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शिवराज सरकार फिर लेगी 1000 करोड़ का कर्ज, वित्त मंत्री बोले- बंगला सजाने को नहीं, जनता के लिए करेंगे काम

शिवराज सरकार का नये साल में ये पहला कर्ज़ है.
शिवराज सरकार का नये साल में ये पहला कर्ज़ है.

Bhopal News: शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार (Shivraj Government) अपने 10 माह के कार्यकाल में 17,500 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है. अब 18वीं बार भी कर्ज लिया जाएगा.

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भोपाल. कर्ज में डूबी शिवराज सरकार (Shivraj government) फिर एक हजार करोड़ का कर्ज़ लेने जा रही है. यह इस नए साल का पहला कर्ज़ होगा. कर्ज़ लेने की वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कई वजह गिनाईं तो वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने कमलनाथ पर निशाना साधा.

वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि कर्ज़ लेना एक निरंतर प्रक्रिया है क्योंकि चिकित्सा, शिक्षा, कृषि, आपदा जैसी चीजों पर खर्च होता है. हमारी सरकार किसानों, गरीबों और आम आदमी सभी का ध्यान रखती है. कई जन हितैषी योजनाएं हम चला रहे हैं. बजट में सभी का ध्यान रखा जाएगा. संबल जन हितैषी योजना है. इससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक को लाभ पहुंचेगा.

कमलनाथ सरकार पर निशाना
मंत्री विश्वास सारंग ने सरकार के फिर से कर्ज़ लेने पर कहा कि हमारी सरकार में जो कर्ज लिया जाता है उसका सदुपयोग होता है. हमने आर्थिक अनुशासन कायम किया है. कांग्रेस सरकार ने 20 से 30 हजार करोड़ का कर्ज लिया और उस कर्ज का उपयोग कमलनाथ और मंत्रियों के बंगले सजाने में किया गया. इस कर्ज का उपयोग 10 जनपथ की सुख सुविधाओं के लिए किया गया. हमारी सरकार कर्ज़ का सदुपयोग करती है. किसी भी अर्थव्यवस्था को सुधार करने के लिए यदि कर्ज़ लेकर जन उपयोगी कार्य में किया जाता है तो इसमें कोई गलती नहीं.




2 लाख 8 हजार करोड़ का कर्ज़
कर्ज़ लेने का ये पिछले साल अप्रैल से लेकर अब तक 18वां मौका है. इससे पहले 20 दिसंबर को 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज खुले बाजार से लिया गया था. बीजेपी सरकार अपने 10 माह के कार्यकाल में 17,500 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है. इस तरह मप्र सरकार पर कुल कर्ज का बोझ 2 लाख 8 हजार करोड़ रुपए हो चुका है. सरकार मार्च 2021 तक 1373 करोड़ रुपए का कर्ज और ले सकती है. वित्त विभाग ने 1 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. मध्य प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार ने एक माह पहले खुले बाजार से 2,373 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दे दी है. हर साल राजस्व में 10 से 12% की वृद्धि की जाती है, लेकिन मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 7 हजार करोड़ रुपए कम राजस्व मिला है. इसी तरह केंद्र से जीएसटी में राज्य की हिस्सेदारी का 6900 करोड़ रुपए कम मिला है.
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