ई-टेंडर महाघोटाला : अब तक की जांच में नहीं मिले शिवराज के करीबी नरोत्तम मिश्रा के ख़िलाफ सबूत

EOW के डीजी केएन तिवारी का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ अभी तक साक्ष्‍य नहीं मिले हैं. उन्‍होंने जांच जारी रहने की बात कही है.

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 11:50 AM IST
ई-टेंडर महाघोटाला : अब तक की जांच में नहीं मिले शिवराज के करीबी नरोत्तम मिश्रा के ख़िलाफ सबूत
ई-टेंडर घोटाले में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ अभी तक सबूत नहीं मिले हैं. (फाइल फोटो)
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 11:50 AM IST
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडर महाघोटाला मामले में अब तक की जांच में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ ईओडब्ल्यू (EOW) को कोई सबूत नहीं मिले हैं. मिश्रा के दो निजी सहायकों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनसे पूछताछ में भी EOW को कोई तथ्य नहीं मिला.

145 दिन की जांच
ईओडब्ल्यू ने तीन हजार करोड़ के ई-टेंडर घोटाले में 10 अप्रैल को जांच शुरू की थी. इसमें पांच विभागों, 7 कंपनियों के डायरेक्टरों के साथ ही अज्ञात नौकरशाहों और राजनेताओं के खिलाफ धारा 120B, 420, 468, 471, आईटी एक्ट 2000 की धारा 66, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 सहपठित धारा 13(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. FIR कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्‍पांस टीम की जांच के आधार पर की गई. जिन नौ टेंडर्स में टैंपरिंग हुई, उनमें जल निगम के तीन, लोक निर्माण विभाग के दो, जल संसाधन विभाग के दो, मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम का एक और लोक निर्माण विभाग की पीआईयू का एक टेंडर शामिल है. ये टेंडर जनवरी से मार्च 2018 के दौरान प्रोसेस हुए थे. बता दें कि 145 दिन की जांच पूरी होने के बाद भी ईओडब्ल्यू के हाथ कोई भी ऐसा सबूत नहीं लगा है, जिसके आधार पर नरोत्तम मिश्रा या फिर दूसरे राजनेताओं पर शिकंजा कसा जा सके.

नौ लोगों को किया गया था गिरफ्तार

एफआईआर के बाद ईओडब्ल्यू (EOW) ने करीब नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया था. इनमें दो आरोपी वीरेंद्र पांडेय और निर्मल अवस्थी पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निजी सहायक रह चुके हैं. शिवराज सरकार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के पास जल संसाधन विभाग था, ऐसे में उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लगने लगे. ईओडब्ल्यू ने उनकी भूमिका की जांच भी की, लेकिन एफआईआर के बाद से अभी तक की जांच में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिले हैं. अभी तक की जांच में ईओडब्ल्यू ने सिर्फ कंपनियों और विभाग के अधिकारियों की गिरफ्तारी की है.

इन पर दर्ज है FIR?
हैदराबाद की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स जीवीपीआर लिमिटेड, मैसर्स मैक्स मेंटेना लिमिटेड, मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी दी ह्यूम पाइप लिमिटेड, मेसर्स जेएमसी लिमिटेड, बड़ौदा की कंस्ट्रक्शन कंपनी सोरठिया बेलजी प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड, भोपाल की कंस्ट्रक्शन कंपनी मेसर्स राजकुमार नरवानी लिमिटेड डायरेक्टरों पर एफआईआर दर्ज है. इनके साथ भोपाल की सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है. EOW के डीजी केएन. तिवारी का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ अभी तक साक्ष्‍य नहीं मिले हैं. लेकिन, जांच जारी है.
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First published: September 2, 2019, 11:06 AM IST
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