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नवरात्रि 2019 : देवी के इस मंदिर में भक्त चढ़ाते हैं सैंडिल्स, फ्रॉक और रंग-बिरंगे चश्मे

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 7, 2019, 5:39 PM IST
नवरात्रि 2019 : देवी के इस मंदिर में भक्त चढ़ाते हैं सैंडिल्स, फ्रॉक और रंग-बिरंगे चश्मे
इस मंदिर में देवी का बाल स्वरूप है

पहाड़ा वाली देवी मंदिर को जीजी बाई का मंदिर भी कहा जाता है.कहते हैं श्रृंगार करने के बाद मां के चेहरे से अपने आप पता चल जाता है कि मां खुश हैं या नहीं.अगर ड्रेस,फ्रॉक,घड़ी,हैयरबैंड,सैंडिल्स पहनकर मां के चेहरे पर खुशी दिखाई नहीं देती है तो नए सिरे से उनका दोबारा श्रृंगार किया जाता है

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भोपाल.देवी मंदिरों (Devi temple)में मान्यताओं को लेकर तो आपने बहुत सी कहानियां सुनी होंगी,लेकिन भोपाल (bhopal)में एक ऐसा मंदिर है जहां मन्नत मानकर भक्त देवी के चरणों में चप्पल चढ़ाते हैं. बाल स्वरूप में बैठी देवी के भक्त देश-विदेश उनके लिए सैंडिल, चश्मे और फ्रॉक भेजते हैं.

मां पहाड़ा देवी
भोपाल के कोलार इलाके में मां पहाड़ा देवी का मंदिर है. जैसा कि नाम से ज़ाहिर है कि ये मंदिर पहाड़ी पर बना है. यहां दुर्गा देवी बालरूप में विराजित हैं. इस मंदिर में लोग देवी को बेटी स्वरूप में पूजते हैं. मंदिर करीब तीन एकड़ में फैला है. यहां आने वाले भक्त चढ़ावे के तौर पर चप्पल लेकर पहुंचते हैं और देवी के चरणों में अर्पित करते हैं. भक्त मन्नत पूरी होने पर भी चप्पल ही यहां चढ़ाते हैं.
फ्रॉक-चश्मे और सैंडिल

देवी क्योंकि यहां बाल स्वरूप में हैं इसलिए लोग फ्रॉक,चश्मे, सैंडिल्स के साथ वो सारी चीजें चढ़ाते हैं जो बच्चों को पसंद हैं.बालरूप में मां के नखरे भी बच्चों की तरह ही हैं. उनका श्रृंगार भी बच्चों की तरह ही किया जाता है. हर रंग की फ्रॉक चढ़ाई जाती हैं और फ्रॉक के साथ मैंचिंग हेयरबैंड,कलरफुल चश्मा भी मां को अर्पित किया जाता है. उसके बाद ड्रेस से मैंचिंग करते हुए सैंडिल्स पहनाएं जाते हैं.
विदेश से आती हैं फ्रॉक
मां पहाड़ा वाली मंदिर में नवरात्रि के नौ दिन तक ख़ास श्रृंगार होता है.नौ दिन सुबह-शाम अलग-अलग ड्रेसेस पहनाई जाती हैं. मां के भक्त विदेशों में भी हैं. नवरात्रि पर वो वहां से फ्रॉक,हैयरबैंड,चश्मे औऱ सैडिल्स भेजते हैं.दुंबई से लेकर मुंबई तक से फ्लाइट से नवरात्रि में मां के लिए चढ़ावा आता है.
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जीजी बाई का मंदिर
पहाड़ा वाली देवी मंदिर को जीजी बाई का मंदिर भी कहा जाता है.कहते हैं श्रृंगार करने के बाद मां के चेहरे से अपने आप पता चल जाता है कि मां खुश हैं या नहीं.अगर ड्रेस,फ्रॉक,घड़ी,हैयरबैंड,सैंडिल्स पहनकर मां के चेहरे पर खुशी दिखाई नहीं देती है तो नए सिरे से उनका दोबारा श्रृंगार किया जाता है.दिन में तीन से चार बार भी मां की खुशी के हिसाब से ही श्रृंगार किया जाता है.

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First published: October 7, 2019, 5:38 PM IST
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