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OPINION: सिंधिया ने कमलनाथ के खिलाफ खोला है मोर्चा?

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 14, 2019, 7:58 PM IST
OPINION: सिंधिया ने कमलनाथ के खिलाफ खोला है मोर्चा?
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ के खिलाफ खोला मोर्चा

सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की अचानक बढ़ी सक्रियता से मुख्यमंत्री कमलनाथ (CM Kamalnath) के माथे पर बल पड़ते हुए साफ देखा जा सकता है. सिंधिया अपनी जनसभाओं में सरकार पर हमलावर होते दिखाई दे रहे हैं.

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दिनेश गुप्ता

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले एक सप्ताह से ग्वालियर एवं चंबल संभाग का दौरा कर रहे हैं. वे अपने इस दौरे में परंपरागत विरोधियों के साथ भी बैठ रहे हैं और कार्यकर्ताओं  तथा पार्टी पदाधिकारियों से भी संवाद स्थापित कर रहे हैं. सिंधिया की अचानक बढ़ी सक्रियता से मुख्यमंत्री कमलनाथ के माथे पर बल पड़ते हुए साफ देखा जा सकता है. राहुल गांधी के वादे के मुताबिक प्रदेश में किसानों का 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ न होने पर भी सिंधिया अपनी जनसभाओं में सरकार पर हमलावर होते दिखाई दे रहे हैं.

राहुल के पद छोड़ने से प्रभावित हुआ किसानों से किया वादा
पिछले साल राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज सरकार बनने के 10 दिन के भीतर माफ करने का वादा किया था. राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि यदि 10 दिनों में कर्ज माफ नहीं हुआ तो वे मुख्यमंत्री भी बदल देंगे? राहुल गांधी के इस वादे के चलते ही कांग्रेस 15 साल बाद राज्य की सत्ता में वापस आई थी. कमलनाथ को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था. मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद कमलनाथ ने किसानों की कर्ज माफी का आदेश भी 24 घंटे के भीतर ही जारी कर दिया था. लेकिन, किसानों के 2 लाख रूपए तक के कर्ज अब तक माफ नहीं हो पाए हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया जब मुरैना जिले के दौरे पर गए तो वहां किसानों ने सरकार की वादा खिलाफी की ओर उनका ध्यान भी आकर्षित किया. सिंधिया ने एक जनसभा में कमलनाथ सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के वचन पत्र के अनुसार 2 लाख रूपए तक के किसानों के कर्ज तत्काल माफ होना चाहिए. सिंधिया के हमले पर कमलनाथ आक्रमक तो नहीं हुए लेकिन, उन्होंने यह स्वीकार किया कि अभी सरकार वादे के अनुसार किसानों की कर्ज माफी नहीं कर पाई है. अभी सिर्फ पचास हजार रुपए तक के ही किसानों के कर्ज माफ हुए हैं. अब तक इस मुद्दे पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ही कमलनाथ सरकार को घेर रही थीं. अब पार्टी के भीतर वादे अनुसार किसानों की पूर्ण कर्ज माफी की मांग ने कमलनाथ सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है. प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने किसानों के मुद्दे पर कमलनाथ पर कोई टिप्पणी करने के बजाए सिंधिया को सलाह दी कि वे अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ दें. सिंधिया के दौरे के दौरान एक पोस्टर ऐसा भी देखने में आया था, जिसमें धारा 370 हटाए जाने का समर्थन करने पर उनका धन्यवाद किया गया था. इस पोस्टर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के फोटो भी लगे हुए थे.

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विरोधियों को भी गले लगा रहे हैं सिंधिया
पिछले साल दिसंबर में जब कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला किया गया था, उस वक्त राहुल गांधी ने टॉलस्टॉय के फेमस कोट के साथ कहा था कि धैर्य और समय दो शक्तिशाली यौद्धा हैं. इसके साथ उन्होंने एक तस्वीर ट्विटर पर साझा की थी. इस तस्वीर में एक ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरी ओर कमलनाथ खड़े हुए थे. राहुल गांधी का संदेश साफ था कि अभी सिंधिया को धैर्य रखने की आवश्यकता है, समय कमलनाथ के साथ है. लेकिन, अब लग रहा है कि सिंधिया का धैर्य टूट रहा है. पिछले एक सप्ताह में उन्होंने लगभग आधा दर्जन पत्र मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे हैं. ये पत्र विभिन्न जिलों में कार्यकर्ताओं द्वारा की गईं शिकायतों और मांग पर आधारित हैं. मुरैना में जब कार्यकर्त्ताओं ने पार्टी की सरकार होने के बाद भी नाते-रिश्तेदारों के तबादले न होने की शिकायत की तो सिंधिया ने साफ शब्दों में कहा कि तबादले कैसे हो रहे हैं, आप सभी को पता है? तबादलों में भ्रष्टाचार होने की शिकायत कई मंत्रियों ने भी सिंधिया से की थी. सिंधिया ने जब तबादलों के तरीके पर सवाल उठाया तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसते हुए कहा कि अब सरकार पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है, सिंधिया जब भिंड जिले के दौरे पर गए तो सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के निवास पर खाना-खाने भी पहुंचे. डॉ. गोविंद सिंह को सिंधिया का विरोधी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का करीबी माना जाता है, कमलनाथ मंत्रिमंडल में वे वरिष्ठ मंत्री हैं. सिंधिया के डॉ. गोविंद सिंह के निवास पर जाने का अर्थ यह लगाया कि दोनों के बीच की दूरी अब घट चुकी है. पिछले साल चुनाव से पहले एक अवसर ऐसा भी आया था, जब सिंधिया के खिलाफ डॉ. गोविंद सिंह, मोर्चा खोल हुए थे. बदली स्थिति में वे सिंधिया के बगल में खड़े नजर आ रहे हैं. सिंधिया ने अपने इस दौरे में अपने बारे में बनी इस धारणा को भी तोड़ने की कोशिश की है कि वे कार्यकर्ताओं से दूरी रखते हैं. एक कार्यक्रम में सिंधिया अपने हाथ से कार्यकर्ताओं को खाना खिलाते हुए भी दिखाई दिए. श्योपुर जिले में सिंधिया ने साफ तौर पर कहा कि सरकार जिस वर्ग की आवाज नहीं सुनेगी, उस वर्ग की आवाज वे खुद उठाएंगे.
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सोनिया-राहुल के रिश्तों का असर तो नहीं?
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बदले हुए तेवरों को सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच कथित मतभेद की खबरों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. सिंधिया को राहुल गांधी की टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है, जबकि कमलनाथ की नजदीकी सोनिया गांधी से है. गांधी परिवार से अपनी नजदीकी के चलते ही कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने में सफल हुए थे. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सिंधिया के पक्ष में थे. राहुल गांधी और कमलनाथ के बीच दूरी कई मौकों पर देखी गई. पहला अवसर आया जब लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश नहीं की. राहुल गांधी ने इशारा भी किया था कि हार की जिम्मेदारी हर स्तर पर स्वीकार की जाना चाहिए. सिंधिया ने इशारा समझते ही पार्टी के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था. कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी. पार्टी अब तक उनके स्थान पर नया अध्यक्ष तय नहीं कर पाई है. कमलनाथ, सिंधिया को अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं, दिग्विजय सिंह का भी विरोध है इस कारण मामला टलता जा रहा है. इधर, कमलनाथ मंत्रिमंडल में भी स्थितियां सामान्य दिखाई नहीं दे रहीं हैं. सरकार में दिग्विजय सिंह के कथित दखल का विरोध वन मंत्री उमंग सिंघार कर चुके हैं. इसके बाद से ही दिग्विजय सिंह, कमलनाथ से दूरी दिखाने की कोशिश भी लगातार कर रहे हैं. पिछले दिनों उन्होंने एक ट्वीट के जरिए सड़कों पर बैठीं गायों को लेकर कमलनाथ सरकार की नीयत पर सवाल भी उठाया था.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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First published: October 14, 2019, 7:54 PM IST
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