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एमपी चुनाव: वोटिंग से पहले नक्सल मूवमेंट ने बढ़ाई टेंशन

File Photo

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कुछ दिनों पहले बालाघाट जिले में हॉक फोर्स की सर्चिंग पार्टी को करीब दस नक्सली दिखाई दिए. हॉक फोर्स के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ भी हुई.

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मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले नक्सलियों के मूवमेंट ने सुरक्षा बलों की टेंशन बढ़ा दी है. वोटिंग को लेकर नक्सल प्रभावित जिलों में हाई अलर्ट किया गया है. संवेदनशील बूथों के साथ वोटर्स की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है. (इसे पढ़ें- भीमा कोरेगांव हिंसा: दिग्विजय सिंह बोले- बीजेपी और RSS मुझसे डरते हैं)

दरअसल, कुछ दिनों पहले बालाघाट जिले में हॉक फोर्स की सर्चिंग पार्टी को करीब दस नक्सली दिखाई दिए. हॉक फोर्स के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ भी हुई. नक्सली पुलिस के चकमा देकर भाग निकले. नक्सलियों के इस मूवमेंट ने सुरक्षा बलों के होश उड़ा दिए हैं. इससे पहले भी बीते कुछ महीनों में कई बार बालाघाट जिले में नक्सली मूवमेंट देखा गया था. कई नक्सली पकड़े भी गए थे.

-जुलाई : बालाघाट में देवरबेली के जंगल में हॉक फोर्स और नक्सलियों के बीच मुठभेड़. छत्तीसगढ़ में 3 लाख और मप्र में 1 लाख का ईनामी नक्सली गिरफ्तार
-फरवरी : मप्र और छग की संयुक्त टीम ने सर्चिंग के दौरान राजनांदगांव के समीप लक्ष्माटोला और गोला के बीच 17 लाख के इनामी 2 नक्सली को मुठभेड़ के बाद मार गिराया था.
-मई : बालाघाट के लांजी थाना इलाके से 5 और बिरसा थाना क्षेत्र से 6 नक्सलियों को गिरफ्तार किया था. इन 11 नक्सलियों के पास से नक्सली साहित्य और हथियार मिले थे.
-17 नवंबर : बड़गांव में सर्चिंग के दौरान नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई थी. दोनों तरफ से फायरिंग की खबर भी थी. घने जंगल होने की वजह से नक्सली अपने खाने-पीने का सामान छोड़कर फरार हो गए थे.

छत्तीसगढ़ में मतदान के दौरान नक्सलियों ने छुटपुट घटनाओं को अंजाम दिया था. यही कोशिश मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में की जा रही है. मध्यप्रदेश में घटनाओं और गतिविधियों के मद्देनजर 8 जिलों को नक्सल प्रभावित मना जाता है. इनमें बालाघाट, सीधी, सिंगरौली, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया शामिल है. बालाघाट के बाद मंडला और सिंगरौली में सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित माना गया है. हालांकि, केंद्र की लिस्ट में केवल बालाघाट को ही नक्सल प्रभावित जिले का दर्जा दिया गया है.

बालाघाट में बढ़ते नक्सली मूवमेंट की वजह से हाई अलर्ट है. प्रभावित जिलों के संभावित पोलिंग बूथों पर सुरक्षा का कड़ा पहरा है. इतना ही नहीं मतदान प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों की सुरक्षा को पुख्ता किया गया है.

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