अखबार मालिक प्यारे मियां और पुलिस अधिकारियों के बीच मिलीभगत! थाने में आने के बाद भी नहीं किया गिरफ्तार
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अखबार मालिक प्यारे मियां और पुलिस अधिकारियों के बीच मिलीभगत! थाने में आने के बाद भी नहीं किया गिरफ्तार
रातीबड़ थाने में 12 घंटे बाद एफआईआर दर्ज क्यों की गई?

राजबाला आयोग की सदस्य अमिता जैन (Amita Jain) ने बताया कि गौरवी सेंटर में पीड़ित लड़कियों से बातचीत की गई है. लड़कियों ने जो बातें बताई हैं उससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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भोपाल. भोपाल (Bhopal) में नाबालिक लड़कियों से रेप के मामले में अखबार मालिक प्यारे मियां (Pyare miyan) के साथ पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत की खबर सामने आ रही है. लड़कियों को पकड़ने के बाद जब पुलिस उन्हें थाने ले कर आई थी तो उस दौरान आरोपी अखबार मालिक प्यारे मियां भी थाने पहुंचा था. आरोपी ने उन्हें अपनी नाती- पोती बताया था और उन्हें छुड़ाने के लिए पुलिस से कह रहा था. उसने पुलिस को अपनी पत्रकारिता का रौव दिखाया और धमकाया भी. इस दौरान पुलिस (Police) को यह बात पता चल गई थी कि प्यारे मियां लड़कियों को पार्टी में लेकर गया था. इसके बावजूद भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया और आरोपी को भगाने में मदद की.

इसके अलावा आरोपी प्यारे मियां रातीबड़ थाने स्थित एक फार्महाउस में लड़कियों को लेकर पार्टी में गया था. वहां पर कई रसूखदार शामिल थे. इसके बाद वह लड़कियों को लेकर शाहपुरा स्थित अपने फ्लैट गया था. हालांकि, पुलिस ने रसूखदार को बचाने के लिए रातीबड़ में हुई पार्टी को जांच में नहीं लिया. इन तमाम बातों का खुलासा बाल आयोग की टीम जब गौरवी सेंटर में लड़कियों से बातचीत कर रही थी तब हुआ.  यह जानकारी भी मिली है कि प्यारे मियां लड़कियों को साथ लेकर बैंकॉक, दुबई, थाइलैंड, यूके और स्विट्जरलैंड भी जाता था.

पीड़ित लड़कियों से बातचीत की गई
राजबाला आयोग की सदस्य अमिता जैन ने बताया कि गौरवी सेंटर में पीड़ित लड़कियों से बातचीत की गई है. लड़कियों ने जो बातें बताई हैं उससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पुलिस ईमानदारी से काम करती तो आरोपी गिरफ्तार हो जाता. उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन आरोपी प्यारे मियां अपनी कार से लड़कियों के पीछे- पीछे आ रहा था. जब पुलिस ने लड़कियों को पकड़ा उस दौरान प्यारे मियां ने पुलिस से बातचीत करते हुए दबाव बनाया.
इसके बाद अगले दिन फिर आरोपी प्यारे मियां लड़कियों के परिजन को लेकर थाने पहुंचा और लड़कियों को छुड़ाने की बात कहने लगा. इस दौरान उसने पुलिस को धमकाया भी. पुलिस को यह बात पता था कि प्यारे मियां ने लड़कियों के साथ गलत काम किया है. इसके बावजूद भी पुलिस ने उसे जाने दिया. आयोग के सदस्य बृजेश चौहान ने बताया कि पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसलिए अब पुलिस की भूमिका की जांच के लिए डीजीपी को शिकायत की जाएगी. यह मामला काफी बड़ा है और इसमें कई लोग शामिल है. पुलिस को निष्पक्ष जांच करना चाहिए. बाल आयोग अब लड़कियों को काउंसलर उपलब्ध कराएगी.


एडीजी से लेकर इंस्पेक्टर तक पर उठे सवाल?
रातीबड़ थाने में 12 घंटे बाद एफआईआर दर्ज क्यों की गई? बच्चियों को चाइल्ड लाइन को सौंपने से पहले महिला पुलिस अधिकारियों की मदद क्यों नहीं ली गई? घटना के तत्काल बाद आरोपी को लेकर क्यों नहीं वायरलेस सेट पर मैसेज और बेरिकेटिंग की गई? घटनास्थल फ्लैट था या फिर रातीबड़ स्थित फॉर्म हाउस? प्यारे मियां की पार्टी में शामिल रसूखदारों को क्यों बचा रही पुलिस? क्या लड़कियों के साथ रसूखदारों को पुलिस ने रंगे हाथों पकड़ा था? पुलिस को आरोपी की दो कार मिली, लेकिन क्यों नहीं आरोपी का सुराग मिला? क्या आरोपी अखबार मालिक प्यारे मियां को भगाने में पुलिस के कर्मचारियों और अधिकारियों का हाथ है?

पुलिस की मिलीभगत से हुए फरार
बाल आयोग से बातचीत के दौरान पीड़ित लड़कियों ने कई बड़े खुलासे किए हैं. पांचों लड़कियों को रातीबड़ थाने छुड़ाने के लिए आरोपी प्यारे मियां पहुंचा था. प्यारे मियां ने थाना पुलिस और बच्चियों को धमकाया था. रातीबड़ स्थित एक फार्महाउस में लड़कियों को लेकर प्यारे मियां पहुंचा था. फार्महाउस में पार्टी करने के बाद लड़कियों को लेकर अपने शाहपुरा स्थित फ्लैट गया था. प्यारे मियां लड़कियों को साथ लेकर बैंकॉक, दुबई, थाइलैंड, यूके और स्विट्जरलैंड भी जाता था. बाल आयोग पुलिस की भूमिका को लेकर डीजीपी से शिकायत करेगा.
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