भोपाल में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, मुस्लिम युवकों ने ईद के रोज कराया वृद्धा का अंतिम संस्कार

मुस्लिम युवकों ने महिला का अंतिम संस्कार कराया.

मुस्लिम युवकों ने महिला का अंतिम संस्कार कराया.

जब वृद्धा की मौत की जानकारी मुस्लिम युवकों को लगी. तो उन्होंने मजहबी सरहदों को पार कर छोला विश्रामघाट में महिला का अंतिम संस्कार कराया. इन मुस्लिम युवकों ने एंबुलेंस से लेकर दाह संस्कार तक का खर्च भी उठाया.

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भोपाल. भोपाल (Bhopal) में कुछ मुस्लिम युवकों (Muslim youth) ने शुक्रवार को ईद (Eid) के मुबारक मौके पर गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण पेश किया. उन्होंने 80 साल की एक महिला के अंतिम संस्कार में उसके इकलौते बेटे की मदद की. उन्होंने महिला की लाश श्मसान तक ले जाने के लिए एंबुलेंस का भी इंतजाम किया.

मामला मुस्लिम बहुल क्षेत्र का

मामला राजधानी भोपाल के कोहफिजा क्षेत्र का है. दरअसल, यह इलाका मुस्लिम बहुल है. इस क्षेत्र में सुबह से ही ईंद की तैयारियां जोरों पर थीं. तभी मूलरूप से छतीसगढ़ की रहने वाली सुंदरिया बाई (80) की मौत बीमारी की वजह से हो गई. वह अपने एकलौते बेटे के साथ कोहफिजा इलाके में एक झोपड़ी बनाकर रहती थी. उसका बेटा मजदूरी कर जीवन-यापन के साधन जुटाता है.

कोरोना के कारण नहीं जुटे लोग
कोरोना की वजह से उपजी स्थिति की वजह से इस महिला के लिए चार लोग भी न जुट सके. लेकिन जब वृद्धा की मौत की जानकारी मुस्लिम युवकों को लगी. तो उन्होंने मजहबी सरहदों को पार कर छोला विश्रामघाट में महिला का अंतिम संस्कार कराया. इन मुस्लिम युवकों ने एंबुलेंस से लेकर दाह संस्कार तक का खर्च भी उठाया. हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया.

'दुनिया की सबसे बड़ी मजहब इंसानियत'

महिला को कंधा देने वाले सद्दाम के मुताबिक, मजहब हमेशा यही सिखाता है कि दूसरों की हर स्थिति में मदद की जाए. फिर वह हिंदू परिवार हो या मुस्लिम. ईद के ही दिन किसी के दर्द में शामिल होकर, उसकी मदद कर हमने ऊपर वाले की इबादत की है. वहीं, नहीन खान ने बताया कि दुनिया का सबसे बड़ा मजहब इंसानियत है, जिसे हमने निभाने की कोशिश की है.

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