नक्सलियों के स्लीपर सेल्स का गढ़ बना एमपी, बड़ी साजिश को दे सकते हैं अंजाम

छत्तीसगढ़ में हुए हमले के बाद नक्सलियों का बड़ा मूवमेंट एमपी में नजर आ रहा है. नक्सली स्लीपर सेल के जरिए किसी बड़ी साजिश की फिराक में हैं

Manoj Rathore | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 10, 2018, 8:19 AM IST
नक्सलियों के स्लीपर सेल्स का गढ़ बना एमपी, बड़ी साजिश को दे सकते हैं अंजाम
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Manoj Rathore | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: March 10, 2018, 8:19 AM IST
मध्यप्रदेश में एक बार फिर नक्सलियों ने अपनी ताकत बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है. नक्सल प्रभावित जिलों में भले ही छुटपुट घटनाएं हुईं हो, लेकिन मध्य प्रदेश नक्सलियों के स्लीपर सेल का अड्डा बनता जा रहा है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में हुए हमले के बाद नक्सलियों का बड़ा मूवमेंट एमपी में नजर आ रहा है. नक्सली स्लीपर सेल के जरिए किसी बड़ी साजिश की फिराक में हैं.

एमपी में पहले से सक्रिय नक्सलियों के विस्तार दलम ने अपनी तादाद को बढ़ाना शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसर विस्तार दलम की ताकत को बढ़ाने के लिए दो नई प्लाटून बनाई है. सेंट्रल कमेटी ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम से तैयार प्लाटून-2 और प्लाटून -3 को बालाघाट के सीमावर्ती इलाके से लगे मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया जिले में सक्रिय किया है.

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के बॉर्डर एरिया में लगातार सर्चिंग से दबाव बढ़ने की वजह से नक्सलियों ने नया रास्ता अख्तियार किया है. अब बालाघाट में नहीं नक्सली मंडला, डिंडौरी और अमरकंटक के जंगलों में ठिकाने तलाश रहे हैं.

500 गांवों को बनाया टारगेट 

नक्सलियों ने बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया के जंगलों में 500 गांवों को चिन्हित किया है. गांवों में नक्सली ग्रामीणों का हितैषी बताकर स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं. प्लाटून-2 ने बालाघाट, मंडला, डिंडौरी क्षेत्र के 100 गांवों के लिए नक्सली कोड तैयार किया है. प्लाटून-3 ने छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, मंडला, उमरिया के 100 गांवों का नक्सली कोड तैयार किया है.

नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के लिए भी बालाघाट सेंटर प्वाइंट बनाया गया है. महाराष्ट्र और छग सीमा से लगे इलाकों में सक्रिय मलाजखंड, दलम, तांडा दलम और गढ़चिरौली में सेंट्रल कमेटी ने नक्सलियों की संख्या बढाई है. देवरी दलम से कुछ सदस्य भी यहां शामिल हुए हैं. यहां भले ही नक्सलियों ने कोई बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दिया हो, लेकिन प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों में अपनी स्लीपर सेल तैयार कर नक्सली किसी बड़ी साजिश की प्लानिंग में हैं.

बताया जाता है प्रदेश में पनाह लेकर नक्सली आराम से अपनी घटनाओं को अंजाम देने का मास्टर प्लान तैयार करते हैं. छत्तीसगढ़ में हो रहे पुलिस के हमलों में आए दिन नक्सली मारे जा रहे हैं. ऐसे में नक्सलियों के लिए मध्य प्रदेश ही सबसे सुरक्षित स्थान है.
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सूत्रों पर यकीन करें, तो छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के कबीरधाम से नक्सली गढ़ी मुक्की होते हुए सूपखार के जंगल से सीधे मंडला की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं. यहां से उनका टारगेट मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया से सीधे सिंगरौली तक रोडमैपिंग करने का है. इसके जरिए इन जंगलों में अपनी ताकत बढ़ाने, ओडिशा, झारखंड, आंध्रा से सीधे नई भर्ती कर तादाद बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं.

मंडला जिले के मोतीनाला थाना क्षेत्र, जिसका अधिकांश हिस्सा कान्हा नेशनल पार्क में आता है, वहां भी नक्सलियां का मूवमेंट बताया जा रहा है. विस्तार दलम में स्पेशल फोर्स के लिए प्लाटून-2 और प्लाटून- 3 में 25-25 सदस्यों को शामिल किया गया है.

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First published: March 9, 2018, 7:49 PM IST
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