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EXCLUSIVE : व्यापम घोटाले में जिस IPS अफसर पर लगे थे एक्सल शीट में छेड़छाड़ के आरोप, उसे ही सौंप दी जांच

व्यापम के जरिए पीएमटी सहित कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में घोटाले के आरोप लगे थे.

व्यापम के जरिए पीएमटी सहित कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में घोटाले के आरोप लगे थे.

VYAPAM SCAM : तत्कालीन आईजी (IG) विपिन माहेश्वरी और तत्कालीन एएसपी दिलीप सोनी पर इंदौर थाने में व्यापम (VYAPAM SCAM) से जुड़ी एक्सल शीट में छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था. यह एक्सल शीट सिस्टम एनालिस्ट नितिन महेंद्र के कंप्यूटर से जब्त की गई थी. इस मामले में सवाल खड़े होने पर जांच इंदौर क्राइम ब्रांच के हाथ से छीनकर एसटीएफ को सौंप दी गयी थी.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम महा घोटाले (Vyapam Scam) का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल कर आ गया है. जिस IPS Officer पर व्यापम की एक्सेल शीट में छेड़छाड़ कर नाम बदलने के आरोप लगे थे, उसी अफसर को व्यापम की बड़ी संख्या में पेंडिंग शिकायतों की जांच दे दी गयी है. ज़ाहिर है सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं. कांग्रेस ने आपत्ति जताई तो बीजेपी तिलमिला गयी. वो अब कह रही है कि कांग्रेस को किसी से दिक्कत है तो कोर्ट चली जाए.

शिवराज सरकार के दौरान हुए व्यापम घोटाले ने एमपी की राजनीति में भू चाल ला दिया था. उसके बाद इस केस से जुड़े कई लोगों की एक के बाद एक हुई मौत ने तो सरकार पर सवाल खड़े कर दिये थे. काफी बवाल मचने पर एसटीएफ के बाद केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी थी.

सत्ता बदल में फेरबदल
15 साल बाद प्रदेश में सत्ता बदलने पर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार पावर में आयी और उसने सीबीआई जांच के साथ व्यापम घोटाले की जांच रिओपन कर दी थी. एसटीएफ का सीबीआई की जांच में किसी तरीके का दखल नहीं था. एसटीएफ सिर्फ व्यापम की 197 पेंडिंग शिकायतों की जांच कर रहा था. इस मामले में कमलनाथ सरकार के दौरान 16 FIR भी दर्ज की गईं. लेकिन प्रदेश में 15 महीने बाद फिर सत्ता बदल गयी और बीजेपी सरकार बनते ही यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. जांच और FIR की गति धीमी पड़ गई. जबकि उस समय इन शिकायतों में करीब 100 FIR दर्ज की जानी थी.

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एडीजी विपिन माहेश्वरी पर एतराज
अब फिर एक बार इस मामले में एसटीएफ के चीफ एडीजी विपिन माहेश्वरी को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि व्यापम घोटाले में बीजेपी सरकार ने अपने लोगों को बचाने के लिए ऐसे IPS अफसर को पेंडिंग शिकायतों की जांच सौंपी, जिस पर शुरुआती दौर से ही व्यापम से जुड़ी महत्वपूर्ण एक्सल शीट में छेड़छाड़ करने के आरोप लगे थे. कांग्रेस सवाल कर रही है कि उनकी सरकार में पेंडिंग शिकायतों की तेजी से जांच और 3 महीने में 16 FIR करने वाले एसटीएफ चीफ एडीजी अशोक अवस्थी और एडिशनल एसपी राजेश सिंह भदौरिया को हटाकर विपिन महेश्वरी को जांच की कमान क्यों दी गई.

तब इंदौर IG थे माहेश्वरी
तत्कालीन आईजी विपिन माहेश्वरी और तत्कालीन एएसपी दिलीप सोनी पर इंदौर थाने में व्यापम से जुड़ी एक्सल शीट में छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था. यह एक्सल शीट सिस्टम एनालिस्ट नितिन महेंद्र के कंप्यूटर से जब्त की गई थी. इस मामले में सवाल खड़े होने पर जांच इंदौर क्राइम ब्रांच के हाथ से छीनकर एसटीएफ को सौंप दी गयी थी. एसटीएफ ने लंबे समय तक जांच की, लेकिन उसकी जांच पर भी सवाल खड़े होने लगे. इस पर जमकर बवाल कटने पर सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी.

शिवराज सरकार में डेढ़ साल में सिर्फ एक FIR
वर्तमान में बीजेपी सरकार ने आईपीएस अफसर विपिन महेश्वरी को फिर व्यापम की पेंडिंग शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी दे दी है. बस इसी से कांग्रेस नाराज है कि जिस अफसर पर आरोप लगे उसे ही क्यों जांच दे गयी. कमलनाथ सरकार में पेंडिंग शिकायतों में 16 एफआईआर दर्ज की गई थीं.लेकिन सत्ता में आते ही बीजेपी ने सबसे पहले इस केस की जांच करने वाले एसटीएफ अफसरों एडीजी अशोक अवस्थी और एएसपी राजेश सिंह भदौरिया को हटा दिया. यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. और तब से लेकर अब तक करीब डेढ़ साल में बीजेपी सरकार में सिर्फ एक ही FIR दर्ज हो सकी है.

बीजेपी का गैर जिम्मेदाराना बयान
कांग्रेस के आरोपों और सवाल उठाने पर बीजेपी ने कहा कांग्रेस ने अभी तक जितने भी आरोप लगाए सभी झूठे साबित हुए. यदि अभी भी कोई कांग्रेस को दिक्कत या परेशानी है तो वह अपना हलफनामा कोर्ट में पेश कर सकती है.

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