मध्य प्रदेश में Love पर Jihad होगा या नहीं! नए कानून को HC में चुनौती, सरकार को नोटिस

मप्र हाई कोर्ट में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती मिल गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

मप्र हाई कोर्ट में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को चुनौती मिल गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

Love Jihad News: मप्र में 'लव जिहाद' के खिलाफ शिवराज सरकार के नए कानून पर रोक लगाने के लिए कानून के एक छात्र अम्रतांश नेमा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. कोर्ट ने प्रदेश सरकार, विधि एवं विधाई कार्य विभाग सहित गृह विभाग से जवाब मांगा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 5:12 PM IST
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जबलपुर/भोपाल. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कानून के छात्र अम्रतांश नेमा ने मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 की संवैधानिकता को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 की धारा 4, 10 और 12 गलत है. नए कानून में धर्मांतरण की परिभाषा और प्रक्रिया भी गलत है. अम्रतांश की याचिका पर हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार, विधि एवं विधाई कार्य विभाग सहित गृह विभाग को नोटिस जारी किए. बता दें. यह कानून 17 सेक्शन का नया क़ानून है.

गौरतलब है कि 9 जनवरी को मध्‍य प्रदेश सरकार (MP Government) ने राजपत्र में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2020 Freedom of Religion Ordinance) के लिए अधिसूचना जारी की थी. सरकार के इस कदम के साथ ही कथित 'लव जिहाद' (Love Jihad) के खिलाफ राज्य में सख्त कानून लागू हो गया. दिसंबर 2020 में शिवराज सिंह कैबिनेट (Shivraj Singh Cabinet) ने मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को मंजूरी दी थी.

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10 वर्ष कैद और एक लाख जुर्माना


इस विधेयक में शादी या धोखाधड़ी से कराया गया धर्मांतरण (Conversion) अपराध माना जाएगा, जिसके लिए अधिकतम 10 वर्ष की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बाद यह कानून लागू करने वाला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) देश का दूसरा राज्य है.

सरकार ने ये किए थे प्रावधान


अधिनियम के प्रावधान में सरकार ने बदलाव करते हुए कम से कम 1 साल और अधिकतम 5 साल तक की सजा, 25000 रुपए का जुर्माना करने का प्रावधान किया है.
महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, जनजाति के धर्म में बदलाव किए जाने पर कम से कम 2 साल और अधिकतम 10 साल की सजा करने और 50000 रुपए का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है.
धर्म छिपाकर धर्म बदलाव किए जाने की कोशिश पर 3 साल की कम से कम सजा और अधिकतम 10 साल का कारावास समेत 50000 रुपए जुर्माना होगा.
सामूहिक धर्म परिवर्तन के दबाव पर 5 से 10 साल की सजा और एक लाख रुपए तक का जुर्माना होगा.
एक बार से ज्यादा बार कानून का उल्लंघन करने पर 5 से 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है.
पैतृक धर्म में वापसी को लेकर भी सरकार ने मसौदे में बिंदु को शामिल किया है. अधिनियम में धर्म परिवर्तन के मामले में कहा गया है कि पैतृक धर्म वह माना जाएगा जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म था.
धर्म परिवर्तन कराने के मामले में संबंधित व्यक्ति के माता-पिता या भाई-बहन को पुलिस थाने में अधिनियम के तहत कार्रवाई की शिकायत देना होगा.
अधिनियम में दर्ज अपराध और गैर जमानती माना गया है. मामले की सुनवाई कोर्ट के द्वारा अधिकृत होगी.
अधिनियम में निर्दोष होने के सबूत देने की बाध्यता भी रखी गई है.
अधिनियम के प्रावधानों के खिलाफ विवाह को Nul एंड Void मानने का प्रावधान अधिनियम में किया गया है. इसके लिए परिवार न्यायालय को भी अधिकृत किया गया है.
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