आंदोलन की आहट से सरकार सतर्क, सीएम हाउस में बुलाया ओबीसी सम्मेलन!

मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग में एक्ट को लेकर तीखा विरोध देखने को मिल रहा है.

Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 4, 2018, 12:30 PM IST
आंदोलन की आहट से सरकार सतर्क, सीएम हाउस में बुलाया ओबीसी सम्मेलन!
CM Shivraj- File Photo
Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 4, 2018, 12:30 PM IST
SC/ST एक्ट को लेकर मध्य प्रदेश में जमकर हंगामा हो रहा है. प्रदेश के कई इलाकों में सवर्ण समाज के साथ-साथ अब ओबीसी भी विरोध में उतर आया है. सामान्य और पिछड़े वर्ग की एकजुटता से एमपी सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं. अब सरकार ओबीसी को लेकर एक महासम्मेलन करने जा रही है, जिसे लेकर सीएम हाउस में एक अहम बैठक मंगलवार को बुलाई गई है.

दरअसल, मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग में एक्ट को लेकर तीखा विरोध देखने को मिल रहा है. नरेंद्र तोमर, माया सिंह, प्रभात झा फिर ज़्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ का विरोध करके लोगों ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में ये मुद्दा खासा हावी रहने वाला है. ऐसे में सरकार और बीजेपी इस बात को लेकर चिंतित है कि सवर्ण के साथ पिछड़ा वर्ग से आने वाले चुनावों में उन्हें बड़ा नुकसान न हो जाए, इसी को मद्देनज़र रखते हुए सीएम हाउस में आज ओबीसी समाज के मंत्री, विधायक, सांसद, पदाधिकारी इकट्ठा होने जा रहे हैं. 10 सितंबर को सतना में ओबीसी का महासम्मेलन होने जा रहा है, तैयारियों के बहाने इस मुद्दे पर चर्चा ज़रुर होगी.

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दरअसल, एट्रोसिटी एक्ट में नए संशोधनों को लेकर सवर्णों जितनी ही नाराजगी पिछड़े वर्ग में भी है. एक वर्ग मानता है कि एट्रोसिटी एक्ट के बेजा इस्तेमाल से ओबीसी भी प्रताड़ित हो रहा है. एससी की आबादी प्रदेश में करीब 16% है जबकि एसटी की आबादी 21% के करीब है.

-वोटों के गणित के हिसाब से एससी-एसटी वर्ग कमिटेड वोटर है जो कि एकजुट होकर वोट करता है.
-आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश में जिस पार्टी के लिए भी इन दोनों वर्गों के वोट पड़ते हैं सरकार उसी की बनती है
-एट्रोसिटी एक्ट के विरोध ने सामान्य और ओबीसी को एक करना शुरु कर दिया है.
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-अगर पिछड़ा और सामान्य वर्ग एकजुट होकर सरकार के खिलाफ हो गया तो बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है
-प्रदेश में ओबीसी वर्ग के मंत्रियों में खुद सीएम शिवराज, कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन के अलावा कुसुम मेहदेले, भूपेंद्र सिंह, माया सिंह, रुस्तम सिंह, नारायण कुशवाह, ललिता यादव शामिल हैं.

कांग्रेस ने मामले में चुप्पी साध रखी है. कांग्रेस समझ रही है कि बीजेपी सरकार के खिलाफ फूट रहे गुस्से का फायदा चुनावों में उसी को मिलने वाला है, क्योंकि एक ओर बीएसपी और एसपी के साथ गठबंधन की बात चल रही है और दूसरी ओर बिना कुछ किए ओबीसी और सवर्ण सरकार से नाराज़ हो रहे हैं.

चुनावों को देखते हुए अगर प्रदेश के दो वर्ग सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए तो हालात काफी मुश्किल होंगे. अभी तक तो सरकार चुप है लेकिन इन हालातों को देखते हुए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.

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First published: September 4, 2018, 12:24 PM IST
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