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आज थमेगा निकाय चुनावों में प्रचार का शोर, अपने डुबो सकते हैं भाजपा की 'नैया'

भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय.
भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय.

मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के हो रहे चुनाव प्रचार का शोर बुधवार शाम को थम जाएगा. इस बार सत्ताधारी भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बने हैं उसके 'अपने'.

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मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के हो रहे चुनाव प्रचार का शोर बुधवार शाम को थम जाएगा. इस बार सत्ताधारी भाजपा के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बने हैं उसके 'अपने'. बताया जा रहा है कि करीब दो दर्जन ऐसे स्थानीय निकाय हैं, जहां भाजपा की चुनावी नैया उसके अपनों के चलते डूब सकती है. वजह है चुनावी मैदान में डटे पार्टी के बागी प्रत्याशी और गुटबाजी.

मध्यप्रदेश में 44 नगरीय निकायों के चुनाव में आपसी गुटबाजी और टिकट बंटवारे से उपजे असंतोष की वजह से सत्ताधारी भाजपा नेताओं की नींद उड़ गई है.  प्रदेश मुख्यालय को स्थानीय स्तर से जो गोपनीय फीड बैक मिला है उसके मुताबिक 22 से ज्यादा निकायों में बीजेपी की जीत आसान नहीं है. इसके लिए टिकट वितरण के बाद पनपा असंतोष, गुटबाजी और बागी प्रत्याशियों का मैदान में डटे रहना बड़ी वजह है. जिन जगहों पर कांटे की टक्कर है उनमें बैहर नगर पालिका, कोतमा,सारणी, सनावद, भीकनगांव, आठनेर, पेटलावद, मंडला, नैनपुर,छनैरा, मंडलेश्वर, थांदला, भाबरा, बिजुरी, शाहपुर, दमुआ और बम्हनी बाजार नगर परिषद प्रमुख तौर से शामिल हैं.

कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी बना रखी है चुनावों से दूरी
ज्यादातर स्थानीय निकाय आदिवासी बहुल जिलों में आते हैं. कभी कांग्रेस के परम्परागत वोटर रहे आदिवासी पंजे से दूर हो गए हैं. कांग्रेस पर इस चुनाव में अधिकांश निकायों में परचम लहराने की चुनौती है. लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी चुनावी मैदान में अकेले ही संघर्ष कर रहे हैं. बुलाने पर भी दिग्गज नेता नजर नहीं आ रहे हैं. पार्टी के बागी प्रत्याशियों ने भी उम्मीदवारों की नींद खराब कर रखी है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव से सीधे जुड़े प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में डटे बागियों को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है. प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी संगठन महामंत्री चन्द्रिका प्रसाद द्विवेदी का कहना है कि चुनावों में बीजेपी की गुटबाजी, असंतोष और आपसी लड़ाई का फायदा पार्टी प्रत्याशियों को मिलना तय है.
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