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आदिवासियों के बाद अब MP के लाखों छोटे-सीमांत किसानों को भी साहूकारों के कर्ज से मिलेगी आजादी

कैबिनेट की बैठक बिल काे मंजूरी दी गई।
कैबिनेट की बैठक बिल काे मंजूरी दी गई।

ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक-2020 के मसौदे को शिवराज कैबिनेट ने दिखाई हरी झंडी. 15 अगस्त 2020 तक लिया गया कर्ज और ब्याज दोनों गैरकानूनी घोषित होंगे. किसान को न तो कर्ज चुकाना पड़ेगा, न कोई वसूल सकेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 6:31 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार (Shivraj Singh Government) ने वर्षों से गैर लायसेंसी साहूकारों (Non licensee moneylenders) के कर्ज में फंसे लाखों भूमिहीन, सीमांत और छोटे किसानों के हक में बड़ा फैसला किया है. इस फैसले के बाद इन छोटे, गरीब किसानों का करोड़ों रुपए का कर्ज माफ हो जाएगा. इसके लिए राज्य कैबिनेट ने मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक-2020 (Madhya Pradesh Rural Debt Release Bill-2020) के मसौदे पर अपनी मुहर लगा दी है. इस कानून के बनते और लागू होते ही 15 अगस्त 2020 तक गैर लायसेंसी साहूकारी से लिया गया कर्ज और ब्याज (Debt and interest) दोनों गैरकानूनी (Illegal) घोषित हो जाएंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि किसान को ना तो कर्ज की यह राशि चुकानी होगी, ना ही कोई उससे यह रकम वसूल कर सकेगा.

बता दें कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक करोड़ से ज्यादा खाताधारक किसान है, जिनमें से 67 फीसदी भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसान हैं. मंगलवार को शिवराज कैबिनेट की इस बैठक में संबंधित विधेयक को मंजूरी देते हुए बताया गया कि इस फैसले से लाखों किसानों का करोड़ों का कर्ज माफ हो जाएगा. इससे पहले 89 अधिसूचित क्षेत्रों में रहने वाले राज्य के लाखों आदिवासियों का कर्ज माफी का कानून प्रदेश में सरकार लागू कर चुकी है. अब छोटे, गरीब किसानों के लिए नया अधिनियम वरदान साबित होगा. गौरतलब है कि प्रदेश में एक करोड़ से ज्यादा खातेदार किसानों में से 67 प्रतिशत किसान लघु और सीमांत हैं, जिन्हें इसका फायदा मिलने वाला है.





कब लागू होगा यह विधेयक
राज्य के राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक पहले ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक पर राज्यपाल की मुहर के बाद उसे राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां से पारित होते ही विधेयक कानून बनकर लागू कर दिया जाएगा.

क्या है विधेयक में
-यदि कोई गैस लाइसेंसी साहूकार इस विधेयक का उल्लंघन करता है, तो उसके लिए 3 साल की सजा और 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है.
-इतना ही नहीं, सिविल न्यायालय में गैर अधिनियम के दायरे में आने वाले प्रकरण की सुनवाई नहीं होगी.
-ऋण वसूली के लिए राजस्व प्रक्रिया के तहत चल रही कार्रवाई भी समाप्त हो जाएगी.

इन किसानों को मिलेगा लाभ
राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया, विधेयक लागू होने से तीन श्रेणी के किसानों को इसका लाभ मिलेगा. पहला- भूमिहीन कृषि श्रमिक, जिनके पास जमीन नहीं है और वे अन्य किसी के खेत में मजदूरी करते हैं या बटाई पर खेती करते हैं. दूसरा- सीमांत किसान, जिनके पास आधा हेक्टेयर सिंचित या 1 हेक्टेयर तक सिंचित जमीन है. तीसरा- छोटे किसान, जिनके पास 1 हेक्टेयर तक सिंचित या 2 हेक्टेयर तक असिंचित जमीन है. उन्होंने बताया कि इससे पहले अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित-जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को गैर लाइसेंसी साहूकारों से मुक्ति दिलाने का कानून लागू किया जा चुका है.
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