.

इसलिए उठ रहे रेपिस्ट कैदियों पर सवाल
वैसे तो अच्छे आचरण के चलते ही कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जाता है. इसके लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की 2 साल की सजा पूरी हो चुकी हो. कोई मामला विचाराधीन न हो, अधिक मामलों में सजा न हो और अच्छे आचरण पर जेल अधीक्षक कलेक्टर को पैरोल के लिए अनुसंशा करता है. आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों में अधिकांश रेपिस्ट कैदी भी हैं. भोपाल सेंट्रल जेल में ऐसे 400 रेपिस्ट कैदी हैं, जिसमें से 100 कैदी नाबालिग बच्चियों से रेप के मामले में सजा काट रहे हैं. यह कैदी दूसरे आजीवन कारावास के कैदियों की तरह पैरोल की पात्रता रखते हैं. लेकिन 2015 से सुप्रीम कोर्ट ने इनकी की रिहाई पर रोक लगाई थी. सिर्फ राजपाल को  इन कैदियों को रियायत देने का अधिकार है. हालांकि, इन कैदियों को पहले भी पैरोल पर रिहा किया गया था. अब ऐसे में फिर से रेपिस्ट कैदियों को पैरोल की केटेगरी में शामिल किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. अभी इन कैदियों को पैरोल पर रिहा करने के आवेदन जिले के कलेक्टर को भेजे जायेंगे. इसके बाद ही इनके पैरोल पर फैसला हो सकेगा.

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