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भोपाल की इस 'निर्भया' के मामले में न DNA रिपोर्ट आई, न पहुंचा केस फास्ट ट्रैक कोर्ट, कब मिलेगा इंसाफ?

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 3, 2019, 9:17 PM IST
भोपाल की इस 'निर्भया' के मामले में न DNA रिपोर्ट आई, न  पहुंचा केस फास्ट ट्रैक कोर्ट, कब मिलेगा इंसाफ?
न्याय की गुहार लगाने वाली इस मां की नहीं हो रही सुनवाई

हैदराबाद के बर्बर मामले ने भोपाल के मनुभावन टेकरी रेप-हत्या (Manubhawan Tekri Rape Murder) मामले की याद दिला दी है. 12 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद पत्थरों से कुचलकर की गई हत्या के इस मामले का केस 7-8 महीने बाद भी फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं पहुंच पाया है, न ही इसकी डीएनए रिपोर्ट ही आई है. इस मां ने फिर से न्याय के लिए गुहार लगाई है

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भोपाल. हैदराबाद में युवती से बर्बरता के विरोध में पूरे देश में आक्रोश है. हर कोई न्याय की मांग कर रहा है. भोपाल (Bhopal) में भी एक मां, न्याय की गुहार लगा रही है. इस मां ने भी अपनी मासूम बच्ची खोई है और अब वो आरोपियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रही है. भोपाल की इस पीड़िता की मां का कहना है कि आखिर कब तक सहानुभूति प्रकट की जाएगी. कब तक लोग सड़कों पर कैंडल मार्च (Candle) निकालेंगे. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए.

'मामले में टाल मटोल कर रही है पुलिस'
राजधानी भोपाल में 7-8 महीने पहले मनुभावन टेकरी पर कुछ लड़कों ने 12 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद पत्थरों से कुचलकर हत्या कर दी थी. पीड़िता की मां का कहना है कि 7-8 महीनों बाद भी केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में नहीं भेजा गया है, जबकि शुरूआत में ही बोला गया था कि केस फास्ट ट्रेक कोर्ट में चलेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अब तक मामले में टाल मटोल कर रही है, यहां तक कि मामले की डीएनए रिपोर्ट भी नहीं आई है. अपनी बच्ची को खोने वाली इस पीड़िता का कहना है कि जिस देश में कानून व्यवस्था इतनी लचर है वहां इतनी जल्दी न्याय की कल्पना करना भी मुश्किल है.

'एक महीने बाद सब भूल जाते हैं..

भोपाल की इस मां इन सारी बीतों से गुज़र चुकी है. उनका कहना है कि जब घटना होती है तो पूरे शहर के लोग, नेता सब साथ आ जाते हैं, सहानूभति दिखाते हैं, लेकिन जब ठोस कार्रवाई होगी तभी ऐसे जघन्य अपराधों पर लगाम लगेगी. उन्होंने कहा, 'बर्बरता के एक महीने तक लोगों के अंदर बहुत गुस्सा होता है. लोग सड़कों पर कैंडल मार्च निकालते हैं, श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन सही मायने में क्या बच्ची को श्रद्धांजलि मिल पाती है. क्या उनकी आत्मा को शांति मिल पाती है. एक महीने बाद सब लोग भूल जाते हैं. ये भी भूल जाते है कि जिस बच्ची, जिस बहन, जिस बेटी के लिए हमने कैंडल मार्च निकाला था, गुस्सा दिखाया था, क्या उस बच्ची को न्याय मिल पाया है?'

'इसलिए बुलंद हैं दरिंदों के हौसले..
उन्होंने कहा कि, 'सिर्फ परिवार के लोग ही न्याय के लिए जूझते रहते हैं, न्याय प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि कभी इस कोर्ट में तो कभी उस कोर्ट में.. लेकिन न्याय तो मिल ही नहीं पाता है. फांसी की सजा भी हो जाती है तब भी फांसी नहीं होती है जिसके चलते दरिंदों के हौसलें बुलंद हैं. इसीलिए इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है.'ये भी पढ़ें -
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First published: December 3, 2019, 8:46 PM IST
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