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सत्ता हाथ से ना निकल जाए, इसलिए शिवराज का है ये नया एक्शन प्लान

शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)

शिवराज अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. इसी कड़ी में अगले महीने सीएम शिवराज सिंह अफसरों की बड़ी बैठक लेने जा रहे हैं

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मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि जो हाल 2003 में दिग्विजय सरकार का हुआ वो 2018 में इस सरकार का हो जाए. शायद यही वजह है कि सीएम अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. इसी कड़ी में अगले महीने सीएम शिवराज सिंह अफसरों की बड़ी बैठक लेने जा रहे हैं, जिसमें सीएम फेलोज़, जनअभियान परिषद, सोशल मीडिया टीम से फीडबैक लेकर रणनीति बनाने का काम किया जा रहा है. 2017 में एक साल के लिए बनाए गए सीएम फेलोज इसी मीटिंग में अपनी रिपोर्ट भी पेश करेंगे.

दरअसल, साल 2003 में हार के बाद दिग्विजय सिंह और कांग्रेस सरकार ने ये स्वीकार किया था कि उन्हें जमीनी हकीकत का सही फीडबैक नहीं मिला. लेकिन ये गलती इस सरकार में न हो इसका सीएम पहले से ही ख्याल रख रहे हैं. यही वजह है कि ठीक एक साल पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने सीएम फेलो बनाए थे. अब अगले महीने सीएम अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं की ज़मीनी हकीकत जानेंगे.

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एक साल के लिए बनाए गए सीएम फेलोज अगले महीने अपनी रिपोर्ट सीएम को देने जा रहे हैं. सितंबर 2017 में सीएम फेलोज की नियुक्ति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और उनकी मॉनीटरिंग के लिए की गई थी. अब एक साल पूरा होने के बाद सीएम रिपोर्ट लेंगे और उसी हिसाब से आगामी रणनीति तय की जाएगी. इनके अलावा जनअभियान परिषद औऱ सोशल मीडिया टीम से भी फीडबैक लिया जा रहा है.

क्या हैं सीएम फेलोज?
1- चीफ मिनिस्टर यंग प्रोफशनल्स फॉर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत एक साल के लिए सीएम फेलोज़ की नियुक्ति की गई थी.
2- सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में सीएम फेलोज़ के रुप में 51 रिसर्च एसोसिएट्स की नियुक्ति की थी. इनका साल भर का पैकेज औसतन साढ़े पांच लाख था.
3- सीएम फेलो आईआईटी, एनआईटी, लॉ ग्रेजुएट्स, टीआईएस जैसे बड़े संस्थानों से पास आउट और डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं की एक टीम है. जो प्रदेश के जिलों में तैनात रहकर सीएम सचिवालय को डायरेक्ट फीडबैक दे रही है.
4- ये फेलोज़ सीएम की योजनाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी की भी योजनाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं.
5- सीएम ने सरकार के 18 विभागों पर जोर दिया था जिनमें कृषि, ग्रामीण विकास, आदिवासी विकास, उद्योग और वाणिज्य, राजस्व, स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, ऊर्जा, गृह, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगरीय प्रशासन, पर्यावरण, वन, परिवहन, जल संरक्षण विभाग शामिल हैं.
6- मध्यप्रदेश से पहले गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली समेत केंद्र सरकार ने भी ये सिस्टम लागू किया था जिसके अच्छे परिणाम सामने आए. क्योंकि सरकार में बैठे अधिकारी जो रिपोर्ट देते हैं उसमें ऐसा लगता है कि सबकुछ बढ़िया चल रहा है जबकि जमीनी हकीकत अलग होती है.
7- सीएम शिवराज सिंह चौहान की असल वजह ये थी कि वो जानना चाहते थे कि सरकार की योजनाएं जनता तक किस रुप में पहुंच रहीं हैं और इसका कितना लाभ लोगों को मिल रहा है.
8- इन प्रोफेशनल्स के अलावा प्रदेश की 23 हज़ार ग्राम पंचायतों में 1.5 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता फीडबैक लेने का काम कर रहे हैं. जबकि शहरी इलाकों में इनकी संख्या करीब 30 हज़ार है.
9- ये सीएम फेलोज़ भावांतर, संबल, सरल, उज्ज्वला जैसी तमाम योजनाओं का फीडबैक ले रहे हैं.

सत्ताधारी दल के मुताबिक पार्टी हो या फिर सरकार दोनों ही ज़मीनी हकीकत जानने के लिए सर्वे करवाती हैं. इसी के आधार पर आगामी चुनावों की रणनीति तैयार की जाती है. ऐसे में सीएम फेलोज़ से रिपोर्ट लेकर सरकार भी यही काम करेगी. वहीं कांग्रेस का कहना है कि सरकार जितनी रिपोर्ट बना लें लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि सरकारी योजनाओं का फायदा जनता को नहीं मिल पा रहा. जनता से सरकार नाराज है.

भावांतर भुगतान योजना, संबल योजना, सरल योजना, उज्ज्वला योजना, ये वो सारी योजनाएं हैं जिनका फीडबैक लिया जा रहा है. अब रिपोर्ट पॉज़िटिव होने पर भी क्या सरकार जनता को खुश मानेगी या फिर सर्वे के सर्वे की जरुरत है.

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