फीस नहीं भर पाने की सजा, 9वीं की छात्रा ने तीन घंटे खड़े होकर दी परीक्षा
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फीस नहीं भर पाने की सजा, 9वीं की छात्रा ने तीन घंटे खड़े होकर दी परीक्षा
9वीं की छात्रा ने तीन घंटे खड़े होकर दी परीक्षा

मुख्यमंत्री कमलनाथ में इसे बेहद असंवेदनशील, मानवीय मूल्यों के खिलाफ व गंभीर मामला मानते हुए अधिकारियों को तत्काल पूरे मामले की जांच करने को आदेश दिया है.

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मध्य प्रदेश में भोपाल के शाहजनाबाद स्थित सरस्वती को एड हायर सेकेंडरी स्कूल में फीस न भर पाने के कारण 9वीं की छात्रा को स्कूल प्रबंधन ने खड़े होकर परीक्षा देने की सजा दी. मामले के संज्ञान में आने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ में इसे बेहद असंवेदनशील, मानवीय मूल्यों के खिलाफ व गंभीर मामला मानते हुए अधिकारियों को तत्काल पूरे मामले की जांच करने को आदेश दिया है. सीएम कमलनाथ ने पीड़ित छात्रा से चर्चा कर इस पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं. फीस नहीं भर पाने के कारण छात्रा को खड़े रहकर परीक्षा देने की सजा का मामला सही पाए जाने पर उन्होंने दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि शासन के सभी अशासकीय शिक्षण संस्थाओं को पूर्व से ही निर्देश है कि किसी भी बच्चे को फीस न भर पाने के कारण न तो स्कूल आने से रोका जाए , ना ही उसे किसी प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी जाए. किसी छात्र को फीस के लिए परीक्षा से वंचित नहीं करने का भी निर्देश दिया गया है.

इस संबंध में स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों के माता-पिता से अलग से चर्चा करने का नियम है. यदि यह मामला सही पाया जाता है तो स्कूल प्रबंधन ने सभी नियमों का उल्लंघन किया है. साथ ही छात्रा को मानसिक प्रताड़ना भी दी है. यह सरकार की नीतियों के भी विरुद्ध है.



बेटियों को पढ़ाने के लिए सरकार निरंतर अभियान चला रही है. सीएम ने कहा कि "बेटी पढ़ेगी तभी आगे बढ़ेगी " यह हमारे लिए सिर्फ नारा नहीं है. हम इसे अभियान के रूप में ले रहे हैं. बेटियों को पढ़ने के प्रोत्साहन के लिये विभिन्न योजनाएं सरकार ने चला रखी हैं. किसी भी बच्चे को फीस के अभाव में पढ़ाई से व किसी गरीब को पैसे के अभाव में इलाज से वंचित नहीं रखा जा सकता है.



मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि बच्चे अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए वर्षभर पढ़ाई करते हैं और उन्हें परीक्षा का इंतजार रहता है. कड़ी परिश्रम और लगन से परीक्षा को लेकर तैयारियां करते हैं. ऐसे में उनको परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की मानसिक प्रताड़ना मानवीय मूल्यों के भी खिलाफ है व नियमों के विरुद्ध है. यह हमारी सरकार की मंशा के भी विपरीत है. मैंने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और ऐसा कृत्य करने वालों को मैं कतई माफ नहीं कर सकता. ऐसे स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई अन्य स्कूल इस तरह का कृत्य ना कर सके.

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