भोपाल के प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने की कगार पर, खतरे में सैकड़ों कोरोना मरीजों की जान

मप्र की राजधानी भोपाल में प्राइवेट अस्पताल नाजुक हालत में पहुंच गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

मप्र की राजधानी भोपाल में प्राइवेट अस्पताल नाजुक हालत में पहुंच गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Bhopal Oxygen Shortage: भोपाल के प्राइवेट अस्पतालों की हालत बेहद खराब है. यहां ऑक्सीजन खत्म हो रही है. कोरोना मरीजों को बचाने की जद्दोजहद चल रही है. अस्पताल प्रबंधन साफ कह रहा है कि परिजन अपने मरीजों को कहीं और ले जाएं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2021, 10:56 AM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर आ रही है. यहां के कई प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन का बैकअप (Oxygen Backup) खत्म होने की कगार पर है. सैकड़ों कोरोना संक्रमित मरीजों की जान खतरे में है. सरकार इनकी व्यवस्था करने में जुटी हुई है.

इधर, शहर के ग्रीन सिटी हॉस्पिटल में कुछ ही घंटों की ऑक्सीजन बची है. इस वजह से वहां भर्ती 25 मरीजों की जान पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए कह दिया है. जानकारी के मुताबिक, ग्रीन सिटी हॉस्पिटल में 80 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन फिलहाल वहां महज 50 सिलेंडर उपलब्ध हैं. इसके अलावा 7 सिलेंडरों की व्यवस्था की जा रही है. इससे मरीजों को जिससे डेढ़ घंटे तक ऑक्सीजन मिल सकेगी.

लगातार बना हुआ है खतरा

बता दें, ग्रीन सिटी हॉस्पिटल के मैनेजर डॉ. रवि सक्सेना ने ADM और CMHO को ऑक्सीजन की कमी की जानकारी दे दी है. डॉ. रवि सक्सेना ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी है. अभी फिलहाल 7 सिलेंडर की गाड़ी आ रही है. प्रशासन ने 8 सिलेंडर रोज देने की बात की है, लेकिन यह सिलेंडर पूरे दिन भर नहीं चल पाएंगे. क्योंकि, रोजाना करीब 80 सिलेंडर की आवश्यकता रहती है.
प्रशासन को दे दी गई है जानकारी- सक्सेना

सक्सेना ने कहा कि प्रशासन को बता दिया गया है. मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए कहा गया है, क्योंकि यदि समय रहते सिलेंडर नहीं मिले तो मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है. अभी फिलहाल कुछ ही घंटों की ऑक्सीजन हमारे पास है. इन सिलेंडरों के आने के बाद भी जरूरत हमें पड़ेगी. बार-बार प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है, क्योंकि हमारे अस्पताल में कोरोना के 39 मरीज भर्ती हैं. इनमें से कई गंभीर हैं, जिनको ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है.
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