सुर्खियां: कर्जमाफी के चार मॉडल, खर्च करने होंगे 20 हजार करोड़
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सुर्खियां: कर्जमाफी के चार मॉडल, खर्च करने होंगे 20 हजार करोड़
फोटो क्रेडिट कमलनाथ का फेसबुक पेज

Madhya Pradesh Elections: बाकी मंत्रियों को अभी इंतजार करना होगा. प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्रालयों के बटवारें पर अपनी बात नहीं पाई है

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मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे कमलनाथ 17 दिसंबर को शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह में सिर्फ कमलनाथ ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बाकी मंत्रियों को अभी इंतजार करना होगा. प्राप्त जानकारी के अनुसार मंत्रालयों के बटवारें पर अपनी बात नहीं पाई है. ऐसे में नए मंत्रिमंडल की शपथ बाद में होगी. कमलनाथ दोपहर 1:30 बजे भेल के जंबूरी मैदान पर मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. उधर भोपाल स्थित भेल के जंबूरी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं.

दैनिक भास्कर लिखता है, 'कर्जमाफी के चार मॉडल, खर्च करने होंगे 20 हजार करोड़'. इसमें जिक्र है कि कांग्रेस शपथ ग्रहण समारोह के साथ साथ चुनावी वचन पत्र के दो महत्वपूर्ण वादे पूरे करने की तैयारी भी कर रही है. अफसरों ने कर्जमाफी और बेरोजगारी भत्ते पर अलग-अलग मॉडल का अध्ययन किया और ड्राफ्ट तैयार किया. इस ड्राफ्ट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विचार कर लेंगे.

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अखबार ने सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए दिल्ली में लामबंद हुए नेताओं के हवाले से भी खबर लिखा है कि कमलनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सियासत तेज हो गई है. चुनाव अभियान समिति के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में 20 से अधिक विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है.
भय्यू महाराज की यह खबर भी ध्यान खींचती है जिसमें जिक्र है कि भय्यू महाराज कई नंबरों से युवती से बात करते थे. भय्यू महाराज ढाई लाख रुपए महीने के लिए ब्लैकमेल करने वाली युवती से आधा दर्जन मोबाइल नंबरों से बात करते थे. वे कई बार अपने सेवादार शरद देशमुख के मोबाइल से कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से भी उससे बात करते थे.

नईदुनिया लिखता है, 'कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगी सोनिया व प्रियंका' इस खबर में जिक्र है कि भोपाल में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में सोनिया गांधी के सात प्रियंका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे.

दैनिक जागरण का एक शीर्षक अपनी ओर ध्यान खींचता है जिसमें लिखा है, '15 साल बाद सत्ता में वापसी के साथ चुनातियों का अंबार'. इसमें जिक्र है कि कमलनाथ ने प्रदेश में कांग्रेस का वनवास खत्म तो कर दिया है लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के वचन पत्र की मुख्य घोषणाओं को पूरा करना होगा.

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