उपचुनाव के ठीक बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत फिर भोपाल आए, आखिर क्या हैं इसके राजनीतिक मायने ?" 

बीते 5 महीने के भीतर ही संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन बार भोपाल आ चुके हैं.
बीते 5 महीने के भीतर ही संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन बार भोपाल आ चुके हैं.

भोपाल में हो रही संघ (RSS) की बैठक में बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) मधय क्षेत्र के मार्च से नवंबर तक के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं. भोपाल से पहले ये बैठक बेंगलुरु में आयोजित हो चुकी है.

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भोपाल.मध्यप्रदेश (MP) में विधानसभा की 28 सीटों के उपचुनाव (By Election) के ठीक एक दिन बाद संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने एक बार फिर भोपाल में डेरा डाल दिया है. संघ प्रमुख यहां 2 दिन तक क्षेत्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक लेंगे. उनके साथ सरकार्यवाह भैयाजी जोशी भी आए हैं.राजधानी के शारदा विहार में चल रही क्षेत्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक को बेहद गोपनीय रखा गया है. बैठक के अंदर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं दी गई है. जिस शारदा विहार में यह बैठक चल रही है उसके बाहर पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया है.

जानकारी के मुताबिक बैठक में संघ प्रमुख मार्च से नवंबर तक के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं. भोपाल से पहले ये बैठक बेंगलुरु में आयोजित हो चुकी है. भोपाल की बैठक में संघ के मध्यक्षेत्र (मध्यभारत, मालवा, महाकोशल और छत्तीसगढ़ ) की प्रान्त टोली, क्षेत्र टोली और मध्य क्षेत्र में रहने वाले केंद्रीय अधिकारी मौजूद रहेंगे.

बैठक के मायने
दरअसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हर साल अखिल भारतीय स्तर पर कार्यकारी मंडल की बैठक करता है. लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण यह बैठक केंद्रीय स्तर पर आयोजित न होकर क्षेत्रवार की जा रही है. संघ की भौगोलिक रचना के अनुसार पूरे देश में 11 क्षेत्र हैं जिनमें से एक मध्य क्षेत्र भी है. इसी मध्य क्षेत्र की बैठक 5 और 6 नवंबर को भोपाल में लेने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत आए हैं.



संघ प्रमुख के लगातार दौरे
संघ प्रमुख मोहन भागवत के भोपाल में लगातार दौरे हो रहे हैं. इससे पहले बीते 5 महीने के भीतर ही संघ प्रमुख मोहन भागवत तीन बार भोपाल आ चुके हैं. भोपाल में उन्होंने न केवल प्रांतीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ भी अहम बैठकें की हैं. यह माना जा रहा है कि संघ मध्यप्रदेश में अपनी पैठ और मजबूत कर रहा है जो संगठन के साथ-साथ राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है. संघ की नजर कहीं न कहीं मध्य प्रदेश में लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर भी है. एमपी में हाल ही में 28 सीटों के विधानसभा उपचुनाव भी हुए हैं,
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