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कांग्रेस जिला प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद : सवर्णों का बोलबाला, आदिवासियों को नहीं मिली जगह

पीसीसी चीफ कमलनाथ ने गुरुवार को ही 52 जिलों के प्रभारियों की घोषणा की है. इनमें छिंदवाड़ा के लिए तीन प्रभारी नियुक्त किए गए हैं.

पीसीसी चीफ कमलनाथ ने गुरुवार को ही 52 जिलों के प्रभारियों की घोषणा की है. इनमें छिंदवाड़ा के लिए तीन प्रभारी नियुक्त किए गए हैं.

MPCC NEWS. एक दिन पहले ही कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के सभी 52 जिलों के लिए प्रभारी नियुक्त किए हैं. छिंदवाड़ा को तो इतनी तरजीह दी गयी है कि वहां तीन प्रभारी तैनात कर दिए गए हैं. अब इस नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. आदिवासियों को साधने के लिए कांग्रेस पार्टी बड़े ऐलान कर रही है. लेकिन 52 जिलों में बनाए गए प्रभारियों में आदिवासी चेहरों को जगह नहीं दी गयी है. जिला प्रभारी बनाने में कांग्रेस के नेता सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को अपनाना भूल गए. नवनियुक्ति प्रभारियों में सबसे ज्यादा ब्राह्मण चेहरों को पार्टी ने जगह दी है. करीब 20 ब्राह्मण नेता जिला प्रभारी बनाए गए हैं. आदिवासियों की तरह ही अनुसूचित जाति वर्ग को भी 52 जिलों के प्रभारियों में तवज्जो नहीं मिली.

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भोपाल. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 2023 के चुनाव के लिए सभी 52 जिलों में जिला प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं. लेकिन इस नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि इनमें से एक भी आदिवासी नहीं है. सबसे ज्यादा ब्राह्मण नेताओं को तरजीह दी गई है. सीधे-सीधे सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस सवर्णों की राजनीति कर रही है. दलित आदिवासी उसकी प्राथमिकता में नहीं हैं. ऐसे समय में जब बीजेपी अपना पूरा ध्यान आदिवासियों और दलितों पर लगाए है, कांग्रेस की ये चूक भारी पड़ सकती है.

कांग्रेस के इस रवैये पर बीजेपी ने बिना देरी किए निशाना साध दिया. बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कांग्रेस पार्टी ने जिला प्रभारी बनाने में महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की उपेक्षा की है. कांग्रेस पार्टी के पास चेहरों की कमी हो गई है. यही वजह है कि अब ढूंढे से उसे नेता नहीं मिल रहे हैं. दलित-आदिवासियों की उपेक्षा पर कांग्रेस ने अजीब तर्क दिया है. पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने कहा कि आगामी चुनाव के लिहाज से आदिवासी चेहरों को सूची में तवज्जो नहीं दी गई है लेकिन सह प्रभारियों की सूची में आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी.

कांग्रेस का अजीब तर्क
कांग्रेस के इस रवैए पर बीजेपी ने बिना देरी किए निशाना साध दिया. बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कांग्रेस पार्टी ने जिला प्रभारी बनाने में महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की उपेक्षा की है. कांग्रेस पार्टी के पास चेहरों की कमी हो गई है. यही वजह है कि अब ढूंढे से उसे नेता नहीं मिल रहे हैं. दलित-आदिवासियों की उपेक्षा पर कांग्रेस ने अजीब तर्क दिया है. पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर ने कहा आगामी चुनाव के लिहाज से आदिवासी चेहरों को सूची में तवज्जो नहीं दी गई है. लेकिन सह प्रभारियों की सूची में आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी.

विधानसभा चुनाव 2023 : कांग्रेस ने 15 महीने पहले नियुक्त किए जिला प्रभारी, छिंदवाड़ा में तीन को जिम्मा, देखें पूरी लिस्ट

लापरवाह बनी हुई है कांग्रेस
कुल मिलाकर 2023 के विधान सभा चुनाव में माना जा रहा है कि आदिवासी वोटर जिस पार्टी के पाले में जाएगा उसी की सरकार बनना तय है. बीजेपी लगातार आदिवासी राजनीति कर रही है. भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को रानी कमलापति नामकरण से लेकर इंदौर के टंटया भील स्टेशन तक हर जगह आदिवासी उसकी प्राथमिकता में हैं लेकिन कांग्रेस सब कुछ जानते समझते हुए भी लापरवाह बनी हुई है. जिला प्रभारी न बनाए जाने से पार्टी के अंदर ही आदिवासी नेताओं के बीच नाराजगी है. मतलब साफ है कि कांग्रेस जिला प्रभारी बनाने में आदिवासियों को जगह देने में चूक गई और अब यही प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है.

Tags: Kamal nath, Madhya Pradesh Congress, MPCC

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