MP में सरकारी जमीन पर जमे लोगों को मिलेगा मालिकाना हक बशर्ते...

राज्य सरकार ने आबकारी नीति 2020-21 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी.
राज्य सरकार ने आबकारी नीति 2020-21 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी.

कैबिनेट (Cabinet) ने नगरीय निकायों के अध्यक्ष और महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी

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भोपाल. मध्य प्रदेश (MP) में शहरी इलाकों में सरकारी ज़मीन (Land) पर कब्ज़ा जमाए बैठे लोगों को अब ज़मीन का मालिकाना हक मिलेगा. कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी. सरकार के फैसले के मुताबिक जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले सरकारी ज़मीन पर आ बसे थे उन्हें इसका फायदा मिलेगा.एमपी में अब नगर पालिक अध्यक्ष और नगर निगम महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष तरीके से ही होगा. सरकार ने मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी.

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने आज बड़ा फैसला लेते हुए शहरी इलाकों की सरकारी जमीन पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने का फैसला किया है. शिवराज कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है. मंगलवार को हुई बैठक में तय किया गया कि 31 दिसंबर 2014 से पहले सरकारी ज़मीन पर काबिज हुए लोगों को सरकार जमीन का मालिकाना हक देगी. सरकार के इस फैसले के तहत 30 साल तक का पट्टा दिया जाएगा. 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सरकार ने ये फैसला लेकर शहरी सीटों के लिए बड़ा दांव खेला है.
अब 6 नहीं दो गुना राजस्व देना होगा
राज्य सरकार ने पट्टों को रिन्यु कराने के लिए भी नये नियम बनाए हैं. नये नियमों के तहत लीज नवीनीकरण के लिए 6 गुना नहीं बल्कि 2 गुना भू राजस्व देना होगा. सरकार के इस फैसले के बाद अब स्थाई पट्टा मिलने पर लोग बैंक से लोन ले सकेंगे. सरकार ने इसके लिए जिला स्तर पर कलेक्टर और संभागीय स्तर पर आयुक्तों की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का फैसला किया है. सरकार के फैसले के तहत 31 दिसंबर 2014 तक की स्थिति में सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को पट्टे दिए गए थे. लेकिन स्थाई पत्र  नहीं होने के कारण 50,000 से ज्यादा मामलों का समाधान नहीं हो पाया था. इससे सरकार को राजस्व भी नहीं मिल रहा था. अब सरकार के फैसले से सरकार को राजस्व भी मिल सकेगा.
ये है फैसला
प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि ऐसे सभी व्यक्तियों को आवेदन करने पर स्थाई पट्टा मिलेगा. हालांकि सरकार ने धार्मिक संस्था, खेल मैदान, सड़क, सामुदायिक उपयोग की ज़मीन के पट्टे नहीं देने का फ़ैसला किया है. मिश्रा ने कहा कि सरकार के इस फैसले से ग्वालियर की जेसी मिल की जमीन, नीमच के बंगला बगीचा सहित विवादित ज़मीन से जुड़े मामलों का समाधान हो सकेगा. और लोगों को कानूनी अधिकार मिल सकेगा.



99 साल की लीज
राज्य सरकार ने जो निर्देश जारी किया उसमें 1959 से अब तक भू राजस्व संहिता के तहत नजूल भूमि को लेकर जितने भी निर्देश जारी हुए थे, उन्हें नए सिरे से तैयार किया गया है.  पहले 30 साल बाद पट्टा रिन्यु कराने के लिए भू राजस्व 6 गुना लगता था उसे घटाकर दोगुना कर दिया गया है. प्रदेश सरकार की नई व्यवस्था से  पट्टा धारकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. पट्टे अब 99 साल के लिए लीज पर दिए जा सकेंगे. राज्य सरकार ने तय किया है कि भूखंड 220 वर्ग मीटर से 140 वर्ग मीटर तक दिए जा सकेंगे.

ऑनलाइन रिकॉर्ड
शिवराज कैबिनेट में नजूल भूमि में निवर्तन निर्देश 2020 को मंज़ूरी दी गयी. इसके बाद अब नजूल की भूमि का रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल जाएगा. नजूल भूमि की जानकारी लैंड बैंक के नाम से वेबसाइट पर मिलेगी. सरकारी भूमि के निपटारे के लिए त्रिस्तरीय समितियां जिला संभाग और राज्य स्तरीय होंगी. अस्थाई पदों की व्यवस्था खत्म कर दी गयी है. पूर्व में जारी अस्थाई पदों का स्थाई में बदलाव करने सहित आवासीय भूमि के स्थाई पट्टे उनके पट्टे के भूस्वामी हक में परिवर्तन करने के प्रावधान किए गए हैं.  कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना की समय अवधि 30 जून 2020 से बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2020 करने का फैसला हुआ है.

-राज्य सरकार ने आबकारी नीति 2020-21 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी.
-प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों में संपत्ति कर संबंधी मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि अध्यादेश और नगरीय निकायों के अध्यक्ष और महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि अध्यादेश को मंजूरी दी.
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