OPINION : कमलनाथ कैबिनेट में इस वजह से मंत्री नहीं बन पाए दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह
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लक्ष्मण सिंह की राजनीति उनके बड़े भाई के दम पर है लेकिन वे अपने भाई को मुसीबत में डालने का कोई मौका नहीं चूकते. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी हों या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, या कमलनाथ वे सब पर पार्टी लाइन की परवाह किए बिना ट्वीट करते हैं.

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ये पहला मौका नहीं है जब रुबीना शर्मा सिंह ने अपने ट्वीट से सुर्खियां बटोरी हों. वे ना तो कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में हैं और ना ही किसी पद पर. उनकी पहचान की एक बड़ी वजह ये है कि वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के परिवार से हैं. उनके छोटे भाई वर्तमान विधायक लक्ष्मण सिंह की पत्नी हैं और बेबाकी से ट्वीट करने में माहिर हैं.

रुबीना ने इस बार उन्होंने दो ट्वीट किए . इसमें पहले तो कमलनाथ सरकार की एक मंत्री को भाषण नहीं पढ़ पाने के कारण घेरते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ को निशाना बनाया. विवाद के बाद यह ट्वीट डिलिट किया. लेकिन दूसरे ट्वीट में लक्ष्मण सिंह को 8 बार के विधायक होने के बाद भी मंत्री पद नहीं मिलने की पीड़ा जताई. कमलनाथ सरकार में अपने कोटे से दस से ज्यादा मंत्री बनवा चुके दिग्विजय सिंह ने अपने भाई को मंत्री नहीं बनवाया. दरअसल लक्ष्मण सिंह की राजनीति उनके बड़े भाई के दम पर है लेकिन वे अपने भाई को मुसीबत में डालने का कोई मौका नहीं चूकते. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी हों या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, या कमलनाथ वे सब पर पार्टी लाइन की परवाह किए बिना ट्वीट करते हैं.

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लक्ष्मण सिंह का राजनीतिक ग्राफ भारी उतार – चढ़ाव वाला है. यही वजह है कि कांग्रेस में उनकी गिनती किसी निष्ठावान कांग्रेसी के तौर पर नहीं होती है. 2003 में जब मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह चुनाव हारे तो लक्ष्णण सिंह फौरन पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए. वहां से कांग्रेस पर प्रहार करते रहे. भाजपा के टिकट पर वे राजगढ़ से सांसद बन गए. 2009 के लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह ने किसी और को न सिर्फ टिकट दिलाया बल्कि उसे जिताने में अपनी ताकत भी लगा दी.

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लक्ष्मण सिंह ने 2013 में भाजपा अध्यक्ष नितिन गड़करी के बयान से नाराज़ होकर फिर कांग्रेस में वापसी की. दिग्विजय सिंह ने फिर उनका पुनर्वास कांग्रेस में करवाया. लक्ष्मण सिंह को विदिशा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सुषमा स्वराज के खिलाफ मैदान में उतारा. वे चुनाव हार गए लेकिन प्रतिष्ठापूर्ण सीट होने के कारण कांग्रेस में उनकी जगह बन गयी. लेकिन अपनी बयानबाज़ी उन्होंने नहीं छोड़ी. अपनी पार्टी कांग्रेस को ही वो घेरते रहे.

कांग्रेस की पांच राज्यों में हार के बाद लक्ष्मण सिंह ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को सलाह दे डाली कि सोनिया – राहुल अगर जेल जाएं तो कांग्रेस जल्द वापसी कर सकती है. दिग्विजय सिंह जब पिछले दिनों गोवा, कर्नाटक के प्रभार से हटाए गए तो लक्षमण सिंह ने फिर ट्वीट किया-धन्यवाद सोनिया जी आपने दोनों भाइयों को मिला दिया. मध्यप्रदेश कांग्रेस में जब कमलनाथ को कमान सौंपी गई तो उन्होंने इसे ब्लूटूथ के जमाने में एलपी को बजाने जैसा बताया. जब मध्यप्रदेश में चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए तो उन्होंने ट्वीट किया अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में भी हमें तुरंत कार्यकारी अध्यक्ष बनाने चाहिए ताकि कांग्रेस देश में और मज़बूत हो जाए.

बताया जाता है कि ऐसी विवादित शैली के कारण लक्ष्मण सिंह कमलनाथ कैबिनेट में अपनी जगह नहीं बना पाए. दिग्विजय सिंह ने उन्हें चाचौड़ा विधानसभा सीट से टिकट तो दिलवा दिया वे चुनाव भी जीत गए, लेकिन बस उसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी. लक्ष्मण सिंह तो ट्वीट करके विवाद खड़े करते ही रहे हैं, अब उनकी पत्नी रुबना भी उसी लीक पर चल रही हैं. पति को मंत्री पद ना मिलने से नाराज़ रुबीना ने ट्वीटर वार छेड़ दिया. बाद में वे बैकफुट पर आयीं लेकिन तब तक गेंद पवेलियन से बाहर जा चुकी थी.
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